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Champawat News: बारिश के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं किसान

Fri, 05 Jan 2024 11:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Fri, 05 Jan 2024 11:01 PM IST
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Farmers are looking towards the sky for rain
लोहाघाट(चंपावत)। लंबे समय से वर्षा न होने के कारण किसानों के खेत बंजर पड़े हैं। गेहूं की फसल चौपट होने के कगार पर है। कहीं तो गेहूं उगा ही नहीं, कहीं नमी से उगी भी है तो वह बारिश के अभाव में फसल चौपट होने की स्थिति में है। किसान वर्षा की आस में आसमान की ओर टकटकी निगाह लगाए हुए हैं। चंपावत जिले मेें करीब 6448 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की बुआई की गई है। किसानों ने हाड़ तोड़ मेहनत कर गेहूं और जानवरों के लिए चारे के लिए जई की बुआई की थी। सितंबर से वर्षा न होने से सूखे से हालत पैदा होते जा रहे हैं। जानवरों के लिए हरे चारे का संकट हो गया है। किसानों का कहना है कि विगत वर्ष भी वर्षा न होने के कारण उनकी फसल काफी प्रभावित हुई थी। उन्होंने प्रशासन से किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
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कोट
चंपावत जिले में कृषि क्षेत्र में 6448 हेक्टेयर क्षेत्रफल में रबी की बुआई की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश खेती वर्षा पर ही निर्भर है। पर्वतीय क्षेत्र में मात्र पांच फीसदी सिंचाई सुविधा है। यदि 15 दिन के भीतर वर्षा नहीं होती है तो किसानों ने बोयी गई गेहूं की फसल में जमाव कम होगा और जहां जमाव हुआ है वहां फसल की बढ़त न होने से उपज प्रभावित होगी। वर्तमान तक सूखे की सर्वे नहीं की जा रही है।
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जीएस भंडारी, मुख्य कृषि अधिकारी चंपावत।
बाक्स
कहीं मेहनत पर न फिर जाए पानी
लोहाघाट(चंपावत)। काश्तकार गणेश दत्त का कहना है कि वर्षा न होने से उनकी गेहूं, जई की फसल चौपट होने की कगार में पहुंच गई है। हाड़तोड़ मेहनत कर खेतों में गेहूं की बुआई की थी। वर्षा न होने के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिरता जा रहा है।
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किसानों को दी जाए आर्थिक सहायता
लोहाघाट(चंपावत)। काश्तकार बल्देव राय का कहना है कि बारिश की आस में उन्होंने गेहूं और जानवरों के चारे की बुआई की थी। लेकिन लंबे समय से वर्षा न होने से उनके खेत बंजर पड़े हैं। इससे उनके सामने परिवार के भरण पोषण की समस्या पैदा हो रही है। सरकार को किसानों की समस्या देखते हुए जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर आर्थिक सहायता देनी चाहिए।
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