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आजादी के सात दशकों बाद भी नहीं बना लाटाखल्ला-भैंसाझाला संपर्क मार्ग
Tue, 04 Jun 2019 11:08 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
विनाद काला बनबसा (चंपावत)।
विनाद काला बनबसा (चंपावत)।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Tue, 04 Jun 2019 11:08 PM IST
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निर्माण को तरसता बनबसा का लाटाखल्ला भैंसाझाला संपर्क मार्ग।
- फोटो : अमर उजाला
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गढ़ीगोठ के लाटाखल्ला से भैंसाझाला को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग नहीं बनने से ग्रामीणों में रोष है। उन्होंने जल्द सड़क निर्माण नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। बता दें कि इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में आसपास के ग्रामीणों के अलावा नेपाल के चांदनी, दोधारा के ग्रामीण भी आवागमन करते हैं। भारत-नेपाल सीमा की चौकसी करने वाली एसएसबी के लिए भी यह संपर्क मार्ग लाइफ लाइन है।
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बनबसा के पूर्वी छोर पर बसे गुदमी ग्रामसभा (गढ़ीगोठ क्षेत्र) के कई गांव आजादी के सात दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। बनबसा में गढ़ीगोठ क्षेत्र सबसे बड़ा कृषि उत्पादन वाला क्षेत्र है। गुदमी ग्रामसभा का गढ़ीगोठ, नया बस्ती, लाटाखल्ला, भैंसाझाला क्षेत्र का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक क्षेत्र है लेकिन इन गांवों की मूलभूत समस्याओं का आज तक निवारण नहीं किया जा सका है।
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ग्रामप्रधान अरुण कुमार ने बताया कि लाटाखल्ला से भैंसाझाला को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग की सुध सरकार ने नहीं ली है। कई बार शासन प्रशासन से गुहार लगाई गई लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों की समस्याओं के संबंध में कदम नहीं उठाया है। उन्होंने बताया लाटाखल्ला और भैंसाझाला की करीब एक हजार की जनसंख्या के अलावा इस संपर्क मार्ग से नेपाल के चांदनी, दोधारा के ग्रामीण भी प्रतिदिन भारत-नेपाल के बीच आवागमन किया करते हैं। साथ ही एसएसबी के लिए भी इस मार्ग का खास महत्व है।
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करीब दो किमी. लंबे संपर्क मार्ग का आजादी के बहत्तर वर्षों बाद भी निर्माण नहीं कराया गया है। पूर्व प्रधान सुनीता बिष्ट, वयोवृद्ध ग्रामीण पीतांबर दत्त जोशी आदि ने बताया कि बरसात में इस मार्ग पर आवागमन करने में ग्रामीणों को परेशानी होती है। सड़क पर कीचड़ होने के साथ ही जलमग्न रहती है। ग्रामीणों ने जल्द सड़क का निर्माण नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।