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Champawat News: विदेशों में छाई चंपावत की चाय, अब टी टूरिज्म की मिलेगी पहचान
Tue, 20 May 2025 10:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Tue, 20 May 2025 10:41 PM IST
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चंपावत का चाय बगान। संवाद
चंपावत। जिले में उत्पादित जैविक चाय सात समंदर पार खूब पसंद की जा रही है। चाय को इको टूरिज्म को जोड़ते हुए यहां स्विटजरलैंड की तर्ज पर हट निर्माण किया जाना है। देश विदेश के साथ ही स्थानीय स्तर पर चाय की अच्छी खासी मांग है। चाय से स्थानीय लोगों की आर्थिकी भी जुड़ी है।
इस वर्ष करीब आठ हजार किलो उत्पादन हुआ है। स्थानीय स्तर पर चाय प्रतिदिन नौ हजार रुपये किलो बिकती है। चाय बोर्ड चंपावत के सुपरवाइजर सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि कोलकाता चाय बोर्ड की नीलामी के जरिये चाय 2014 से दुनिया के कई देशों तक अपनी खुशबू बिखेर रही है। चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्र में 241 हेक्टेयर में चाय की खेती हो रही है। 2013 में चंपावत में चाय फैक्टरी लगने के बाद 2014 से यहां की चाय नियमित रूप से कोलकाता में होने वाली नीलामी में हिस्सा ले रही है।
उन्होंने बताया कि पूर्व में 500 से अधिक लोग चाय उत्पादन से सीधे जुड़े थे, लेकिन अब कुछ लोग स्वयं ही चाय का उत्पादन कर रहे हैं। इनमें से कुछ चाय उपलब्ध कराते हैं जबकि कुछ लोग चाय बेचकर आर्थिकी अर्जित कर रहे हैं।
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19 करोड़ से होने हैं काम
चंपावत। सुपरवाइजर सुरेंद्र ने बताया कि चंपावत चाय बागान को नया आकार देने के लिए 19 करोड़ से अधिक की लागत से काम किया जाना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद यहां की चाय और अधिक मशहूर होगी। टी टूरिज्म को इससे बढ़ावा मिलेगा। जिले में उत्तराखंड चाय बोर्ड के अलावा अन्य लोग भी चाय उत्पादन करते हैं।
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इस वर्ष करीब आठ हजार किलो उत्पादन हुआ है। स्थानीय स्तर पर चाय प्रतिदिन नौ हजार रुपये किलो बिकती है। चाय बोर्ड चंपावत के सुपरवाइजर सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि कोलकाता चाय बोर्ड की नीलामी के जरिये चाय 2014 से दुनिया के कई देशों तक अपनी खुशबू बिखेर रही है। चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्र में 241 हेक्टेयर में चाय की खेती हो रही है। 2013 में चंपावत में चाय फैक्टरी लगने के बाद 2014 से यहां की चाय नियमित रूप से कोलकाता में होने वाली नीलामी में हिस्सा ले रही है।
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उन्होंने बताया कि पूर्व में 500 से अधिक लोग चाय उत्पादन से सीधे जुड़े थे, लेकिन अब कुछ लोग स्वयं ही चाय का उत्पादन कर रहे हैं। इनमें से कुछ चाय उपलब्ध कराते हैं जबकि कुछ लोग चाय बेचकर आर्थिकी अर्जित कर रहे हैं।
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19 करोड़ से होने हैं काम
चंपावत। सुपरवाइजर सुरेंद्र ने बताया कि चंपावत चाय बागान को नया आकार देने के लिए 19 करोड़ से अधिक की लागत से काम किया जाना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद यहां की चाय और अधिक मशहूर होगी। टी टूरिज्म को इससे बढ़ावा मिलेगा। जिले में उत्तराखंड चाय बोर्ड के अलावा अन्य लोग भी चाय उत्पादन करते हैं।