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पहले बंद की सरकारी फैक्ट्री और अब जमीन बेचने पर आमादा
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खंडहर बनी चंपावत की रोजिन टरपंटाइन फैक्ट्री।
- फोटो : CHAMPAWAT
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेक इन इंडिया से लेकर लोकल को करें वोकल के जरिये लोगों को उद्यमिता और औद्योगिक विकास केेे लिए प्रेरित कर रहे हैं लेकिन जिले में उनका आह्वान पूरा नहीं हो रहा है। कई साल पहले बंद हो चुकी जिले की सरकारी लीसा फैक्ट्री को दोबारा शुरू करने की कवायद तो दूर, फैक्ट्री की खाली पड़ी करोड़ों रुपये की जमीन भी बेचने का निर्णय लिया जा चुका है।
कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की चार दशक पूर्व खुली रोजिन टरपंटाइन फैक्ट्री 2005 में बंद होने के बाद पिछले साल दिसंबर में इसकी मशीनरी और उपकरणों को भी नीलाम कर दिया गया। चंपावत को पहचान दिलाने वाली कुमाऊं की इस इकलौती फैक्ट्री की जमीन को भी बेचने का निर्णय निगम बोर्ड ले चुका है। लीसे की प्रचुरता के चलते 1977 में 230 नाली जमीन पर स्थापित यह फैक्ट्री लगातार मुनाफे में चलती रही। 2003 के बाद रियायती लीसा न मिलने से मुनाफा घाटे में बदल गया और 2005 में फैक्ट्री पर ताले लग गए। फैक्ट्री के 31 कर्मियों को गैस, पर्यटक आवास गृह सहित निगम की दूसरी इकाइयों में समायोजित किया गया, तो 90 से अधिक सीजनल, ठेका कर्मियों का रोजगार छिना। फैक्ट्री के तमाम उपकरणों को नीलाम करने के बाद अब यहां की जमीन भी बेचने का फैसला एक औद्योगिक युग का अंत है।
बेस अस्पताल के लिए भी प्रस्तावित है फैक्ट्री की जमीन
चंपावत। फैक्ट्री बंद होने के बाद से निगम की जमीन पर जिला अस्पताल बनाया गया। बेस अस्पताल के लिए भी इसी जमीन को प्रस्तावित किया गया है। चार साल से तहसील कार्यालय और एसडीएम आवास भी वहीं निर्माणाधीन है। फैक्ट्री परिसर में ही चाय फैक्ट्री भी चल रही है। वैसे केएमवीएन ने इस जमीन का उपयोग रिजॉर्ट, होटल और अन्य वाणिज्यिक रूप में करने पर भी विचार किया था, लेकिन इनमें से किसी पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। इसलिए जमीन बेचने का निर्णय लिया गया।
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कोट
बंद हो चुकी रोजिन फैक्ट्री वाली जमीन बेचने के केएमवीएन के निर्णय की प्रशासन के पास विधिवत जानकारी नहीं है। निगम स्वायत्तशासी संस्था है। अलबत्ता जमीन के अन्य रूप में उपयोग करने की स्थानीय लोगों की भावना से निगम को अवगत करा दिया जाएगा।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
उत्तराखंड राज्य का निर्माण विकास के जरिये पलायन रोकने और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर हुआ था लेकिन चंपावत में पहले से स्थापित फैक्ट्री के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है।
- बहादुर फर्त्याल, पूर्व प्रमुख, राज्य आंदोलनकारी
रोजिन फैक्ट्री न केवल चंपावत की पहचान रही है, बल्कि इससे लोगों को रोजगार भी मिला। अब इसे चलाने के लिए उपाय करने के बजाय, इसकी जमीन को बेचने का निर्णय गलत है।
- विजय वर्मा, चेयरमैन, चंपावत।
गलत नीति के चलते पहले सार्वजनिक क्षेत्र की रोजिन फैक्ट्री को बंद करा गया और अब इसकी बेशकीमती जमीन को भी बेेचने की कोशिश की जा रही है, जो क्षेत्र के लिए अहितकारी होगा।
