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चंपावत : न दिल का इलाज न दिमाग का

Wed, 06 Sep 2023 11:17 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Wed, 06 Sep 2023 11:17 PM IST
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Less doctor in champawat hospital
चंपावत का जन औष​धि केंद्र। संवाद
चंपावत/लोहाघाट/टनकपुर। चंपावत जिले में कहीं भी दिल की बीमारी का इलाज नहीं है। न सीटी स्कैन मशीन है और न ही न्यूरो से संबंधित इलाज का इंतजाम है। सर्जरी भी सिर्फ जिला अस्पताल में हो रही है। अन्य अस्पतालों के हाल और भी खराब हैं। इस कारण अधिकतर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
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चिकित्सकों के सृजित 107 पदों के सापेक्ष डॉक्टर तो हैं लेकिन विशेषज्ञों की कमी है। वर्ष 1997 में बने चंपावत जिले में वर्ष 2012 से जिला अस्पताल संचालित हुआ। दो दशक में दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीमांत तामली और भिंगराड़ा में खुले। फिर भी दूरदराज के लोगों को मामूली इलाज के लिए भी 52 किमी दूर चंपावत आना पड़ रहा है। भवन न होने से दोनों अस्पताल एएनएम केंद्रों में चल रहे हैं।
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डीएच और एसडीएच में खुले जन औषधि केंद्रों से दवाएं जरूर किफायती दरों पर मिल रहीं हैं लेकिन इन केंद्रों में सिर्फ 150 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं। जिले में दो करोड़ रुपये से दो ट्रॉमा सेंटर बने लेकिन दोनों केंद्र अनुपयोगी हैं। लोहाघाट के सेंटर में ओपीडी के मरीज देखे जाते हैं। टनकपुर के सेंटर में भी टीका केंद्र आदि दूसरे विभागीय काम कराए जा रहे हैं। दोनों आईसीयू भी बंद हैं।
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चंपावत: स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार



1. डीएच और दोनों एसडीएच में जन औषधि केंद्रों के जरिए सस्ती दवाओं की उपलब्धता।



2. जिला अस्पताल में हंस फाउंडेशन के सहयोग से डायलिसिस की सुविधा।



3. डीएच और दोनों एसडीएच में अल्ट्रासाउंड परीक्षण की सुविधा।



4. डीएच और दोनों एसडीएच में ऑक्सीजन प्लांट लगे।



5. जिला अस्पताल में आईसीयू का संचालन।



6. रक्तकोष की स्थापना हुई।



चंपावत : इन सुविधाओं का है इंतजार



1. जिले के किसी भी अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, मानसिक रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन नहीं।



2. चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर के तीन अस्पतालों को छोड़ चंपावत जिले के 18 स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज की सुविधाएं नाकाफी।



3. चंपावत, लोहाघाट, टनकपुर के तीन केंद्रों के अलावा कहीं भी एक्सरे की सुविधा नहीं।



4. चंपावत को छोड़ किसी भी अस्पताल में गायनाकोलॉजिस्ट और फिजिशियन नहीं।



5. टनकपुर और लोहाघाट के ट्रॉमा सेंटर का सात साल बाद भी संचालन नहीं।



6. चंपावत को छोड़ किसी भी अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं।



7. टनकपुर और लोहाघाट के आईसीयू में ताले लटके हैं।



8. चंपावत जिले में कहीं भी सीटी स्कैन की सुविधा नहीं।



लोहाघाट एसडीएच में खाली विशेषज्ञों के पद: गायनाकॉलोजिस्ट, अस्थिरोग, सर्जन, ईएनटी, पैथोलॉजिस्ट, बाल रोग, चर्मरोग विशेषज्ञ।



एसडीएच टनकपुर में खाली विशेषज्ञों के पद: गायनाकॉलोजिस्ट, ईएनटी, पैथोलॉजिस्ट, बाल रोग, चर्मरोग विशेषज्ञ।



बुजुर्गों की राय में स्वास्थ्य के हाल



अपना-अपना दर्द



चंपावत जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। विशेषज्ञों के ज्यादातर पद खाली हैं लेकिन उससे भी ज्यादा समस्या अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों का मरीजों के प्रति उदासीन नजरिया है। - हरीश पांडे, सेवानिवृत्त कर्मी, चंपावत।






जिला मुख्यालय की स्वास्थ्य सेवाओं में तो काफी सुधार है लेकिन दूरदराज के हाल ठीक नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की दिक्कतों को दूर करने के लिए पीएचसी स्तर के अस्पतालों की सेवाओं को बेहतर करना जरूरी है। -डॉ. बीसी जोशी, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, चंपावत।






तीन ब्लॉक की धुरी लोहाघाट है। यहां के एसडीएच में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और उपकरण आवश्यक हैं। इससे जिला अस्पताल पर दबाव कम होगा। सभी अस्पतालों में अनिवार्य रूप से डॉक्टर हों। सीटी स्कैन सहित अन्य बड़े उपकरण लगाने के साथ ही तकनीशियनों की तैनाती जरूरी है। - डॉ. आरके जोशी, रिटायर्ड पीएमएस, जिला अस्पताल।






इसे अलग से कोट बनाएं



जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुईं हैं। सभी अस्पतालों में चिकित्सक हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए डीजी से आग्रह किया गया है। टनकपुर में सर्जरी शुरू कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नेपाल सीमा सहित समूचे ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं में सुधार के लिए काम किया जा रहा है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ, चंपावत।




लोहाघाट अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली

लोहाघाट (चंपावत)। उप जिला अस्पताल में विशेषक चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। नगर पालिकाध्यक्ष गोविंद वर्मा, सभासद राजकिशोर साह, राज्य आंदोलनकारी राजू गड़कोटी, दीपक साह, दीपक गोस्वामी आदि का कहना है कि लोहाघाट अस्पताल में रोजाना 400 से अधिक ओपीडी होती है। जहां लोगों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है।


इन विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली



उप जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 11 पद सृजित हैं, जिनमें से स्त्री रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, ईएनटी के पद खाली हैं। इस कारण रोगियों को बाहरी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।




ये विशेषज्ञ चिकित्सक हैं तैनात



उप जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, फिजीशियन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक तैनात हैं। इससे रोगियों को काफी राहत मिल रही है।




अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के खाली पदों को भरने के लिए लगातार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे जा रहे हैं। जिला अस्पताल से हड्डी रोग और बाल रोग विशेषज्ञ सप्ताह में दो दिन अस्पताल में आकर सेवाएं दे रहे हैं। इससे रोगियों को लाभ मिल रहा है। - डॉ. सोनाली मंडल, चिकित्साधीक्षक, उप जिला अस्पताल, लोहाघाट।
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