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गौरा दीदी तू जाली पंज्याला, घरौ बैंना हम रुंला कसिकै...
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लोहाघाट (चंपावत)। सुंई में चल रहे गौरा महोत्सव का गौरा महेश की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ समापन हो गया है। सुंई-बिशुंग की चार्दयोली में मां गौरा अपने मायके मां भगवती मंदिर से भूमि के भूमिया तथा बेताल मंदिर एवं पूरे क्षेत्र की परिक्रमा करते हुए महिलाओं के मांगलिक गीतों के साथ अपनी ससुराल आदित्य महादेव के दरबार में पहुंची। जहां पहले से ही इंतजार में खड़ी महिलाओं ने गौरा-महेश की प्रतिमाओं पर पुष्प वर्षा कर मां गौरा का आशीर्वाद लिया।
महिलाओं ने गौरा दीदी तू जाली पंज्याला, घरौ बैना हम रुंला कसिकै, जी रैया बूबू हो तुमले मैंत बोलायूूं, जी रैया आमा हो तुमले लोली खेलायूूं, आमा बूबू बैठी रैया हम निसि जानू, ईजा बाज्यू बैठी रैया हम निसि जानू आदि गीत गाकर माँ गौरा को नम आँखों से विदाई दी। जहां चारदयोली के पुजारी मदन पुजारी एवं कैलाश चौबे ने विधि - विधान से पूजा अर्चना कर गौरा-महेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। संवाद
फोटो 31 एलएचजी 04पी
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महिलाओं ने गौरा दीदी तू जाली पंज्याला, घरौ बैना हम रुंला कसिकै, जी रैया बूबू हो तुमले मैंत बोलायूूं, जी रैया आमा हो तुमले लोली खेलायूूं, आमा बूबू बैठी रैया हम निसि जानू, ईजा बाज्यू बैठी रैया हम निसि जानू आदि गीत गाकर माँ गौरा को नम आँखों से विदाई दी। जहां चारदयोली के पुजारी मदन पुजारी एवं कैलाश चौबे ने विधि - विधान से पूजा अर्चना कर गौरा-महेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया। संवाद
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फोटो 31 एलएचजी 04पी