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पहले पानी की किल्लत और अब मटमैला पानी...

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 11:19 PM IST
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First water shortage and now beige water ...
चंपावत। चार दिन पहले तक चंपावत जिले के अधिकांश पहाड़ी हिस्सों में पानी की जबर्दस्त किल्लत थी। दो दिन तक हुई मूसलाधार बारिश से पानी की कमी तो दूर हो गई है, लेकिन अब नलों से मिल रहा पानी पीने लायक नहीं है। मिट्टी के चलते यह पानी पूरी तरह मटमैला है। लोग पीने के लिए हैंडपंप और नौलों पर आश्रित हैं।
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चंपावत में बीते दो दिनों में 189 मिमी बारिश हुई। इससे जल स्रोतों में सुधार होने से पानी की किल्लत में कमी आई है। पेयजल लाइन से आ रहा पानी अभी पीने लायक नहीं है। चंपावत के काफी बड़े हिस्से में मटमैला पानी की आपूर्ति हो रही है। लोगों का कहना है कि यह पानी पीने के तो दूर, कपड़े धोने के काम भी नहीं आ रहा है। वे हैंडपंप और नौलों से ही पानी भरने को मजबूर हैं। बारिश से पहले चंपावत नगर क्षेत्र में रोजाना 23.60 लाख लीटर पानी के सापेक्ष सिर्फ छह लाख लीटर पानी मिल रहा था। वहीं जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस का कहना है कि तेज बारिश से स्रोत में मिट्टी जमा हो गई है। इससे मटमैला पानी आ रहा है। इस खामी को दूर करने के लिए अपर सहायक अभियंता को भेजा गया है। शनिवार तक साफ पानी आने लगेगा।
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मिट्टी वाले पानी पीने से से पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बीमार लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। उन्हें डायरिया सहित अन्य गंभीर बीमारियां होने का डर रहता है। वहीं बड़े लोगों में इससे उल्टी, दस्त आदि संक्रामक बीमारियों की आशंका रहती है।
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- डॉ. आरपी खंडूरी, सीएमओ, चंपावत।
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