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एलपीजी तो दूर केरोसीन की व्यवस्था भी नहीं
Sun, 08 Dec 2019 10:27 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
चंद्रशेखर जोशी चंपावत।
चंद्रशेखर जोशी चंपावत।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Sun, 08 Dec 2019 10:27 PM IST
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लकड़ी से खाना बनाती नेपाल सीमा से लगे गांव की कृष्णा देवी।
- फोटो : अमर उजाला
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चार पैसे की आस में दूर दराज से आए ढाई हजार से अधिक मजदूर एलपीजी और केरोसीन की व्यवस्था नहीं होने पर महंगे डीजल से चूल्हा जलाने को मजबूर हैं। महंगा डीजल उनकी जेब तो हल्का कर ही रहा है, यह सेहत के लिए भी काफी नुकसानदेह है।
अब केरोसीन की उपलब्धता न तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हो रही है और न खुले बाजार में। ऐसे में टनकपुर, चंपावत, लोहाघाट क्षेत्र में मजदूरी कर रहे श्रमिकों की रसोई में आग डीजल से ही चल रही है।
बचीराम, राम सिंह, निहार सिंह, सोहन कुमार, उम्मेद राम सहित कई मजदूरों का कहना है कि नगर क्षेत्र में आसानी से लकड़ी उपलब्ध नहीं होने से समस्या बढ़ी है। मजदूर संघ के अध्यक्ष सूरज बोहरा ने बताया कि डीजल से खाना बनाने से श्रमिकों को अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि डीजल की गंध भोजन के स्वाद पर असर डालती है। साथ ही इसकी लौ से बनने वाले खाने से मिचलाहट भी होती है। यह खाना धीरे-धीरे सांस सहित कई बीमारियों का कारण बनता है।
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जुलाई से नहीं मिल रहा केरोसीन
चंपावत। जुलाई से गैसविहीन राशनकार्ड धारकों को केरोसीन नहीं मिल पा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी शिल्पी शुक्ला ने बताया कि चंपावत जिले का हर माह 12 किलोलीटर ( 12000 लीटर) केरोसीन का कोटा है लेकिन ये आवंटन फिलहाल प्रदेश में कहीं नहीं हो रहा है। इस कारण सरकारी सस्ता गल्ला की दुकानों से केरोसीन वितरण नहीं हो पा रहा है। इन दुकानों से गैसविहीन कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो लीटर केरोसीन दिया जाता था।
2338 परिवारों के पास नहीं है रसोई गैस
चंपावत। जिले में 2338 परिवारों के पास रसोई गैस नहीं है। जिले में 58,058 राशनकार्ड धारक हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के 9079 लाभार्थियों को मिलाकर एलपीजी कनेक्शनधारी 55720 ही हैं। ये लोग अब भी रसोई की आधुनिक सुविधा के बजाय पुराने ढर्रे पर गुजरबसर करने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो खाना बनाने को लकड़ी का उपयोग करने को मजबूर हैं। कृष्णा देवी ने बताया कि लकड़ी के चूल्हे से धुएं से दिक्कत होती है।
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अब केरोसीन की उपलब्धता न तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत हो रही है और न खुले बाजार में। ऐसे में टनकपुर, चंपावत, लोहाघाट क्षेत्र में मजदूरी कर रहे श्रमिकों की रसोई में आग डीजल से ही चल रही है।
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बचीराम, राम सिंह, निहार सिंह, सोहन कुमार, उम्मेद राम सहित कई मजदूरों का कहना है कि नगर क्षेत्र में आसानी से लकड़ी उपलब्ध नहीं होने से समस्या बढ़ी है। मजदूर संघ के अध्यक्ष सूरज बोहरा ने बताया कि डीजल से खाना बनाने से श्रमिकों को अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि डीजल की गंध भोजन के स्वाद पर असर डालती है। साथ ही इसकी लौ से बनने वाले खाने से मिचलाहट भी होती है। यह खाना धीरे-धीरे सांस सहित कई बीमारियों का कारण बनता है।
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जुलाई से नहीं मिल रहा केरोसीन
चंपावत। जुलाई से गैसविहीन राशनकार्ड धारकों को केरोसीन नहीं मिल पा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी शिल्पी शुक्ला ने बताया कि चंपावत जिले का हर माह 12 किलोलीटर ( 12000 लीटर) केरोसीन का कोटा है लेकिन ये आवंटन फिलहाल प्रदेश में कहीं नहीं हो रहा है। इस कारण सरकारी सस्ता गल्ला की दुकानों से केरोसीन वितरण नहीं हो पा रहा है। इन दुकानों से गैसविहीन कार्डधारकों को प्रति कार्ड दो लीटर केरोसीन दिया जाता था।
2338 परिवारों के पास नहीं है रसोई गैस
चंपावत। जिले में 2338 परिवारों के पास रसोई गैस नहीं है। जिले में 58,058 राशनकार्ड धारक हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के 9079 लाभार्थियों को मिलाकर एलपीजी कनेक्शनधारी 55720 ही हैं। ये लोग अब भी रसोई की आधुनिक सुविधा के बजाय पुराने ढर्रे पर गुजरबसर करने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो खाना बनाने को लकड़ी का उपयोग करने को मजबूर हैं। कृष्णा देवी ने बताया कि लकड़ी के चूल्हे से धुएं से दिक्कत होती है।