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पुलिस कर्मी सुरेश सिंह के हत्यारों को आजीवन कारावास
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Wooden gavel and books on wooden table, law concept
- फोटो : Court-00000.jpg
चंपावत। साढ़े छह साल पहले एक पुलिस कर्मी की हत्या के मामले में दो लोगों को जिला न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। आदेश आने के बाद दोनों अभियुक्तों को लोहाघाट न्यायिक बंदीगृह भेज दिया गया। पुलिस कर्मी सुरेश सिंह साढ़े छह साल पहले पिथौरागढ़ जिले में तैनात थे। घटना के वक्त वह भाई के विवाह के लिए अपने घर पाटी ब्लॉक के खेतीखान कडवाल गांव आए थे।
15 जून 2015 की रात घर के पास सड़क किनारे तीन दोस्तों के साथ खड़े सुरेश सिंह के साथ कार सवार कर्णकरायत निवासी सुंदर सिंह करायत और चौड़ाढेक निवासी रवींद्र सिंह ढेक ने गालीगलौज की। रोकने पर दोनों ने चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया। लहूलुहान सुरेश सिंह को लोहाघाट अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बरेली ले जाया गया, जहां चार हफ्ते बाद इलाज के दौरान अस्पताल में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
मृतक के पिता महेश सिंह की तहरीर पर लोहाघाट पुलिस ने 17 जून को दो नामजद आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 504 और शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। इलाज के दौरान मौत के बाद आईपीसी की धारा 307 को बदल कर 302 कर दी गई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने गवाही और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुंदर सिंह करायत और रवींद्र सिंह ढेक को दोषी पाया गया।
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जिला जज कहकशां खान ने दोनों आरोपियों को शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों अपराधियों पर 1.55-1.55 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। दोनों दोषियों को मृतक पुलिस कर्मी सुरेश सिंह के परिजनों को मुआवजे के रूप में सवा-सवा लाख रुपये भी देने के आदेश दिए गए हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी आरसी उप्रेती ने मामले की पैरवी की।
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15 जून 2015 की रात घर के पास सड़क किनारे तीन दोस्तों के साथ खड़े सुरेश सिंह के साथ कार सवार कर्णकरायत निवासी सुंदर सिंह करायत और चौड़ाढेक निवासी रवींद्र सिंह ढेक ने गालीगलौज की। रोकने पर दोनों ने चाकू से हमला कर उसे घायल कर दिया। लहूलुहान सुरेश सिंह को लोहाघाट अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बरेली ले जाया गया, जहां चार हफ्ते बाद इलाज के दौरान अस्पताल में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
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मृतक के पिता महेश सिंह की तहरीर पर लोहाघाट पुलिस ने 17 जून को दो नामजद आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 504 और शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। इलाज के दौरान मौत के बाद आईपीसी की धारा 307 को बदल कर 302 कर दी गई। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने गवाही और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुंदर सिंह करायत और रवींद्र सिंह ढेक को दोषी पाया गया।
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जिला जज कहकशां खान ने दोनों आरोपियों को शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों अपराधियों पर 1.55-1.55 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। दोनों दोषियों को मृतक पुलिस कर्मी सुरेश सिंह के परिजनों को मुआवजे के रूप में सवा-सवा लाख रुपये भी देने के आदेश दिए गए हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी आरसी उप्रेती ने मामले की पैरवी की।