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जिला योजना: पहले अनुमोदन से हुई देरी अब खर्च में कर रहे देरी
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चंपावत। मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 की जिला योजना पर कोरोना का असर साफ दिख रहा है। डीपीसी (जिला नियोजन समिति) का गठन नहीं होने से पहले योजना के अनुमोदन में देरी हुई और इसके बाद विभागों की ओर से लापरवाही की गई। वर्तमान वित्त वर्ष के अब तक के पांच महीनों में विभागों ने आवंटन के सापेक्ष सिर्फ 24.96 प्रतिशत राशि ही खर्च की है।
डीएसटीओ एनबी बचखेती ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए चंपावत की जिला योजना 38.84 करोड़ रुपये अनुमोदित हुई। अगस्त तक 20.42 करोड़ रुपये (52.59 प्रतिशत) अवमुक्त हुए। इस अवमुक्त राशि में से 20.37 करोड़ रुपये (99.76 प्रतिशत) विभागों को आवंटित हुए। लेकिन इस 20.37 करोड़ में से अगस्त माह तक खर्च सिर्फ 5.08 करोड़ रुपये (24.96 प्रतिशत) ही हो सका है। दस विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक एक भी रुपया खर्च नहीं किया है। जबकि रकम के उपयोग में सबसे अच्छी प्रगति पूल्ड आवास की है। इसमें आवंटित 33.35 लाख रुपये में से 30.99 लाख रुपये (92.92 प्रतिशत) का उपयोग किया जा चुका है।
डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि सभी विभागों को लक्ष्य को समय पर हासिल करने के आदेश दिए गए हैं। ढिलाई बरतने वाले विभागों के मुखियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इन विभागों नेे नहीं किया एक भी रुपया खर्च:
वन विभाग, वैकल्पिक ऊर्जा, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, पेंशन शिविर, भेषज, सूचना, सेवायोजन, अनुसूचित जाति कल्याण और पर्यटन एवं साहसिक कार्य विभाग।
सबसे अधिक रकम पाने वाले विभाग:
विभाग - राशि (करोड़ रुपये में)
सड़क एवं पुल - 9.69
जल निगम - 4.48
जल संस्थान - 4.28
पीआरडी - 3.35
नलकूप खंड- 2.35
स्वास्थ्य - 2.25
सिंचाई - 2.04
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डीएसटीओ एनबी बचखेती ने बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष के लिए चंपावत की जिला योजना 38.84 करोड़ रुपये अनुमोदित हुई। अगस्त तक 20.42 करोड़ रुपये (52.59 प्रतिशत) अवमुक्त हुए। इस अवमुक्त राशि में से 20.37 करोड़ रुपये (99.76 प्रतिशत) विभागों को आवंटित हुए। लेकिन इस 20.37 करोड़ में से अगस्त माह तक खर्च सिर्फ 5.08 करोड़ रुपये (24.96 प्रतिशत) ही हो सका है। दस विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक एक भी रुपया खर्च नहीं किया है। जबकि रकम के उपयोग में सबसे अच्छी प्रगति पूल्ड आवास की है। इसमें आवंटित 33.35 लाख रुपये में से 30.99 लाख रुपये (92.92 प्रतिशत) का उपयोग किया जा चुका है।
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डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि सभी विभागों को लक्ष्य को समय पर हासिल करने के आदेश दिए गए हैं। ढिलाई बरतने वाले विभागों के मुखियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इन विभागों नेे नहीं किया एक भी रुपया खर्च:
वन विभाग, वैकल्पिक ऊर्जा, माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, पेंशन शिविर, भेषज, सूचना, सेवायोजन, अनुसूचित जाति कल्याण और पर्यटन एवं साहसिक कार्य विभाग।
सबसे अधिक रकम पाने वाले विभाग:
विभाग - राशि (करोड़ रुपये में)
सड़क एवं पुल - 9.69
जल निगम - 4.48
जल संस्थान - 4.28
पीआरडी - 3.35
नलकूप खंड- 2.35
स्वास्थ्य - 2.25
सिंचाई - 2.04