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विज्ञान मेले में धीरज का भूकंप संवेदी यंत्र रहा अव्वल
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:49 PM IST
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विज्ञान महोत्सव में अव्वल आए प्रतिभागियों के साथ मुख्य अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
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जीआईसी में आयोजित जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव का पुरस्कार वितरण के साथ समापन किया गया। महोत्सव के तहत आयोजित किए गए विज्ञान मेले में प्रौद्योगिकी और अभियांत्रिकी विषय में जीआईसी पनियां के छात्र धीरज सिंह मेहता का भूकंप संवेदी यंत्र पहले स्थान में रहा। छीनीगोठ हाइस्कूल के अमित गोलिया दूसरे, विवेकानंद विद्या मंदिर टनकपुर के अभय कश्यप तीसरे स्थान में रहे।
इस मौके पर टनकपुर के अनिल कश्यप और सुनील बिष्ट, जीआईसी गरसाड़ी के मनोज तिवारी, विजय सिंह तथा जीआईसी पाटी के अंकित गहतोड़ी और रोहित भट्ट की ओर से तैयार मॉडल भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित किए गए। जूनियर वर्ग में सतत विकास के लिए नवाचार विषय के तहत अन्य उप विषयों में दीपक आर्य, आरती, जीवन चंद्र जोशी, केविन, मोहित गड़कोटी, कमल बिष्ट, सिद्धार्थ पांडेय, भावेश पांडेय, कपिल भट्ट, विभव गड़कोटी, देव सिंह मनराल, आख्यांश, सूरज जोशी, लोकेश ओली, नव्या यादव, अजय सिंह अधिकारी, शुभम राज, निखिल तलनियां ने बाजी मारी। सीनियर वर्ग में बृजेश फर्त्याल, सुरेश जोशी, निखिल भंडारी, प्रियांशु फर्त्याल, रोहित जोशी, विशाल मनराल, विनोद सामंत, भावना अधिकारी, कमला कलखुड़िया, राहुल सिंह, मीनाक्षी, विजय शर्मा, हरीश अधिकारी, पंकज पांडेय, हेमा गोस्वामी, महेश सिंह, रितिका बोरा, किरन जोशी अव्वल रही। विज्ञान ड्रामा में जीआईसी पाटी प्रथम, जीआईसी लोहाघाट द्वितीय और जीआईसी बापरू तृतीय रहा।
सीमा पर नजर रखेगा लाइट डिपेंड रजिस्टर
चंपावत। सीमा पर नजर रखने को टनकपुर विवेकानंद विद्या मंदिर के 11वीं के छात्र अनिल कश्यप और सुनील सिंह बिष्ट ने नायाब यंत्र तैयार किया है। लाइट डिपेंड रजिस्टर नाम का ये यंत्र न सिर्फ सीमा पर नजर रखने में सक्षम हैं, बल्कि मानव रहित पोस्ट पर भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। चंपावत जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव में दो बाल वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत इस प्रोजेक्ट को यंत्र की इन्हीं खूबियों के चलते पहला स्थान हासिल हुआ। अनिल और सुनील अब इस यंत्र में ऑटोमेटिक फायरिंग को जोड़ राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल करेंगे।
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दोनों छात्रों ने जिला स्तरीय प्रतियोगिता में इस यंत्र का प्रदर्शन किया। बताया कि यह यंत्र सीमा पर नजर रखने में सक्षम है। यंत्र से निकलने वाली अदृश्य तरंगें सीमा पार निकलेंगी। इन तरंगों की जद में किसी तरह की परछाई आने पर तत्काल सायरन बजेगा। जिससे सीमा पर होने वाली किसी भी हलचल का पता चल सकेगा। उनका कहना है कि यंत्र में सुधार कर इसमें ऑटोमेटिक फायरिंग का विकल्प लगाया जाएगा। यंत्र उस जगह ज्यादा कारगर होगा, जहां पर सैनिकों का रहना मुश्किल होता है। मार्गदर्शक शिक्षक जगदीश सिंह बोहरा ने बताया कि अनिल और सुनील तीन वर्ष से वैज्ञानिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। इन दोनों मॉडलों पर वे एक वर्ष से काम कर रहे थे। अनिल पिछले वर्ष भी जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अव्वल रहे।
ध्वनि से बिजली पैदा करने का यंत्र भी बनाया
