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सीएमटी मार्ग में कार खाई में लुढ़की, बैंक गार्ड सहित दो की मौत
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मंच के पास कार हादसे में मृत बैंक गार्ड पूरन नाथ। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत-मंच-तामली (सीएमटी) मोटर मार्ग पर मंगलवार को देर रात एक कार 100 मीटर खाई में जा गिरी। चतुरबोट के पास हुए इस हादसे में कार में मौजूद दोनों लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एसबीआई की मंच शाखा का गार्ड और एक चालक शामिल है। दुर्घटनाग्रस्त कार चतुरबोट के पास खराब हो गई थी। इस कार को दूसरी दिशा से आ रहे कार चालक ने ठीक कर स्टार्ट करने का प्रयास किया। इसी दौरान कार अचानक खाई में गिर गई। हादसे से पूर्व दुर्घटनाग्रस्त कार में बैठे शाखा प्रबंधक उतरने से बाल-बाल बच गए। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को मृतकों के शव परिजनों को सौंप दिए हैं।
चंपावत के कोतवाल धर्मवीर सिंह सोलंकी ने बताया कि वैगनार कार (यूके 07 बी 0861) में भारतीय स्टेट बैंक की मंच शाखा के प्रबंधक गौरव कश्यप (देहरादून निवासी) और बैंक गार्ड पूरन नाथ मंगलवार रात करीब 9.30 बजे मंच से चंपावत को लौट रहे थे। इस बीच चतुरबोट के समीप कीचड़ में उनकी कार बंद हो गई। कुछ देर बाद चंपावत की ओर से पोलप गांव को जा रहे मनोज सिंह ने अपनी कार रोककर मदद का प्रयास किया।
प्रबंधक को उतार मनोज ड्राइविंग सीट पर बैठे और कार को स्टार्ट करने का प्रयास किया। इसी दौरान कार अचानक बेकाबू होकर 100 मीटर खाई में जा गिरी। मनोज सिंह उर्फ माइकल (25) और कार में पीछे बैठे गोरलचौड़ निवासी गार्ड पूरन नाथ (59) कार सहित खाई में गिर गए। कार के परखच्चे उड़ गए। बैंक प्रबंधक ने चंपावत स्थित अपने भवन स्वामी सुधीर साह को फोन कर हादसे की जानकारी दी। पुलिस और आपात सेवा 108 एंबुलेंस को दुर्घटना की सूचना देने के साथ श्री साह ने घटना स्थल पहुंच राहत कार्य किया।
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इस बीच तामली थाने से अशोक सिंह, मोहन सिंह, मोहन जोशी और चंपावत कोतवाली से पहुंची टीम ने मंच के पूर्व ग्राम प्रधान अर्जुन सिंह, बची सिंह सहित तमाम ग्रामीणों के सहयोग से दोनों लोगों को खाई से निकाला। बैंक गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि मनोज सिंह को चंपावत जिला अस्पताल लाया गया, मगर यहां पहुंचने से पूर्व ही उन्होंने दम तोड़ दिया। मनोज इस वक्त बारहमासी मार्ग में शिवालय कंपनी में भी ड्राइविंग करता था। हादसे की जानकारी लगते ही तमाम बैंक कर्मी रात में ही अस्पताल पहुंचे।
तीन माह बाद रिटायर होने थे बैंक गार्ड
चंपावत। चतुरबोट दुर्घटना में मारे गए चालक मनोज उर्फ माइकल का तीन वर्ष पूर्व विवाह हुआ था। उसके एक बेटी और एक बेटा है। दुर्घटना के बाद से ही परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। उधर दूसरी ओर बैंक गार्ड पूरन नाथ अपने पीछे एक पुत्र और चार पुत्रियों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। पूर्व फौजी रहे बैंक गार्ड पूरन नाथ को इसी साल मार्च में रिटायर होना था। पूरन नाथ का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को होगा।
...तो रात में बंद नहीं होता है आवागमन
चंपावत। चंपावत सहित पहाड़ के जिलों में रात को आवाजाही पर रोक है। रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक आवाजाही प्रतिबंधित है। इस नियम का राष्ट्रीय राजमार्ग में सख्ताई से पालन भी होता है। मगर सीएमटी मार्ग में रात को हुई आवाजाही इस रोक पर सवाल खड़ा करती है। इधर डीएम सुरेंद्र्र नारायण पांडेय का कहना है कि विशेष परिस्थितियों को छोड़ रात में आवाजाही प्रतिबंधित है। इस बात का पता लगा जाएगा कि सीएमटी मार्ग में रात के वक्त आवाजाही कैसे हो रही थी।
