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चंपावत में जेल होती तो बचते लाखों रुपये
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चंपावत के इस निर्माणाधीन जिला जेल को सवा दो करोड़ रुपये खर्च करने के बाद बदल दिया गया। संवाद
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत में अब तक जिला जेल नहीं बन सकी है जबकि इस जेल भवन का काम डेढ़ दशक पहले गोरलचौड़ मैदान के पास शुरू हो गया था। चंपावत विकास एवं संघर्ष समिति के बैनर तले लोगों के आपत्ति जताने पर सवा दो करोड़ रुपये खर्च होने के बाद निर्माणाधीन काम लटक गया। इसके बाद फूंगर गांव की जमीन को अनुपयुक्त पाते हुए भूगर्भ विभाग ने खारिज कर दिया। वहीं एक अदद जेल नहीं होने से शातिर आरोपियों को लोहाघाट के बजाय 135 किमी दूर अल्मोड़ा भेजने में दिक्कत आ रही है साथ ही जिला बनने से अब तक सवा करोड़ रुपये इसमें खर्च हो चुके हैं।
अक्तूबर में ही चंपावत जिले के नौ कैदी लोहाघाट भेजे गए हैं जबकि नवंबर में अल्मोड़ा भेजने के लिए 11 कैदियों की सूची अनुमोदन के लिए डीएम के पास भेजी जा रही है। कैदियों को अल्मोड़ा से चंपावत पेशी पर लाने और ले जाने में न केवल सुरक्षा कर्मियों को लगाना पड़ता है बल्कि हर साल मोटी रकम भी खर्च होती है।
चंपावत जिले के विचाराधीन कैदियों को लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है लेकिन यह बंदीगृह मानकों के अनुरूप नहीं है। राजस्व विभाग की यह जेल बकाएदारों को रखने के लिए बनाई गई थी। क्षमता से अधिक कैदी होने के अलावा शातिर और गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति वाले आरोपियों को लोहाघाट से अल्मोड़ा शिफ्ट किया जाता है। लोहाघाट बंदीगृह के प्रभारी सुरेश भट्ट का कहना है कि बंदीगृह में इस वक्त चार महिलाओं सहित कुल 37 कैदी हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिला जेल नहीं होने से धन के अपव्यय के अलावा सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी होती हैं। एसपी देवेंद्र पींचा का कहना है कि अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से आरोपियों को लोहाघाट से अल्मोड़ा भेजा जाता है।
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14 साल और 2.22 करोड़ खर्च होने पर भी नहीं मिली जेल
चंपावत। 14 साल पहले अप्रैल 2008 में शिलान्यास होने के बावजूद चंपावत जिले को जिला जेल नहीं मिल सकी है। हालांकि अप्रैल 2008 में जेल भवन का काम शुरू हुआ लेकिन 2.22 करोड़ रुपये निर्माण और जमीन के मुआवजे में खर्च होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका। जेल की महज चहारदीवारी ही बन सकी। 15 करोड़ की लागत से बनने वाली इस जेल का निर्माण कार्य 2012 से पूरी तरह रुका है। लोगों की आपत्ति के बाद शहर के बीच में निर्माणाधीन जेल को पिछले साल यहां नहीं बनाने का निर्णय हुआ लेकिन नई जगह फूंगर की जमीन को भी जेल के लिए अनुपयुक्त पाया गया। वहीं निर्माणाधीन जेल की पुरानी जगह का उपयोग खेल विभाग करेगा। संवाद
चंपावत शहर में निर्माणाधीन जिला जेल का स्थान बदलने का पहले ही निर्णय लिया जा चुका है। फूंगर गांव में जिला जेल के लिए जमीन चिह्नित की गई थी लेकिन ढलान की वजह से इस जमीन को उपयुक्त नहीं पाया गया है। अब जेल के लिए नई जगह की तलाश की जाएगी। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
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अक्तूबर में ही चंपावत जिले के नौ कैदी लोहाघाट भेजे गए हैं जबकि नवंबर में अल्मोड़ा भेजने के लिए 11 कैदियों की सूची अनुमोदन के लिए डीएम के पास भेजी जा रही है। कैदियों को अल्मोड़ा से चंपावत पेशी पर लाने और ले जाने में न केवल सुरक्षा कर्मियों को लगाना पड़ता है बल्कि हर साल मोटी रकम भी खर्च होती है।
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चंपावत जिले के विचाराधीन कैदियों को लोहाघाट बंदीगृह में रखा जाता है लेकिन यह बंदीगृह मानकों के अनुरूप नहीं है। राजस्व विभाग की यह जेल बकाएदारों को रखने के लिए बनाई गई थी। क्षमता से अधिक कैदी होने के अलावा शातिर और गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति वाले आरोपियों को लोहाघाट से अल्मोड़ा शिफ्ट किया जाता है। लोहाघाट बंदीगृह के प्रभारी सुरेश भट्ट का कहना है कि बंदीगृह में इस वक्त चार महिलाओं सहित कुल 37 कैदी हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि जिला जेल नहीं होने से धन के अपव्यय के अलावा सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी होती हैं। एसपी देवेंद्र पींचा का कहना है कि अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से आरोपियों को लोहाघाट से अल्मोड़ा भेजा जाता है।
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14 साल और 2.22 करोड़ खर्च होने पर भी नहीं मिली जेल
चंपावत। 14 साल पहले अप्रैल 2008 में शिलान्यास होने के बावजूद चंपावत जिले को जिला जेल नहीं मिल सकी है। हालांकि अप्रैल 2008 में जेल भवन का काम शुरू हुआ लेकिन 2.22 करोड़ रुपये निर्माण और जमीन के मुआवजे में खर्च होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका। जेल की महज चहारदीवारी ही बन सकी। 15 करोड़ की लागत से बनने वाली इस जेल का निर्माण कार्य 2012 से पूरी तरह रुका है। लोगों की आपत्ति के बाद शहर के बीच में निर्माणाधीन जेल को पिछले साल यहां नहीं बनाने का निर्णय हुआ लेकिन नई जगह फूंगर की जमीन को भी जेल के लिए अनुपयुक्त पाया गया। वहीं निर्माणाधीन जेल की पुरानी जगह का उपयोग खेल विभाग करेगा। संवाद
चंपावत शहर में निर्माणाधीन जिला जेल का स्थान बदलने का पहले ही निर्णय लिया जा चुका है। फूंगर गांव में जिला जेल के लिए जमीन चिह्नित की गई थी लेकिन ढलान की वजह से इस जमीन को उपयुक्त नहीं पाया गया है। अब जेल के लिए नई जगह की तलाश की जाएगी। -नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।