{"_id":"64bc19227514cbbc5d03b9b9","slug":"after-13-years-the-district-panchayat-will-organize-purnagiri-mela-again-champawat-news-c-8-hld1013-194216-2023-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Champawat News: 13 साल बाद अब फिर जिला पंचायत कराएगी पूर्णागिरि मेला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Champawat News: 13 साल बाद अब फिर जिला पंचायत कराएगी पूर्णागिरि मेला
Sat, 22 Jul 2023 11:30 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sat, 22 Jul 2023 11:30 PM IST
विज्ञापन
चंपावत। 13 साल बाद जिला पंचायत अब फिर पूर्णागिरि धाम के मेले का आयोजन करेगी। 2011 से मेले का संचालन जिला पंचायत से ले लिया गया था। तब से मेला संचालन समिति करती मेले का आयोजन करती आ रही है अब 2024 से होने वाले मेला जिला पंचायत कराएगी।
होली बाद तीन माह तक चलने वाले मां पूर्णागिरि धाम के मेले में हर साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस साल मार्च में एलान के बाद अगले साल से यह मेला सालभर चलेगा। बूम से मुख्य मंदिर तक 15 किलोमीटर हिस्से का 90 प्रतिशत से ज्यादा इलाका वन क्षेत्र में आता है। आरक्षित वन क्षेत्र में गैर वानिकी गतिविधियों पर 2010 से लगी अदालती रोक के बाद मेले का जिम्मा तत्कालीन डीएम के मौखिक आदेश से 2011 से मेला संचालन समिति को दिया गया था। इस समिति में एसडीएम, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी और मंदिर समिति के अध्यक्ष शामिल किए गए थे।
सालभर के मेले और जिला पंचायत की पैरवी के बाद अब मेले के संचालन का जिम्मा एक बार फिर से जिला पंचायत को दिया गया है। इस संबंध में पंचायतीराज सचिव नितेश कुमार झा ने सभी संबंधित पक्षों से वार्ता कर मेले की व्यवस्था उप्र गजट नोटिफिकेशन सितंबर 1985 के अनुरूप जिला पंचायत को देने के आदेश दिए। आरक्षित वन क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगी। इस निर्णय से मंदिर समिति अध्यक्ष की मेले के संचालन में भूमिका समाप्त हो जाएगी। संवाद
विज्ञापन
बाक्स
जिला पंचायत निधि में जमा होगी मेले से प्राप्त आय
चंपावत। 2011 से इस साल 2023 तक मां पूर्णागिरि धाम का मेला संचालन समिति करा रही थी। मेले से होने वाली सभी आय मेलाधिकारी और मेला मजिस्ट्रेट के संयुक्त खाते में जमा होती थी। जिला पंचायत को मेले के आयोजन की जिम्मेदारी मिलने से पूर्णागिरि मेले के ठेकों और अन्य मदों से प्राप्त होने वाली राशि को 2011 से पूर्व की तरह जिला पंचायत की जिला निधि में जमा कराया जा सकेगा।
कोट पूर्णागिरि मेले के संचालन की जिम्मेदारी जिला पंचायत की रहेगी। इससे संबंधित शासन का आदेश प्राप्त हो गया है। सालभर के मेले के आयोजन के बाद पंचायत को ये जिम्मेदारी सभी संबंधित पक्षों की सहमति से दी गई है। 2024 से मेले का आयोजन जिला पंचायत ही करेगी।
नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
कोट
मां पूर्णागिरि धाम के मेले के आयोजन की जिम्मेदारी जिला पंचायत को मिलना बड़ी उपलब्धि है। इससे व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार होने के साथ तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। पंचायत के पास इस मेले को कराने का पर्याप्त अनुभव भी है।
ज्योति राय, अध्यक्ष, जिला पंचायत, चंपावत।
विज्ञापन
होली बाद तीन माह तक चलने वाले मां पूर्णागिरि धाम के मेले में हर साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस साल मार्च में एलान के बाद अगले साल से यह मेला सालभर चलेगा। बूम से मुख्य मंदिर तक 15 किलोमीटर हिस्से का 90 प्रतिशत से ज्यादा इलाका वन क्षेत्र में आता है। आरक्षित वन क्षेत्र में गैर वानिकी गतिविधियों पर 2010 से लगी अदालती रोक के बाद मेले का जिम्मा तत्कालीन डीएम के मौखिक आदेश से 2011 से मेला संचालन समिति को दिया गया था। इस समिति में एसडीएम, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी और मंदिर समिति के अध्यक्ष शामिल किए गए थे।
विज्ञापन
सालभर के मेले और जिला पंचायत की पैरवी के बाद अब मेले के संचालन का जिम्मा एक बार फिर से जिला पंचायत को दिया गया है। इस संबंध में पंचायतीराज सचिव नितेश कुमार झा ने सभी संबंधित पक्षों से वार्ता कर मेले की व्यवस्था उप्र गजट नोटिफिकेशन सितंबर 1985 के अनुरूप जिला पंचायत को देने के आदेश दिए। आरक्षित वन क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगी। इस निर्णय से मंदिर समिति अध्यक्ष की मेले के संचालन में भूमिका समाप्त हो जाएगी। संवाद
विज्ञापन
बाक्स
जिला पंचायत निधि में जमा होगी मेले से प्राप्त आय
चंपावत। 2011 से इस साल 2023 तक मां पूर्णागिरि धाम का मेला संचालन समिति करा रही थी। मेले से होने वाली सभी आय मेलाधिकारी और मेला मजिस्ट्रेट के संयुक्त खाते में जमा होती थी। जिला पंचायत को मेले के आयोजन की जिम्मेदारी मिलने से पूर्णागिरि मेले के ठेकों और अन्य मदों से प्राप्त होने वाली राशि को 2011 से पूर्व की तरह जिला पंचायत की जिला निधि में जमा कराया जा सकेगा।
कोट पूर्णागिरि मेले के संचालन की जिम्मेदारी जिला पंचायत की रहेगी। इससे संबंधित शासन का आदेश प्राप्त हो गया है। सालभर के मेले के आयोजन के बाद पंचायत को ये जिम्मेदारी सभी संबंधित पक्षों की सहमति से दी गई है। 2024 से मेले का आयोजन जिला पंचायत ही करेगी।
नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
कोट
मां पूर्णागिरि धाम के मेले के आयोजन की जिम्मेदारी जिला पंचायत को मिलना बड़ी उपलब्धि है। इससे व्यवस्थाओं में और अधिक सुधार होने के साथ तीर्थ यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। पंचायत के पास इस मेले को कराने का पर्याप्त अनुभव भी है।
ज्योति राय, अध्यक्ष, जिला पंचायत, चंपावत।