मदद को निकले मनोज उर्फ माइकल को मौत ने गले लगाया
चंपावत। कौन जानता था कि दूसरों की मदद के लिए निकले चालक मनोज सिंह को मदद करने से पूर्व ही मौत अपने गले लगा लेगी। चतुरबोट में मंगलवार देर रात हुई कार दुर्घटना में मृत मनोज अपने घर पोलप जा रहा था। तभी रास्ते में बंद हुई कार को स्टार्ट करने के प्रयास में मनोज मौत के मुंह में समा गए। छोटी उम्र में पिता का साया छिनने के बाद वह अपने बूते ही परिवार का भरणपोषण कर रहा था।
वह वर्तमान में टनकपुर-पिथौरागढ़ के बीच निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग के निर्माण में लगी शिवालया कंपनी में अपने वाहन के साथ सेवाएं दे रहा था। मंगलवार को मनोज अपने परिवार से मिलने पोलप जा रहा था। इस बीच उसे चतुरबोट के समीप एक बैगनआर कार कीचड़ में धंसी हुई मिली। जिस पर कार को बाहर निकालने के लिए मदद की पेशकश करने के साथ उसने कीचड़ में फंसी कार को बाहर निकालने का प्रयास किया। लेकिन बदकिस्मती से वह कार खाई में समां गई, जिसमें माइकल भी मौत का शिकार हो गया। टैक्सी यूनियन के संचालक एलएम भट्ट बताते हैं कि व्यवहारकुशलता के कारण मनोज स्थानीय लोगों में बेहद लोकप्रिय था। वह अपने वाहन में सभी लोगों को बिना मांगे ही लिफ्ट दे दिया करता था।
जाको राखे सांईयां मार सके ना कोय...
चंपावत। चतुरबोट में हुए सड़क हादसे में एक बार फिर से जाको राखे सांईयां मार सके ना कोय की कहावत चरितार्थ हुई है। खाई में गिरी कार एसबीआई मंच के शाखा प्रबंधक गौरव कश्यप की थी। लेकिन कीचड़ फंसने के कारण कार को बाहर निकालने के दौरान मनोज ने शाखा प्रबंधक को बाहर उतरने को कहा। जिस कारण शाखा प्रबंधक सकुशल बच गए।
पहले भी हो चुकी है इस जगह पर दुर्घटना
चंपावत। चतुरबोट में इसी स्थान में करीब 17 साल पूर्व भी एक ट्रक दुर्घटना हुई थी। जिसमें चार लोग मारे गए थे। सामाजिक कार्यकर्ता शेर सिंह महर के अनुसार सीएमटी मार्ग में चतुरबोट सहित कई स्थान बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
सड़क दुर्घटना में दो साल में 59 मौतें
चंपावत। जिले में इस साल की यह पहली सड़क दुर्घटना है। अलबत्ता बीते दो वर्षो में 49 सड़क हादसों में 59 लोगों की मौत हो चुकी है। 2018 में 40 और 2019 में 19 मौतें हो चुकी है।
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चंपावत के कोतवाल धर्मवीर सिंह सोलंकी ने बताया कि वैगनार कार (यूके 07 बी 0861) में भारतीय स्टेट बैंक की मंच शाखा के प्रबंधक गौरव कश्यप (देहरादून निवासी) और बैंक गार्ड पूरन नाथ मंगलवार रात करीब 9.30 बजे मंच से चंपावत को लौट रहे थे। इस बीच चतुरबोट के समीप कीचड़ में उनकी कार बंद हो गई। कुछ देर बाद चंपावत की ओर से पोलप गांव को जा रहे मनोज सिंह ने अपनी कार रोककर मदद का प्रयास किया।
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प्रबंधक को उतार मनोज ड्राइविंग सीट पर बैठे और कार को स्टार्ट करने का प्रयास किया। इसी दौरान कार अचानक बेकाबू होकर 100 मीटर खाई में जा गिरी। मनोज सिंह उर्फ माइकल (25) और कार में पीछे बैठे गोरलचौड़ निवासी गार्ड पूरन नाथ (59) कार सहित खाई में गिर गए। कार के परखच्चे उड़ गए। बैंक प्रबंधक ने चंपावत स्थित अपने भवन स्वामी सुधीर साह को फोन कर हादसे की जानकारी दी। पुलिस और आपात सेवा 108 एंबुलेंस को दुर्घटना की सूचना देने के साथ श्री साह ने घटना स्थल पहुंच राहत कार्य किया।
