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चम्पावत: जानवर को बचाने के प्रयास में जीप खाई में गिरी, मालिक की मौत
Sun, 19 Feb 2023 11:09 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 19 Feb 2023 11:09 PM IST
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लोहाघाट (चंपावत)। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाराकोट के पास अचानक सड़क पर आए एक जानवर को बचाने के प्रयास में बोलेरो जीप 50 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में जीप चला रहे मालिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य सवार घायल हो गए। दोनों घायलों को लोहाघाट उप जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है।
रविवार शाम पांच बजे बोलेरो जीप लोहाघाट से पिथौरागढ़ जा रही थी। इसी बीच बाराकोट के खोल्का गुमौद के पास सड़क पर सामने आए मवेशी को बचाने की कोशिश में अनियंत्रित हुई जीप 50 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में तीनों घायलों को पुलिस ने राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से खाई से निकाला। एंबुलेंस नहीं होने की वजह से सभी घायलों को बाराकोट के बासु जोशी की जीप से लोहाघाट अस्पताल ले जाया गया लेकिन जीप स्वामी रमेश चंद्र जोशी (46) निवासी मल्ली ग्वीनाड़ा ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। पिथौरागढ़ के लिंठ्यूड़ा के शानी कुरैशी (40) पुत्र इस्माइलुद्दीन और ग्वीनाड़ा के रहने वाले प्रकाश जोशी (30) का अस्पताल में इलाज चल रहा है। एमएस डॉ. जुनैद कमर ने बताया कि दोनों घायलों की हालत खतरे से बाहर है। मृतक चालक के दो छोटे बेटे हैं और उन्होंने कुछ महीने पहले ही जीप खरीदी थी।
एंबुलेंस होती तो शायद बच जाती जिंदगी...
चंपावत। हादसे में मृत ग्वीनाड़ा के जीप स्वामी रमेश चंद्र जोशी को शायद बचा लिया जाता! अगर उन्हें वक्त पर दुर्घटना स्थल से खोल्का गुमौद से 16 किमी दूर लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचा दिया गया होता। इलाज और अस्पताल पहुंचने में देरी की वजह से उनकी जान नहीं बच सकी। बाराकोट में एंबुलेंस न होना मुख्य वजह मानी जा रही है। बाराकोट का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस स्थिति में नहीं है कि उसमें प्राथमिक इलाज से अधिक उपचार मिल सके।
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बाराकोट की आपात सेवा 108 की एंबुलेंस ढाई महीने से अधिक समय से नहीं है। पिछले वर्ष दिसंबर महीने की शुरूआत में एंबुलेंस को ठीक करने के लिए भेजा गया था जो अब तक ठीक नहीं हुई है। पांच दिन पहले लोहाघाट की एंबुलेंस भी फिटनेस के लिए देहरादून भेज दी गई। ऐसे में तीनों घायलों को निजी जीप से लोहाघाट पहुंचाया गया। जिसमें अधिक समय लगने के साथ ही रास्ते में इलाज नहीं मिला और जीप स्वामी की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। अगर एंबुलेंस होती तो इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन और अन्य स्टाफ होने से दुर्घटना स्थल पर ही इलाज मिल जाता। वहीं एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी कमल शर्मा का कहना है कि बाराकोट और लोहाघाट की एंबुलेंस अगले तीन दिन में देहरादून से अपने कार्यक्षेत्र में पहुंच जाएंगी।
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रविवार शाम पांच बजे बोलेरो जीप लोहाघाट से पिथौरागढ़ जा रही थी। इसी बीच बाराकोट के खोल्का गुमौद के पास सड़क पर सामने आए मवेशी को बचाने की कोशिश में अनियंत्रित हुई जीप 50 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में तीनों घायलों को पुलिस ने राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से खाई से निकाला। एंबुलेंस नहीं होने की वजह से सभी घायलों को बाराकोट के बासु जोशी की जीप से लोहाघाट अस्पताल ले जाया गया लेकिन जीप स्वामी रमेश चंद्र जोशी (46) निवासी मल्ली ग्वीनाड़ा ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। पिथौरागढ़ के लिंठ्यूड़ा के शानी कुरैशी (40) पुत्र इस्माइलुद्दीन और ग्वीनाड़ा के रहने वाले प्रकाश जोशी (30) का अस्पताल में इलाज चल रहा है। एमएस डॉ. जुनैद कमर ने बताया कि दोनों घायलों की हालत खतरे से बाहर है। मृतक चालक के दो छोटे बेटे हैं और उन्होंने कुछ महीने पहले ही जीप खरीदी थी।
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एंबुलेंस होती तो शायद बच जाती जिंदगी...
चंपावत। हादसे में मृत ग्वीनाड़ा के जीप स्वामी रमेश चंद्र जोशी को शायद बचा लिया जाता! अगर उन्हें वक्त पर दुर्घटना स्थल से खोल्का गुमौद से 16 किमी दूर लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचा दिया गया होता। इलाज और अस्पताल पहुंचने में देरी की वजह से उनकी जान नहीं बच सकी। बाराकोट में एंबुलेंस न होना मुख्य वजह मानी जा रही है। बाराकोट का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस स्थिति में नहीं है कि उसमें प्राथमिक इलाज से अधिक उपचार मिल सके।
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बाराकोट की आपात सेवा 108 की एंबुलेंस ढाई महीने से अधिक समय से नहीं है। पिछले वर्ष दिसंबर महीने की शुरूआत में एंबुलेंस को ठीक करने के लिए भेजा गया था जो अब तक ठीक नहीं हुई है। पांच दिन पहले लोहाघाट की एंबुलेंस भी फिटनेस के लिए देहरादून भेज दी गई। ऐसे में तीनों घायलों को निजी जीप से लोहाघाट पहुंचाया गया। जिसमें अधिक समय लगने के साथ ही रास्ते में इलाज नहीं मिला और जीप स्वामी की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। अगर एंबुलेंस होती तो इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन और अन्य स्टाफ होने से दुर्घटना स्थल पर ही इलाज मिल जाता। वहीं एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी कमल शर्मा का कहना है कि बाराकोट और लोहाघाट की एंबुलेंस अगले तीन दिन में देहरादून से अपने कार्यक्षेत्र में पहुंच जाएंगी।