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पिक्चरों में देखि बेर पहाड़ में लगे हुन पडिग़ौ हो महराज कड़वचौथ

Sat, 07 Oct 2017 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। Updated Sat, 07 Oct 2017 11:07 PM IST
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In the pictures seen in the mountainous hill, Hood Padigu ho mahraj kadavchoust
चंपावतक बजार में कड़वचौथकि पूजपाठ सामग्री ले सजिनांनकि एक दुकान। - फोटो : अमर उजाला
 कुमूंक नामलै विख्यात चंपानगरी में यूं त कई त्यार-ब्यार बड़ि धूमधामलै मनाई जान्य भयो। लेकिन आब पिक्चरों और टीवी देखि बेर पहाड़क शांत मानी जान्य चंपावत जिल में लगै कड़वचौथ को त्यार हुन पडिग़ौ हो महराज। पहाड़ में पांच-सात साल बठि गौं घरों में यो नय त्यार मनाईन्यौ। हिंदू शास्त्रों में कड़वचौथक व्रत सुहागिन सैणियों खन सब्बौहे ठुल व्रत मानी जान्य भयो। यो व्रत सुहागिन आपणा घरवालाक लंबी उमरै थैं करनी भईन। जै कारण नई नई ब्योवाइनांकि चेली-ब्यारी पहाड़ में कड़वचौथक चलन बढूंनैछीन। कड़वचौथक यो व्रत कात्तिक महीनै कि कृष्ण पक्षकि चौथी खन मनाई जान्य भयो। ये दिन सैणीमैस पूर दिन भुक्खी-तिस्सी रै बेर ब्याकल खन जून (चांद) देखि और जून खन पानी चड़ा बेर घरवालाकि पूज करि बेर व्रत खोलन्य भईन। ऐ साल कड़वचौथक पर्व आठ तारीख खन पडनौ। 
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संस्कृत स्कूलक मास्साब और कर्मकांडी पंडितज्यू बसंत बल्लभ पाणेज्यूक कूंन छ कि कड़वचौथ त्यारकि खास मान्यता भै। उन बतूनांनकि छांदोग्य उपनिषद में लेखि रा कि जून में घरवाला रूपी ब्रह्मज्यूकि पूजपाठ करनैले सब्बै पाप खत्म है जान्य भय। कड़वचौथाक व्रत में शिवज्यू, पार्वती मैयां, गणेशज्यू, कार्तिकज्यू और जूनकि पूज करनी चैं। जूनकि पूज करनेक बाद माट्टक बन्योक कड़व में चूल, मास की दाल और सुहागकि सामग्री राखि बेर आपणी सासु या घरकि सजानि सुहागिनक खुट्ट छुई बेर सामग्री दिन चैं। 
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आब पहाड़ में लगे लाग्र पडिग़ैछीन पूजाकि दुकान 
चंपावत। कड़वचौथ त्यार खन ली बैर आब पहाड़ में लगे पूज प्रसादकि सामानैकि दुकान लाग्र पडिग़ैछीन। कड़वचौथ खन सुहागिन सैणी करवा, छन्नी, सींक, कलेंडर और साज श्रंगारकि सामान खरीदनैछीन। चंपावत में अच्यालौ बरेली, टनकपुर, लखीमपुर, पीलीभीत बठै दुकानदार कड़वचौथकि पूजपाठकि सामग्री ली बेर आ रयान। इन दुकानदारोंक कूंन छ कि चार पांच साल बठि पहाड़ में लगे कड़वचौथ मनूनौक चलन बड़ि ग्यो। 
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