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इस बीच तामली थाने से अशोक सिंह, मोहन सिंह, मोहन जोशी और चंपावत कोतवाली से पहुंची टीम ने मंच के पूर्व ग्राम प्रधान अर्जुन सिंह, बची सिंह सहित तमाम ग्रामीणों के सहयोग से दोनों लोगों को खाई से निकाला। बैंक गार्ड की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि मनोज सिंह को चंपावत जिला अस्पताल लाया गया, मगर यहां पहुंचने से पूर्व ही उन्होंने दम तोड़ दिया। मनोज इस वक्त बारहमासी मार्ग में शिवालय कंपनी में भी ड्राइविंग करता था। हादसे की जानकारी लगते ही तमाम बैंक कर्मी रात में ही अस्पताल पहुंचे।
तीन माह बाद रिटायर होने थे बैंक गार्ड
चंपावत। चतुरबोट दुर्घटना में मारे गए चालक मनोज उर्फ माइकल का तीन वर्ष पूर्व विवाह हुआ था। उसके एक बेटी और एक बेटा है। दुर्घटना के बाद से ही परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। उधर दूसरी ओर बैंक गार्ड पूरन नाथ अपने पीछे एक पुत्र और चार पुत्रियों को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। पूर्व फौजी रहे बैंक गार्ड पूरन नाथ को इसी साल मार्च में रिटायर होना था। पूरन नाथ का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को होगा।
...तो रात में बंद नहीं होता है आवागमन
चंपावत। चंपावत सहित पहाड़ के जिलों में रात को आवाजाही पर रोक है। रात आठ बजे से सुबह छह बजे तक आवाजाही प्रतिबंधित है। इस नियम का राष्ट्रीय राजमार्ग में सख्ताई से पालन भी होता है। मगर सीएमटी मार्ग में रात को हुई आवाजाही इस रोक पर सवाल खड़ा करती है। इधर डीएम सुरेंद्र्र नारायण पांडेय का कहना है कि विशेष परिस्थितियों को छोड़ रात में आवाजाही प्रतिबंधित है। इस बात का पता लगा जाएगा कि सीएमटी मार्ग में रात के वक्त आवाजाही कैसे हो रही थी।
मदद को निकले मनोज उर्फ माइकल को मौत ने गले लगाया
चंपावत। कौन जानता था कि दूसरों की मदद के लिए निकले चालक मनोज सिंह को मदद करने से पूर्व ही मौत अपने गले लगा लेगी। चतुरबोट में मंगलवार देर रात हुई कार दुर्घटना में मृत मनोज अपने घर पोलप जा रहा था। तभी रास्ते में बंद हुई कार को स्टार्ट करने के प्रयास में मनोज मौत के मुंह में समा गए। छोटी उम्र में पिता का साया छिनने के बाद वह अपने बूते ही परिवार का भरणपोषण कर रहा था।
वह वर्तमान में टनकपुर-पिथौरागढ़ के बीच निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग के निर्माण में लगी शिवालया कंपनी में अपने वाहन के साथ सेवाएं दे रहा था। मंगलवार को मनोज अपने परिवार से मिलने पोलप जा रहा था। इस बीच उसे चतुरबोट के समीप एक बैगनआर कार कीचड़ में धंसी हुई मिली। जिस पर कार को बाहर निकालने के लिए मदद की पेशकश करने के साथ उसने कीचड़ में फंसी कार को बाहर निकालने का प्रयास किया। लेकिन बदकिस्मती से वह कार खाई में समां गई, जिसमें माइकल भी मौत का शिकार हो गया। टैक्सी यूनियन के संचालक एलएम भट्ट बताते हैं कि व्यवहारकुशलता के कारण मनोज स्थानीय लोगों में बेहद लोकप्रिय था। वह अपने वाहन में सभी लोगों को बिना मांगे ही लिफ्ट दे दिया करता था।
जाको राखे सांईयां मार सके ना कोय...
चंपावत। चतुरबोट में हुए सड़क हादसे में एक बार फिर से जाको राखे सांईयां मार सके ना कोय की कहावत चरितार्थ हुई है। खाई में गिरी कार एसबीआई मंच के शाखा प्रबंधक गौरव कश्यप की थी। लेकिन कीचड़ फंसने के कारण कार को बाहर निकालने के दौरान मनोज ने शाखा प्रबंधक को बाहर उतरने को कहा। जिस कारण शाखा प्रबंधक सकुशल बच गए।
पहले भी हो चुकी है इस जगह पर दुर्घटना
चंपावत। चतुरबोट में इसी स्थान में करीब 17 साल पूर्व भी एक ट्रक दुर्घटना हुई थी। जिसमें चार लोग मारे गए थे। सामाजिक कार्यकर्ता शेर सिंह महर के अनुसार सीएमटी मार्ग में चतुरबोट सहित कई स्थान बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
सड़क दुर्घटना में दो साल में 59 मौतें
चंपावत। जिले में इस साल की यह पहली सड़क दुर्घटना है। अलबत्ता बीते दो वर्षो में 49 सड़क हादसों में 59 लोगों की मौत हो चुकी है। 2018 में 40 और 2019 में 19 मौतें हो चुकी है।