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चारों मृतकों का अंतिम संस्कार किया
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Sat, 10 Feb 2018 10:48 PM IST
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चंपावत कोतवाली में पहुंचे स्वांला हादसे में मृत दंपत्ति के परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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स्वांला जीप हादसे में जान गंवा चुके चार लोगों का शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया। हादसे में सभी दस यात्रियों की मौत हुई थी। छह लोगों का अंतिम संस्कार आठ फरवरी को हो चुका है।
बिहार के वैशाली जिले से दो मृतकों के परिजन यहां पहुंचे। वहीं दो यात्रियों की आखिर तक शिनाख्त नहीं हो सकी। 72 घंटे बीतने के चलते इन दो पुरुष यात्रियों का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। बिहार के वैशाली जनपद निवासी दो मृतकों के परिजन बेहद गरीब हैं। पुलिस ने व्यापार संघ के आर्थिक सहयोग से मृतकों का अंतिम संस्कार कराया गया। बाद में आंखों में आंसू लेकर मृतकों के परिजन वापस घरों को रवाना हुए।
दयानंद पासवान (33) पुत्र हरिकिशन पासवान पहाड़पुर, तहसील राघवपुर, वैशाली (बिहार) और रीता उर्फ रानी पत्नी दयानंद पासवान की शिनाख्त घटना के एक दिन बाद हुई। मृतक दंपति के परिजनों के यहां पहुंचने पर पुलिस ने दोनों शव शनिवार को परिजनों को सौंपे।
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चंपावत पुलिस चौकी प्रभारी अनुराग सिंह ने बताया कि दयानंद पासवान के रिश्तेदार रामेश्वर प्रसाद खिरवाल निवासी सिसरौली मध्य प्रदेश, रीता के चाचा सुखदेव निवासी नधैरा सोनभद्र उत्तर प्रदेश और मृत दंपति का दस वर्षीय बेटा सुमन शुक्रवार शाम यहां पहुंचे। तीनों ने पोस्टमार्टम हाउस में रखे शवों की पहचान की। रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि दयानंद छह साल से चंपावत में मजदूरी करता था। कुछ दिनों पहले ही वह बिहार गया था। जहां से वापस चंपावत आते हुए स्वांला के पास हादसे का शिकार हो गया।
सुमन की किस्मत में जिंदगी लिखी थी!
वैशाली के मृतक दंपति के दस वर्षीय पुत्र सुमन की किस्मत में शायद और जीना लिखा था। रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि जब दयानंद और रीता बिहार से चंपावत के लिए निकल रहे थे। तब बेटा सुमन मां-बाप के साथ जाने की जिद करने लगा, लेकिन किसी तरह नानी मानमती पोते सुमन को समझाने में कामयाब हो गई। जिस वजह से वो अपने मां-बाप के साथ चंपावत नहीं आ सका। होली के बाद चंपावत भेजने की बात कह सुमन को रोका गया। मृत दंपति के दो बेटे सुमन और कुम्मन हैं। अब इन बच्चों के अलावा घर में बूढ़े मां-बाप हैं। दोनों की मौत होने के बाद एक तरफ जहां मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा छिन गया, वहीं इन मासूम बच्चों के सिर से मां-बाप का साया भी उठ गया।
कर्ज लेकर आए मृतक मजदूर दंपति के रिश्तेदार
मृतक दयानंद के साढू़ रामेश्वर प्रसाद खिरवाल और रीता के चाचा सुखदेव की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद उनके सामने धन की समस्या खड़ी हो गई। दोनों ही लोग अपने परिचितों से चार हजार रुपये कर्ज लेकर किसी तरह चंपावत पहुंचे हैं। दुर्घटना की सूचना मिलने के दिन ही रीता के चाचा सुखदेव एक और मुसीबत में फंस गए। सुखदेव अपने गांव नधौर में छोटे से मकान का निर्माण करवा रहे थे। सुखदेव ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने की रात यानी 8 फरवरी को ही उसके जमा किए गए सीमेंट के 25 कट्टे चोरी हो गए।
बिहार के वैशाली जिले से दो मृतकों के परिजन यहां पहुंचे। वहीं दो यात्रियों की आखिर तक शिनाख्त नहीं हो सकी। 72 घंटे बीतने के चलते इन दो पुरुष यात्रियों का भी अंतिम संस्कार कर दिया गया। बिहार के वैशाली जनपद निवासी दो मृतकों के परिजन बेहद गरीब हैं। पुलिस ने व्यापार संघ के आर्थिक सहयोग से मृतकों का अंतिम संस्कार कराया गया। बाद में आंखों में आंसू लेकर मृतकों के परिजन वापस घरों को रवाना हुए।
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दयानंद पासवान (33) पुत्र हरिकिशन पासवान पहाड़पुर, तहसील राघवपुर, वैशाली (बिहार) और रीता उर्फ रानी पत्नी दयानंद पासवान की शिनाख्त घटना के एक दिन बाद हुई। मृतक दंपति के परिजनों के यहां पहुंचने पर पुलिस ने दोनों शव शनिवार को परिजनों को सौंपे।
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चंपावत पुलिस चौकी प्रभारी अनुराग सिंह ने बताया कि दयानंद पासवान के रिश्तेदार रामेश्वर प्रसाद खिरवाल निवासी सिसरौली मध्य प्रदेश, रीता के चाचा सुखदेव निवासी नधैरा सोनभद्र उत्तर प्रदेश और मृत दंपति का दस वर्षीय बेटा सुमन शुक्रवार शाम यहां पहुंचे। तीनों ने पोस्टमार्टम हाउस में रखे शवों की पहचान की। रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि दयानंद छह साल से चंपावत में मजदूरी करता था। कुछ दिनों पहले ही वह बिहार गया था। जहां से वापस चंपावत आते हुए स्वांला के पास हादसे का शिकार हो गया।
सुमन की किस्मत में जिंदगी लिखी थी!
वैशाली के मृतक दंपति के दस वर्षीय पुत्र सुमन की किस्मत में शायद और जीना लिखा था। रामेश्वर प्रसाद ने बताया कि जब दयानंद और रीता बिहार से चंपावत के लिए निकल रहे थे। तब बेटा सुमन मां-बाप के साथ जाने की जिद करने लगा, लेकिन किसी तरह नानी मानमती पोते सुमन को समझाने में कामयाब हो गई। जिस वजह से वो अपने मां-बाप के साथ चंपावत नहीं आ सका। होली के बाद चंपावत भेजने की बात कह सुमन को रोका गया। मृत दंपति के दो बेटे सुमन और कुम्मन हैं। अब इन बच्चों के अलावा घर में बूढ़े मां-बाप हैं। दोनों की मौत होने के बाद एक तरफ जहां मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा छिन गया, वहीं इन मासूम बच्चों के सिर से मां-बाप का साया भी उठ गया।
कर्ज लेकर आए मृतक मजदूर दंपति के रिश्तेदार
मृतक दयानंद के साढू़ रामेश्वर प्रसाद खिरवाल और रीता के चाचा सुखदेव की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद उनके सामने धन की समस्या खड़ी हो गई। दोनों ही लोग अपने परिचितों से चार हजार रुपये कर्ज लेकर किसी तरह चंपावत पहुंचे हैं। दुर्घटना की सूचना मिलने के दिन ही रीता के चाचा सुखदेव एक और मुसीबत में फंस गए। सुखदेव अपने गांव नधौर में छोटे से मकान का निर्माण करवा रहे थे। सुखदेव ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने की रात यानी 8 फरवरी को ही उसके जमा किए गए सीमेंट के 25 कट्टे चोरी हो गए।