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चलते-फिरते शौचालय का नहीं हो पा रहा है उपयोग
Updated Sun, 28 Oct 2018 10:37 PM IST
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चंपावत। चंपावत जिले में चलता-फिरता शौचालय करीब सात महीने से बेकाम के खड़े हैं। इन शौचालयों का उपयोग नहीं होने से लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान गंदगी से निजात दिलाने के लिए चलते-फिरते शौचालय खरीदे गए। पर्यटन विभाग ने इन दो शौचालयों के लिए चंपावत नगर पालिका को 2017-18 में दस लाख रुपये दिए। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि एक सचल शौचालय 4 सीट और दूसरा 6 सीट का है। दोनों चलते-फिरते शौचालयों में सफाई के लिए पानी की 500 लीटर की टंकी है।
नगर पालिका ने इन शौचालयों को खरीद भी लिया, लेकिन इन शौचालयों का उपयोग अब तक नहीं किया गया। इस अवधि में मई में यहां पांच दिन का गोलज्यू महोत्सव और एक सप्ताह का कारोबारी मेला और सितंबर में सात दिन का नंदा-सुनंदा महोत्सव लगा। साथ ही रामलीला के आयोजन से लेकर खेलकूद सहित कई अन्य गतिविधियां भी होती रही है। लोगों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा, मगर इन शौचालयों को उपयोग के लिए नहीं लगाया गया।
ईओ का कहना है कि मांग नहीं करने की वजह से सचल शौचालय नहीं दिए गए। जिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसकी मांग की जाएगी, वहां ये सचल शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे। अलबत्ता पुलिस लाइन में हुए कार्यक्रम में इस शौचालय को भेजा गया था।
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पर्यटन विभाग ने चंपावत में दो चलते-फिरते शौचालय के लिए बीते वित्त वर्ष में नगर पालिका को 10 लाख रुपये हस्तांतरित किए, लेकिन अभी तक नगर पालिका द्वारा इस रकम का उपयोगिता प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया है।
- लता बिष्ट, जिला पर्यटन अधिकारी, चंपावत।
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सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान गंदगी से निजात दिलाने के लिए चलते-फिरते शौचालय खरीदे गए। पर्यटन विभाग ने इन दो शौचालयों के लिए चंपावत नगर पालिका को 2017-18 में दस लाख रुपये दिए। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि एक सचल शौचालय 4 सीट और दूसरा 6 सीट का है। दोनों चलते-फिरते शौचालयों में सफाई के लिए पानी की 500 लीटर की टंकी है।
नगर पालिका ने इन शौचालयों को खरीद भी लिया, लेकिन इन शौचालयों का उपयोग अब तक नहीं किया गया। इस अवधि में मई में यहां पांच दिन का गोलज्यू महोत्सव और एक सप्ताह का कारोबारी मेला और सितंबर में सात दिन का नंदा-सुनंदा महोत्सव लगा। साथ ही रामलीला के आयोजन से लेकर खेलकूद सहित कई अन्य गतिविधियां भी होती रही है। लोगों को शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा, मगर इन शौचालयों को उपयोग के लिए नहीं लगाया गया।
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ईओ का कहना है कि मांग नहीं करने की वजह से सचल शौचालय नहीं दिए गए। जिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसकी मांग की जाएगी, वहां ये सचल शौचालय उपलब्ध कराए जाएंगे। अलबत्ता पुलिस लाइन में हुए कार्यक्रम में इस शौचालय को भेजा गया था।
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पर्यटन विभाग ने चंपावत में दो चलते-फिरते शौचालय के लिए बीते वित्त वर्ष में नगर पालिका को 10 लाख रुपये हस्तांतरित किए, लेकिन अभी तक नगर पालिका द्वारा इस रकम का उपयोगिता प्रमाणपत्र भी नहीं दिया गया है।
- लता बिष्ट, जिला पर्यटन अधिकारी, चंपावत।