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Champawat News: सड़क के दायरे में आ रहे पेड़ों का कटान शुरू
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टनकपुर (चंपावत)। नेपाल में बन रहे ड्राईपोर्ट (सूखा बंदरगाह) तक के लिए बनबसा से फोरलेन सड़क निर्माण की कवायद तेज हो गई है। भूमि हस्तांतरण, सीमांकन और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वन निगम ने पेड़ों का कटान शुरू कर दिया है। सड़क निर्माण का कार्य जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। ठेकेदार कंपनी ने भी कार्यस्थल पर मशीनरियां पहुंचाने के साथ ही अपना कैंप कार्यालय बनाना शुरू कर दिया है।
बनबसा से लगे सीमावर्ती दोधारा-चांदनी क्षेत्र में नेपाल सरकार सूखा बंदरगाह बना रही है। इसके लिए नेपाल ने अपनी भूमि पर शारदा नदी पर 800 मीटर लंबे एवं 23.8 मीटर चौडे़ फोरलेन पुल और सड़क का निर्माण भी कर लिया है। नेपाल के इस बंदरगाह तक पहुंच के लिए अब भारत सरकार द्वारा बनबसा से नेपाल सीमा तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है जिसके लिए 7.28 हेक्टेयर भूमि कार्यदायी विभाग एनएचएआई को हस्तांतरित की जा चुकी है। सीमांकन और सड़क निर्माण के दायरे में आ रहे पेड़ों का छपान होने के बाद अब वन निगम ने पेड़ों का कटान शुरू कर दिया है।
निगम के प्रभागीय प्रबंधक बी लाल ने बताया कि शनिवार से पेड़ों का कटान शुरू हो गया है जबकि कार्यदायी ठेकेदार कंपनी श्री रिद्धि सिद्धि विल्डवेल ने कार्यस्थल पर अपनी मशीनरियां पहुंचानी शुरू कर दी है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एके मौर्या ने बताया कि 15 दिन के अंदर सड़क निर्माण का कार्य शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि बनबसा से नेपाल सीमा तक बनाई जा रही 3.82 किमी लंबी इस फोरलेन सड़क के लिए भारत सरकार ने 177 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। संवाद
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कारोबार का बड़ा केंद्र बनेगा बनबसा बार्डर
टनकपुर (चंपावत)। नेपाल सीमा पर सूखा बंदरगाह बनने से भारत-नेपाल के बीच कारोबार के नए आयात स्थापित होंगे। दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में सामानों के आयात-निर्यात से कारोबार का दायरा बढ़ेगा और ट्रांसपोर्टिंग खर्च घटने से सामान की कीमत में भी राहत मिलेगी। वहीं उत्तराखंड के उद्योगों को भी कारोबार का नया रास्ता मिलेगा। बता दें कि अब तक दोनों देशों के बीच होने वाले आयात-निर्यात का बड़ा कारोबार रक्सौल बार्डर से होता है लेकिन अब रक्सौल की तर्ज पर बनबसा बार्डर भी आयात-निर्यात का बड़ा केंद्र बनेगा। संवाद
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बनबसा से लगे सीमावर्ती दोधारा-चांदनी क्षेत्र में नेपाल सरकार सूखा बंदरगाह बना रही है। इसके लिए नेपाल ने अपनी भूमि पर शारदा नदी पर 800 मीटर लंबे एवं 23.8 मीटर चौडे़ फोरलेन पुल और सड़क का निर्माण भी कर लिया है। नेपाल के इस बंदरगाह तक पहुंच के लिए अब भारत सरकार द्वारा बनबसा से नेपाल सीमा तक फोरलेन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है जिसके लिए 7.28 हेक्टेयर भूमि कार्यदायी विभाग एनएचएआई को हस्तांतरित की जा चुकी है। सीमांकन और सड़क निर्माण के दायरे में आ रहे पेड़ों का छपान होने के बाद अब वन निगम ने पेड़ों का कटान शुरू कर दिया है।
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निगम के प्रभागीय प्रबंधक बी लाल ने बताया कि शनिवार से पेड़ों का कटान शुरू हो गया है जबकि कार्यदायी ठेकेदार कंपनी श्री रिद्धि सिद्धि विल्डवेल ने कार्यस्थल पर अपनी मशीनरियां पहुंचानी शुरू कर दी है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एके मौर्या ने बताया कि 15 दिन के अंदर सड़क निर्माण का कार्य शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि बनबसा से नेपाल सीमा तक बनाई जा रही 3.82 किमी लंबी इस फोरलेन सड़क के लिए भारत सरकार ने 177 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। संवाद
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कारोबार का बड़ा केंद्र बनेगा बनबसा बार्डर
टनकपुर (चंपावत)। नेपाल सीमा पर सूखा बंदरगाह बनने से भारत-नेपाल के बीच कारोबार के नए आयात स्थापित होंगे। दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में सामानों के आयात-निर्यात से कारोबार का दायरा बढ़ेगा और ट्रांसपोर्टिंग खर्च घटने से सामान की कीमत में भी राहत मिलेगी। वहीं उत्तराखंड के उद्योगों को भी कारोबार का नया रास्ता मिलेगा। बता दें कि अब तक दोनों देशों के बीच होने वाले आयात-निर्यात का बड़ा कारोबार रक्सौल बार्डर से होता है लेकिन अब रक्सौल की तर्ज पर बनबसा बार्डर भी आयात-निर्यात का बड़ा केंद्र बनेगा। संवाद