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मन्नत पूरी होने पर 23 किमी पैदल चल रणकोची मंदिर में चढ़ाया घंटा
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चंपावत जिले के रणकोची मंदिर में घंटा चढ़ाते बदायूं जिले के कछला के पंकज कुमार तोमर। संवाद न्यूज ए
- फोटो : TANAKPUR
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। ये आस्था और अनन्य भक्ति का नायाब नमूना है। बदायूं जिले के एक व्यक्ति ने नेपाल सीमा से लगे खेत गांव के रणकोची मंदिर में शीश नवाने के लिए 23 किमी का पैदल सफर किया। मन्नत पूरी होने से गदगद तोमर ठुलीगाड़ से छह घंटे का पैदल सफर पूरा कर आस्था के धाम पहुंचे और सवा पांच किलो का घंटा चढ़ा आशीर्वाद लिया। वापसी में वह जीप से ठुलीगाड़ पहुंचे।
बदायूं जिले के कछला के पंकज तोमर (50) ने सोमवार को पूर्णागिरि धाम के बाद रणकोची में देवी दर्शन किए। रियासीबमन गांव के खेत गांव में स्थित रणकोची देवी मंदिर आस्था का अहम पड़ाव माना जाता है। तोमर बताते हैं कि गांव में हुए भूमि विवाद में उन्हें दबाया जा रहा था। कहीं से इंसाफ न मिलने पर उन्हें किसी परिचित ने चंपावत जिले के रणकोची देवी के दर्शन करने के लिए कहा। दर्शन करने की हालत में न होने पर उन्होंने देवी का स्मरण किया, तो दो महीने के भीतर विवाद खत्म हुआ और उनकी जमीन भी वापस मिल गई। इससे उनकी रणकोची देवी पर अटूट आस्था की शुरुआत हुई। सोमवार को पूर्णागिरि धाम के बाद ठुलीगाड़ से 23 किमी पैदल चल रणकोची मंदिर में देवी का आशीर्वाद लिया। वह अपने साथ सवा पांच किलो वजन का घंटा भी ले गए। धाम के पुजारी पंडित हरीश भट्ट का कहना है कि रणकोची देवी न्याय की देवी है।
पूर्णागिरि देवी की बहिन मानी जाती है इंसाफ की देवी रणकोची
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। इंसाफ की देवी रणकोची को पूर्णागिरि देवी की बहन माना जाता है। रियासी बमनगांव ग्राम पंचायत के खेत गांव में भगवती रणचंडिका मंदिर और फुटलिंग है। पंडित हरीश भट्ट बताते हैं कि रणकोची मनोकामना पूर्ण करने के साथ ही अपने भक्तों को अनिष्ट से भी बचाती हैं। इस मंदिर में भारद्वाज गोत्र का भट्ट परिवार ही पूजा का अधिकारी है।
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बदायूं जिले के कछला के पंकज तोमर (50) ने सोमवार को पूर्णागिरि धाम के बाद रणकोची में देवी दर्शन किए। रियासीबमन गांव के खेत गांव में स्थित रणकोची देवी मंदिर आस्था का अहम पड़ाव माना जाता है। तोमर बताते हैं कि गांव में हुए भूमि विवाद में उन्हें दबाया जा रहा था। कहीं से इंसाफ न मिलने पर उन्हें किसी परिचित ने चंपावत जिले के रणकोची देवी के दर्शन करने के लिए कहा। दर्शन करने की हालत में न होने पर उन्होंने देवी का स्मरण किया, तो दो महीने के भीतर विवाद खत्म हुआ और उनकी जमीन भी वापस मिल गई। इससे उनकी रणकोची देवी पर अटूट आस्था की शुरुआत हुई। सोमवार को पूर्णागिरि धाम के बाद ठुलीगाड़ से 23 किमी पैदल चल रणकोची मंदिर में देवी का आशीर्वाद लिया। वह अपने साथ सवा पांच किलो वजन का घंटा भी ले गए। धाम के पुजारी पंडित हरीश भट्ट का कहना है कि रणकोची देवी न्याय की देवी है।
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पूर्णागिरि देवी की बहिन मानी जाती है इंसाफ की देवी रणकोची
पूर्णागिरि धाम (चंपावत)। इंसाफ की देवी रणकोची को पूर्णागिरि देवी की बहन माना जाता है। रियासी बमनगांव ग्राम पंचायत के खेत गांव में भगवती रणचंडिका मंदिर और फुटलिंग है। पंडित हरीश भट्ट बताते हैं कि रणकोची मनोकामना पूर्ण करने के साथ ही अपने भक्तों को अनिष्ट से भी बचाती हैं। इस मंदिर में भारद्वाज गोत्र का भट्ट परिवार ही पूजा का अधिकारी है।
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