अनिल और सुनील ने ध्वनि से बिजली पैदा करने का यंत्र भी विकसित किया है। किसी भी तरह के कंपन से एलईडी बल्ब जलाए जा सकते हैं। चलती रेलगाड़ी और लाउडस्पीकर से निकलने वाली ध्वनि से एलईडी के 40 बल्ब जलाये जा सकते हैं। शादी-ब्याह में बजने वाले डीजे की ध्वनि से बिजली पैदा करने के साथ ही उसे संरक्षित भी किया जा सकता है। निश्चित मात्रा में निकलने वाली ध्वनि से बिजली पैदा की जा सकती है। उनका कहना है कि ये यंत्र उस जगह बेहद कारगर होगा जहां बिजली की व्यवस्था नहीं है।
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इस मौके पर टनकपुर के अनिल कश्यप और सुनील बिष्ट, जीआईसी गरसाड़ी के मनोज तिवारी, विजय सिंह तथा जीआईसी पाटी के अंकित गहतोड़ी और रोहित भट्ट की ओर से तैयार मॉडल भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित किए गए। जूनियर वर्ग में सतत विकास के लिए नवाचार विषय के तहत अन्य उप विषयों में दीपक आर्य, आरती, जीवन चंद्र जोशी, केविन, मोहित गड़कोटी, कमल बिष्ट, सिद्धार्थ पांडेय, भावेश पांडेय, कपिल भट्ट, विभव गड़कोटी, देव सिंह मनराल, आख्यांश, सूरज जोशी, लोकेश ओली, नव्या यादव, अजय सिंह अधिकारी, शुभम राज, निखिल तलनियां ने बाजी मारी। सीनियर वर्ग में बृजेश फर्त्याल, सुरेश जोशी, निखिल भंडारी, प्रियांशु फर्त्याल, रोहित जोशी, विशाल मनराल, विनोद सामंत, भावना अधिकारी, कमला कलखुड़िया, राहुल सिंह, मीनाक्षी, विजय शर्मा, हरीश अधिकारी, पंकज पांडेय, हेमा गोस्वामी, महेश सिंह, रितिका बोरा, किरन जोशी अव्वल रही। विज्ञान ड्रामा में जीआईसी पाटी प्रथम, जीआईसी लोहाघाट द्वितीय और जीआईसी बापरू तृतीय रहा।
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सीमा पर नजर रखेगा लाइट डिपेंड रजिस्टर
चंपावत। सीमा पर नजर रखने को टनकपुर विवेकानंद विद्या मंदिर के 11वीं के छात्र अनिल कश्यप और सुनील सिंह बिष्ट ने नायाब यंत्र तैयार किया है। लाइट डिपेंड रजिस्टर नाम का ये यंत्र न सिर्फ सीमा पर नजर रखने में सक्षम हैं, बल्कि मानव रहित पोस्ट पर भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। चंपावत जिला स्तरीय विज्ञान महोत्सव में दो बाल वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत इस प्रोजेक्ट को यंत्र की इन्हीं खूबियों के चलते पहला स्थान हासिल हुआ। अनिल और सुनील अब इस यंत्र में ऑटोमेटिक फायरिंग को जोड़ राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल करेंगे।
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दोनों छात्रों ने जिला स्तरीय प्रतियोगिता में इस यंत्र का प्रदर्शन किया। बताया कि यह यंत्र सीमा पर नजर रखने में सक्षम है। यंत्र से निकलने वाली अदृश्य तरंगें सीमा पार निकलेंगी। इन तरंगों की जद में किसी तरह की परछाई आने पर तत्काल सायरन बजेगा। जिससे सीमा पर होने वाली किसी भी हलचल का पता चल सकेगा। उनका कहना है कि यंत्र में सुधार कर इसमें ऑटोमेटिक फायरिंग का विकल्प लगाया जाएगा। यंत्र उस जगह ज्यादा कारगर होगा, जहां पर सैनिकों का रहना मुश्किल होता है। मार्गदर्शक शिक्षक जगदीश सिंह बोहरा ने बताया कि अनिल और सुनील तीन वर्ष से वैज्ञानिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। इन दोनों मॉडलों पर वे एक वर्ष से काम कर रहे थे। अनिल पिछले वर्ष भी जिला स्तरीय प्रतियोगिता में अव्वल रहे।
ध्वनि से बिजली पैदा करने का यंत्र भी बनाया
अनिल और सुनील ने ध्वनि से बिजली पैदा करने का यंत्र भी विकसित किया है। किसी भी तरह के कंपन से एलईडी बल्ब जलाए जा सकते हैं। चलती रेलगाड़ी और लाउडस्पीकर से निकलने वाली ध्वनि से एलईडी के 40 बल्ब जलाये जा सकते हैं। शादी-ब्याह में बजने वाले डीजे की ध्वनि से बिजली पैदा करने के साथ ही उसे संरक्षित भी किया जा सकता है। निश्चित मात्रा में निकलने वाली ध्वनि से बिजली पैदा की जा सकती है। उनका कहना है कि ये यंत्र उस जगह बेहद कारगर होगा जहां बिजली की व्यवस्था नहीं है।