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Champawat: बद्री गाय संरक्षण का हब बन रहा नरियाल गांव का प्रजनन केंद्र, इतने रुपये किलो बिकता है इसका दूध

Mon, 11 Nov 2024 01:46 PM IST
हीरा मेहरा ललित मोहन गहतोड़ी, संवाद
ललित मोहन गहतोड़ी, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 11 Nov 2024 01:46 PM IST
सार

नरियाल गांव में स्थित राजकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र के राज्य की स्थानीय नस्ल की बद्री गाय के संरक्षण किया जा रहा है। बद्री गाय का दूध स्वास्थ्य के लिहाज से सर्वोत्तम माना गया है। बद्री गाय प्रजनन केंद्र पशुपालन के क्षेत्र में हब बनता जा रहा है।

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breeding center of Nariyal village is becoming the hub of Badri cow conservation in champawat
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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चंपावत जिले के नरियाल गांव में स्थित राजकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र के राज्य की स्थानीय नस्ल की बद्री गाय के संरक्षण किया जा रहा है। अपनी विशेषताओं के चलते बद्री गाय का दूध स्वास्थ्य के लिहाज से सर्वोत्तम माना गया है। बद्री गाय प्रजनन केंद्र पशुपालन के क्षेत्र में हब बनता जा रहा है।

वर्तमान में 485 बद्री नस्ल गाय का संरक्षण किया जा रहा है। 150 दुधारू गाय हैं। इनसे प्रतिदिन 160 लीटर से ज्यादा दूध प्राप्त किया जा रहा है। इसमें से विभाग की ओर से हेथा कंपनी को 71.10 रुपये लीटर की दर से बद्री गाय का दूध बेचा जा रहा है।

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बद्री गाय के दूध की गुणवत्ता ए टू हेल्थ और गुड फैट इसमें ज्यादा होने से स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। इसके चलते जिले का नरियाल गांव स्थित बद्री गाय के दूध में एटू प्रोटीन पाया जाता है। इसको रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयुक्त माना गया है। बद्री गाय के दूध में गुड फैट की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। 

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पशु प्रजनन प्रक्षेत्र नरियाल गांव में विभाग के पास कुल 2500 नाली जमीन है जो पांच भागों में विभाजित हैं। इसमें कही पर 600 नाली, कही 300, कहीं 500 तो कहीं 200 नाली है। पशु प्रजनन प्रक्षेत्र की मुख्य बिल्डिंग दो भागों में बनी है। इसमें 2200 नाली पशुपालन के लिए विभाग के पास है। इसमें आवासीय और अन्य भवन है।

बद्री गाय उत्तराखंड की एक ऐसी ब्रीड है जिसे नस्ल के रूप में पूरे भारत में पहचान मिली है। भविष्य में यह केंद्र पशुपालन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।
- एनपी आगरी, डिप्टी सीवीओ

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