- प्रकाश तिवारी, पूर्व चेयरमैन
जमीन की कमी से कई विकास कार्य लटके पड़े हैं। ऐसे में फैक्ट्री की जमीन को बेचने के बजाय इसका उपयोग स्थानीय जरूरतों के हिसाब से किया जाना चाहिए।
- अमरनाथ सक्टा, अध्यक्ष व्यापार मंडल।
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कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की चार दशक पूर्व खुली रोजिन टरपंटाइन फैक्ट्री 2005 में बंद होने के बाद पिछले साल दिसंबर में इसकी मशीनरी और उपकरणों को भी नीलाम कर दिया गया। चंपावत को पहचान दिलाने वाली कुमाऊं की इस इकलौती फैक्ट्री की जमीन को भी बेचने का निर्णय निगम बोर्ड ले चुका है। लीसे की प्रचुरता के चलते 1977 में 230 नाली जमीन पर स्थापित यह फैक्ट्री लगातार मुनाफे में चलती रही। 2003 के बाद रियायती लीसा न मिलने से मुनाफा घाटे में बदल गया और 2005 में फैक्ट्री पर ताले लग गए। फैक्ट्री के 31 कर्मियों को गैस, पर्यटक आवास गृह सहित निगम की दूसरी इकाइयों में समायोजित किया गया, तो 90 से अधिक सीजनल, ठेका कर्मियों का रोजगार छिना। फैक्ट्री के तमाम उपकरणों को नीलाम करने के बाद अब यहां की जमीन भी बेचने का फैसला एक औद्योगिक युग का अंत है।
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बेस अस्पताल के लिए भी प्रस्तावित है फैक्ट्री की जमीन
चंपावत। फैक्ट्री बंद होने के बाद से निगम की जमीन पर जिला अस्पताल बनाया गया। बेस अस्पताल के लिए भी इसी जमीन को प्रस्तावित किया गया है। चार साल से तहसील कार्यालय और एसडीएम आवास भी वहीं निर्माणाधीन है। फैक्ट्री परिसर में ही चाय फैक्ट्री भी चल रही है। वैसे केएमवीएन ने इस जमीन का उपयोग रिजॉर्ट, होटल और अन्य वाणिज्यिक रूप में करने पर भी विचार किया था, लेकिन इनमें से किसी पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। इसलिए जमीन बेचने का निर्णय लिया गया।
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कोट
बंद हो चुकी रोजिन फैक्ट्री वाली जमीन बेचने के केएमवीएन के निर्णय की प्रशासन के पास विधिवत जानकारी नहीं है। निगम स्वायत्तशासी संस्था है। अलबत्ता जमीन के अन्य रूप में उपयोग करने की स्थानीय लोगों की भावना से निगम को अवगत करा दिया जाएगा।
- सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।
उत्तराखंड राज्य का निर्माण विकास के जरिये पलायन रोकने और रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर हुआ था लेकिन चंपावत में पहले से स्थापित फैक्ट्री के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है।
- बहादुर फर्त्याल, पूर्व प्रमुख, राज्य आंदोलनकारी
रोजिन फैक्ट्री न केवल चंपावत की पहचान रही है, बल्कि इससे लोगों को रोजगार भी मिला। अब इसे चलाने के लिए उपाय करने के बजाय, इसकी जमीन को बेचने का निर्णय गलत है।
- विजय वर्मा, चेयरमैन, चंपावत।
गलत नीति के चलते पहले सार्वजनिक क्षेत्र की रोजिन फैक्ट्री को बंद करा गया और अब इसकी बेशकीमती जमीन को भी बेेचने की कोशिश की जा रही है, जो क्षेत्र के लिए अहितकारी होगा।
- प्रकाश तिवारी, पूर्व चेयरमैन
जमीन की कमी से कई विकास कार्य लटके पड़े हैं। ऐसे में फैक्ट्री की जमीन को बेचने के बजाय इसका उपयोग स्थानीय जरूरतों के हिसाब से किया जाना चाहिए।
- अमरनाथ सक्टा, अध्यक्ष व्यापार मंडल।