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Champawat News: स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती के बाद सामान्य के साथ ही सिजेरियन प्रसव भी हुए संभव
Thu, 08 Jan 2026 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 08 Jan 2026 10:52 PM IST
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चंपावत। जिला अस्पताल में बीते एक वर्ष के दौरान 620 गर्भवतियों के सामान्य और सिजेरियन प्रसव हुए हैं। अस्पताल में पिछले साल से तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ के चलते सामान्य और सिजेरियन प्रसवों की संख्या बढ़ी है।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 377 सामान्य प्रसव और 243 सिजेरियन प्रसव हुए हैं। जबकि गंभीर स्थिति में 53 गर्भवतियों को रेफर किया गया। सबसे अधिक फरवरी में 48 सामान्य प्रसव हुए। जुलाई में 39, अगस्त में 36 सामान्य प्रसव हुए। सितंबर, जनवरी में 35-35 सामान्य प्रसव हुए। वहीं जुलाई में 32, अप्रैल में 31 और अगस्त में 29 सिजेरियन प्रसव हुए। इसमें पांच मालों में जुड़वां बेटियों का जन्म हुआ तो तीन मामलों में जुड़वा बेटे पैदा हुए।
अस्पताल के पीएमएस हीरा सिंह ह्यांकी ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और निशुल्क दवा और जांच सुविधाओं के चलते गर्भवतियां अब निजी अस्पतालों की बजाय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर अधिक भरोसा जता रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती के बाद से सिजेरियन प्रसव भी होने से गर्भवतियों को राहत मिली है। बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए विशेष निगरानी भी की जा रही है।
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24 घंटे सक्रिय रहता है लेबर रूम
जिला अस्पताल का लेबर रूम 24 घंटे सक्रिय रहता है। यहां प्रतिदिन डिलीवरी कराई जा रही हैं। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करती है। अस्पताल में कई जटिल मामलों को भी सफलतापूर्वक संभाला गया, जिससे कई माताओं और नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकी।
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अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 377 सामान्य प्रसव और 243 सिजेरियन प्रसव हुए हैं। जबकि गंभीर स्थिति में 53 गर्भवतियों को रेफर किया गया। सबसे अधिक फरवरी में 48 सामान्य प्रसव हुए। जुलाई में 39, अगस्त में 36 सामान्य प्रसव हुए। सितंबर, जनवरी में 35-35 सामान्य प्रसव हुए। वहीं जुलाई में 32, अप्रैल में 31 और अगस्त में 29 सिजेरियन प्रसव हुए। इसमें पांच मालों में जुड़वां बेटियों का जन्म हुआ तो तीन मामलों में जुड़वा बेटे पैदा हुए।
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अस्पताल के पीएमएस हीरा सिंह ह्यांकी ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना और निशुल्क दवा और जांच सुविधाओं के चलते गर्भवतियां अब निजी अस्पतालों की बजाय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर अधिक भरोसा जता रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती के बाद से सिजेरियन प्रसव भी होने से गर्भवतियों को राहत मिली है। बताया कि मातृ-शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए विशेष निगरानी भी की जा रही है।
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24 घंटे सक्रिय रहता है लेबर रूम
जिला अस्पताल का लेबर रूम 24 घंटे सक्रिय रहता है। यहां प्रतिदिन डिलीवरी कराई जा रही हैं। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करती है। अस्पताल में कई जटिल मामलों को भी सफलतापूर्वक संभाला गया, जिससे कई माताओं और नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकी।