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कटघरे में जिला अस्पताल:जटिल बता रेफर किया डेढ़ घंटे में हुआ सामान्य प्रसव

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2020 11:15 PM IST
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District hospital in the dock: referred to complex, normal delivery done in one and a half hours
निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव से जन्मा नवजात। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य गुणवत्ता एक बार फिर कटघरे में है। जिस गर्भवती महिला को जटिल केस बता उच्च केंद्र रेफर किया गया, उसका करीब डेढ़ घंटे के भीतर निजी अस्पताल में सामान्य प्रसव हो गया। मां और शिशु दोनों पूरी तरफ स्वस्थ हैं। मंगलवार को दोनों को निजी अस्पताल ने छुट्टी भी दे दी।
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चंपावत से पांच किलोमीटर दूर फुलारगांव की गर्भवती महिला ललिता उप्रेती (28) पत्नी त्रिभुवन उप्रेती की सोमवार रात अचानक तबियत बिगड़ी, तो परिजन ललिता को रात नौ बजे जिला अस्पताल लाए। बकौल परिजन अस्पताल में परीक्षण के बाद उन्हें केस के जटिल होने की बात कह उच्च केंद्र जाने को कहा गया। लेकिन उनके पास आगे जाने को धन नहीं था। त्रिभुवन उप्रेती का कहना है कि आनन-फानन में वे गर्भवती पत्नी को पास के ही एक निजी अस्पताल ले गए। इस बीच परीक्षण चल ही रहा था कि महिला का सामान्य प्रसव हो गया। निजी अस्पताल के प्रबंधक दीपक जोशी का कहना है कि जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। दुपहर बाद दोनों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
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परिजनों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में करीब दो हफ्ते पूर्व भी जांच के दौरान चार घंटे के भीतर उच्च केंद्र रेफर किया गया था। पति त्रिभुवन उप्रेती कहते हैं कि तब पत्नी का पिथौरागढ़ परीक्षण कराया, तो वहां हालात सामान्य निकले। अलबत्ता परेशानी के अलावा इस कवायद में उनके पांच हजार रुपये खर्च हो गए। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच करने की स्वास्थ्य विभाग से मांग की है।
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छह माह के मातृत्व अवकाश में हैं गायनाकोलॉजिस्ट
चंपावत जिला अस्पताल में तीन साल बाद इस साल जून में गायनाकोलॉजिस्ट की तैनाती हुई। डॉ. मोनिका की मौजूदगी में अगस्त तक 60 से ज्यादा प्रसव हुए। लेकिन गायनाकोलॉजिस्ट 28 अगस्त से 180 दिन के मातृत्व अवकाश में हैं। उनके अवकाश में होने के बाद से एक बार फिर से जिला अस्पताल में महिला संबंधी इलाज के लिए लोगों को दुश्वारी हो रही है।

कोट
गर्भवती महिला का डॉ. प्रियदर्शिका और स्टाफ नर्स ने पूरी शिद्दत के साथ परीक्षण किया था। महिला का काफी पानी बह चुका था, दर्द बिल्कुल नहीं हो रहा था। ऐसे में सामान्य प्रसव करने से शिशु की जिंदगी पर खतरे का अंदेशा था। ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने से उच्च केंद्र रेफर किया गया। अस्पताल की ओर से किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है।
डॉ. आरके जोशी,
पीएमएस, चंपावत।
इस साल गर्भवती महिलाओं और अन्य महिला मरीजों के प्रमुख प्रकरण:
26 मई:चल्थी में 108 एंबुलेंस में जन्मे नवजात की हल्द्वानी पहुंचने से पहले मौत।
15 जून:जिला अस्पताल के हाथ खड़े करने पर लोहाघाट में हुआ था सामान्य प्रसव।
11 जुलाई:108 एंबुलेंस नहीं मिलने से बुजुर्ग महिला की मौत।
14 जुलाई:हायर सेंटर रेफर की गई महिला की रास्ते में मौत।
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