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लड़ीधुरा के जंगल में मिले इंडेन गैस के ढक्कन, सील और सीपीयू
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बाराकोट में लड़ीधुरा के जंगल में बिखरे पड़े इंडेन गैस की सील व ढक्कन।
- फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट के लड़ीधूरा मंदिर के पास जंगल में इंडेन गैस सिलिंडरों के ढक्कन, सील और कंप्यूटर का एक सीपीयू मिलने का मामला सामना आया है। बड़ी मात्रा में जंगल में इंडेन गैस सिलिंडरों के ढक्कन और पैकिंग सील मिलने से लोग कई तरह के कयास लगा रहे हैं। लोग इससे रसोई गैस की कालाबाजारी होने का शक भी जता रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले की जांच की मांग की है।
लड़ीधुरा के मंदिर में घंटियां, बर्तन आदि चोरी होने और दरवाजों के ताले तोड़ने आदि की कई घटनाएं हो चुकी हैं। रविवार को पम्दा के सरपंच नवल जोशी और चरणदत्त अपने मवेशियों को जंगल में चराने ले गए थे। इसी दौरान उन्हें जंगल में इंडेन गैस सिलेंडरों कई ढक्कन, सील पड़ी मिली। मौके पर एक कंप्यूटर का सीपीयू भी पड़ा मिला, जो कुछ जला हुआ था। लोगों का शक है कि ये सामग्री गैस की कालाबाजारी से भी जुड़े हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और गैस एजेंसी के अधिकारियों से मामले की जांच की मांग की है।
वहीं इस मामले में लोहाघाट गैस एजेंसी के प्रभारी कीर्ति मुरारी का कहना है कि जंगल में इंडेन गैस सिलिंडरों के ढक्कन, पैकिंग सील और सीपीयू मिलने का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि एजेंसी से कोई भी सीपीयू गायब नहीं है। सील और ढक्कन वहां कहां से आए, इसका पता लगाने के साथ इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।
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लड़ीधुरा के मंदिर में घंटियां, बर्तन आदि चोरी होने और दरवाजों के ताले तोड़ने आदि की कई घटनाएं हो चुकी हैं। रविवार को पम्दा के सरपंच नवल जोशी और चरणदत्त अपने मवेशियों को जंगल में चराने ले गए थे। इसी दौरान उन्हें जंगल में इंडेन गैस सिलेंडरों कई ढक्कन, सील पड़ी मिली। मौके पर एक कंप्यूटर का सीपीयू भी पड़ा मिला, जो कुछ जला हुआ था। लोगों का शक है कि ये सामग्री गैस की कालाबाजारी से भी जुड़े हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और गैस एजेंसी के अधिकारियों से मामले की जांच की मांग की है।
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वहीं इस मामले में लोहाघाट गैस एजेंसी के प्रभारी कीर्ति मुरारी का कहना है कि जंगल में इंडेन गैस सिलिंडरों के ढक्कन, पैकिंग सील और सीपीयू मिलने का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि एजेंसी से कोई भी सीपीयू गायब नहीं है। सील और ढक्कन वहां कहां से आए, इसका पता लगाने के साथ इस मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।
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