{"_id":"60a162338ebc3e920c5a559c","slug":"asha-workers-became-a-ray-of-hope-in-the-battle-of-corona-champawat-news-hld4245642127","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना की जंग में आशा की किरण बनीं आशा कार्यकर्ताएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना की जंग में आशा की किरण बनीं आशा कार्यकर्ताएं
विज्ञापन
चंपावत। कोरोना की लड़ाई में पिछले साल मार्च से ही आशा कार्यकर्ताओं ने उम्मीद की किरण रही हैं। वह अपने नियमित काम के अलावा कोरोना की जंग में गांवों में लोगों के बीच जाकर जिम्मेदारी से काम कर रही हैं।
चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों के 656 गांवों में 359 आशा कार्यकर्ता सेवा दे रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भी वे मोर्चे पर डटी हैं। आशा कार्यकर्ता संगठन का कहना है कि वे सुविधाओं की कमी के बावजूद कोरोना की लड़ाई में शिरकत कर रही हैं। पिछले साल भी कोरोना काल में उन्होंने घर-घर जाकर एक्टिव सर्वे किया था। जिसमें 65 साल से अधिक उम्र, दस साल तक के बच्चे और गांव के लोगों की बुखार, खांसी आदि बीमारियों का ऑनलाइन सर्वे किया था। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि आशा कार्यकर्ता कोरोना की जंग में उपयोगी भूमिका निभा रही हैं।
गर्भवती महिलाओं की देखभाल करने से लेकर रोजमर्रा के काम के साथ आशा कार्यकर्ता कोरोना काल में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों को दवा देना, टीकाकरण से लेकर कोविड वार्ड में ड्यूटी दे रही हैं। ये सब काम वह एक हजार रुपये मासिक की प्रोत्साहन राशि में कर रही हैं। काम करते-करते उनकी कई कार्यकर्ता कोरोना संक्रमित भी हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें कोरोना से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन दिए जाने चाहिए।
विज्ञापन
सरोज पांडेय,
जिलाध्यक्ष, आशा कार्यकर्ता संगठन, चंपावत।
विज्ञापन
चंपावत जिले की 313 ग्राम पंचायतों के 656 गांवों में 359 आशा कार्यकर्ता सेवा दे रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भी वे मोर्चे पर डटी हैं। आशा कार्यकर्ता संगठन का कहना है कि वे सुविधाओं की कमी के बावजूद कोरोना की लड़ाई में शिरकत कर रही हैं। पिछले साल भी कोरोना काल में उन्होंने घर-घर जाकर एक्टिव सर्वे किया था। जिसमें 65 साल से अधिक उम्र, दस साल तक के बच्चे और गांव के लोगों की बुखार, खांसी आदि बीमारियों का ऑनलाइन सर्वे किया था। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि आशा कार्यकर्ता कोरोना की जंग में उपयोगी भूमिका निभा रही हैं।
विज्ञापन
गर्भवती महिलाओं की देखभाल करने से लेकर रोजमर्रा के काम के साथ आशा कार्यकर्ता कोरोना काल में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों को दवा देना, टीकाकरण से लेकर कोविड वार्ड में ड्यूटी दे रही हैं। ये सब काम वह एक हजार रुपये मासिक की प्रोत्साहन राशि में कर रही हैं। काम करते-करते उनकी कई कार्यकर्ता कोरोना संक्रमित भी हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें कोरोना से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन दिए जाने चाहिए।
विज्ञापन
सरोज पांडेय,
जिलाध्यक्ष, आशा कार्यकर्ता संगठन, चंपावत।