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कोलीढेक झील निर्माण के लिए और अवमुक्त हुए पांच करोड़
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चंपावत। लोहाघाट नगर के समीप लोहावती नदी में बनाई जा रही बहुद्देश्यीय कोलीढेक झील के लिए राज्य सरकार की ओर से पांच करोड़ रुपये और अवमुक्त कर दिए हैं। झील निर्माण के लिए 9.85 करोड़ रुपये पहले ही अवमुक्त हो चुके हैं। सिंचाई विभाग की ओर से जून 2021 तक झील के निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। झील का पुनरीक्षित आगणन 30.45 करोड़ हो चुका है। इसमें आठ करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में तथा डेढ़ करोड़ रुपये वन विभाग को दिए जाएंगे।
सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र के अनुसार झील का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सैलानीगोठ में 24 करोड़ और खेतखेड़ा में 22 करोड़ रुपये लागत से शारदा नदी में बाढ़ नियंत्रण के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं, जिन्हें गंगा फ्लड कंट्रोल कमीशन (जेएफसीसी) पटना से स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव नीति आयोग में भेजा गया है। अधिशासी अभियंता के अनुसार लधियाघाटी में 3.65 करोड़ रुपये तथा बौतड़ी में 1.95 करोड़ रुपये लागत से लधिया नदी और सरयू नदी में बाढ़ सुरक्षा के कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार गौड़ी नदी के पुनरुद्धार के लिए पौने पांच करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पलायन और जल स्रोत सूखने के कारण सिंचाई खंड की लगभग 40 फीसदी सिंचाई नहरें बंद हो चुकी हैं। शेष नहरें चालू हालत में हैं, जिससे किसान सिंचाई कर उत्पादन में इजाफा ला रहे हैं।
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सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र के अनुसार झील का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सैलानीगोठ में 24 करोड़ और खेतखेड़ा में 22 करोड़ रुपये लागत से शारदा नदी में बाढ़ नियंत्रण के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं, जिन्हें गंगा फ्लड कंट्रोल कमीशन (जेएफसीसी) पटना से स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव नीति आयोग में भेजा गया है। अधिशासी अभियंता के अनुसार लधियाघाटी में 3.65 करोड़ रुपये तथा बौतड़ी में 1.95 करोड़ रुपये लागत से लधिया नदी और सरयू नदी में बाढ़ सुरक्षा के कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार गौड़ी नदी के पुनरुद्धार के लिए पौने पांच करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पलायन और जल स्रोत सूखने के कारण सिंचाई खंड की लगभग 40 फीसदी सिंचाई नहरें बंद हो चुकी हैं। शेष नहरें चालू हालत में हैं, जिससे किसान सिंचाई कर उत्पादन में इजाफा ला रहे हैं।
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