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टनकपुर से नंधौर अभयारण्य में 13 से जंगल सफारी
Updated Sat, 06 Jan 2018 11:13 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)।
नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में टनकपुर गेट से जंगल सफारी दौड़ाने को हरी झंडी दिखाने की तिथि 13 जनवरी तय हो गई है। तिथि तय होने के बाद अब वन विभाग उद्घाटन की तैयारियों में जुट गया है। इससे मां पूर्णागिरि धाम में आने वाले श्रद्धालु भी इस अभयारण्य में कुलाचें मारते हिरण एवं अन्य वन्यजीवों का लुत्फ उठा पाएंगे। डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल ने बताया कि जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। पर्यटकों के ठहरने के लिए जौलासाल वन विश्राम भवन, टनकपुर वन विश्राम गृह, बूम वन विश्राम गृह, सेनापानी वन विश्राम गृह को तैयार किया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से जिम कार्बेट की तर्ज पर नंधौर वन्यजीव अभयारण्य को भी पर्यटकों के लिए खोलने की कवायद चल रही थी। इसमें हल्द्वानी के चोरगलिया से पर्यटकों के लिए जंगल सफारी पहले ही खोली जा चुकी है। अभयारण्य में देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही हो रही है, लेकिन अभयारण्य के दूसरे छोर सीमांत क्षेत्र टनकपुर एवं चकरपुर गेट से अभी जंगल सफारी शुरू नहीं हुई है। अब विभाग टनकपुर से भी जंगल सफारी दौड़ाने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए सड़क से पर्यटक आवास जोड़ने, वन्यजीवों के विचरण स्थलों का चिन्हीकरण आदि कार्य शुरू किया जा चुका है। वर्ष 2012 में स्थापित यह अभयारण्य करीब 26 हजार से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। अभयारण्य में अब पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अभयारण्य में बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू, कांकर, सांभर, बारहसिंघा हाथी समेत कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी हैं। टनकपुर के ककरागेट से प्रवेश कर पर्यटक दोगाड़ी, सेनापानी, किलपुरा रेंज होते हुए चकरपुर गेट से बाहर आ-जा सकेंगे।
बीते दिनों विधायक कैलाश गहतोड़ी ने पर्यटक सुविधाएं विकसित करने को विधायक निधि से 20 लाख रुपये मंजूर किए हैं। जंगल सफारी में भारतीय पर्यटकों के लिए वाहन प्रवेश शुल्क ढाई सौ और विदेशी पर्यटकों से पांच सौ रुपये तय किया गया है। इसी तरह भारतीय पर्यटकों से प्रति व्यक्ति डेढ़ सौ एवं विदेशी नागरिकों से छह सौ रुपये तय किया गया है।
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इधर डीएफओ डॉ. सनवाल के मुताबिक टनकपुर गेट से जंगल सफारी शुरू करने के लिए 13 जनवरी की तिथि प्रस्तावित की गई है। उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल जंगल सफारी की शुरुआत होगी। जल्द ही ककरालीगेट में स्वागत कक्ष का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गाइड बनने के इच्छुक बेरोजगार युवकों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिया जाएगा।
ऐतिहासिक पेड़ों को भी देख सकेंगे पर्यटक
टनकपुर। नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटकों को कुलांचे मारते हिरणों के झुंड एवं अन्य वन्यजीव और दुर्लभ पक्षी ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक वृक्षों के भी दीदार होंगे। उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि अभयारण्य के सुमनथापला बीट के लाखनमंडी ब्लॉक की कंपार्ट संख्या स7, 5ब में पांच मीटर गोलाई का ऐतिहासिक साल का वृक्ष खड़ा है। जिसे देखने के लिए वन प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षणार्थी शोध करने के लिए आते हैं। इसके आसपास प्राचीनकाल की पत्थर की सुंदर मूर्तियां भी है। इसके अलावा विरगोठ कंपार्ट संख्या 1 पूर्वी जौलासाल बीट में 30 फुट गोलाई के दो हल्दू के पुराने पेड़ भी खड़े हैं।
नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में टनकपुर गेट से जंगल सफारी दौड़ाने को हरी झंडी दिखाने की तिथि 13 जनवरी तय हो गई है। तिथि तय होने के बाद अब वन विभाग उद्घाटन की तैयारियों में जुट गया है। इससे मां पूर्णागिरि धाम में आने वाले श्रद्धालु भी इस अभयारण्य में कुलाचें मारते हिरण एवं अन्य वन्यजीवों का लुत्फ उठा पाएंगे। डीएफओ डॉ. चंद्रशेखर सनवाल ने बताया कि जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी की जा रही है। पर्यटकों के ठहरने के लिए जौलासाल वन विश्राम भवन, टनकपुर वन विश्राम गृह, बूम वन विश्राम गृह, सेनापानी वन विश्राम गृह को तैयार किया जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से जिम कार्बेट की तर्ज पर नंधौर वन्यजीव अभयारण्य को भी पर्यटकों के लिए खोलने की कवायद चल रही थी। इसमें हल्द्वानी के चोरगलिया से पर्यटकों के लिए जंगल सफारी पहले ही खोली जा चुकी है। अभयारण्य में देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही हो रही है, लेकिन अभयारण्य के दूसरे छोर सीमांत क्षेत्र टनकपुर एवं चकरपुर गेट से अभी जंगल सफारी शुरू नहीं हुई है। अब विभाग टनकपुर से भी जंगल सफारी दौड़ाने की तैयारी में जुटा है। इसके लिए सड़क से पर्यटक आवास जोड़ने, वन्यजीवों के विचरण स्थलों का चिन्हीकरण आदि कार्य शुरू किया जा चुका है। वर्ष 2012 में स्थापित यह अभयारण्य करीब 26 हजार से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। अभयारण्य में अब पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अभयारण्य में बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू, कांकर, सांभर, बारहसिंघा हाथी समेत कई दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी हैं। टनकपुर के ककरागेट से प्रवेश कर पर्यटक दोगाड़ी, सेनापानी, किलपुरा रेंज होते हुए चकरपुर गेट से बाहर आ-जा सकेंगे।
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बीते दिनों विधायक कैलाश गहतोड़ी ने पर्यटक सुविधाएं विकसित करने को विधायक निधि से 20 लाख रुपये मंजूर किए हैं। जंगल सफारी में भारतीय पर्यटकों के लिए वाहन प्रवेश शुल्क ढाई सौ और विदेशी पर्यटकों से पांच सौ रुपये तय किया गया है। इसी तरह भारतीय पर्यटकों से प्रति व्यक्ति डेढ़ सौ एवं विदेशी नागरिकों से छह सौ रुपये तय किया गया है।
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इधर डीएफओ डॉ. सनवाल के मुताबिक टनकपुर गेट से जंगल सफारी शुरू करने के लिए 13 जनवरी की तिथि प्रस्तावित की गई है। उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल जंगल सफारी की शुरुआत होगी। जल्द ही ककरालीगेट में स्वागत कक्ष का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गाइड बनने के इच्छुक बेरोजगार युवकों को प्रशिक्षित कर रोजगार दिया जाएगा।
ऐतिहासिक पेड़ों को भी देख सकेंगे पर्यटक
टनकपुर। नंधौर वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटकों को कुलांचे मारते हिरणों के झुंड एवं अन्य वन्यजीव और दुर्लभ पक्षी ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक वृक्षों के भी दीदार होंगे। उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि अभयारण्य के सुमनथापला बीट के लाखनमंडी ब्लॉक की कंपार्ट संख्या स7, 5ब में पांच मीटर गोलाई का ऐतिहासिक साल का वृक्ष खड़ा है। जिसे देखने के लिए वन प्रशिक्षण संस्थानों के प्रशिक्षणार्थी शोध करने के लिए आते हैं। इसके आसपास प्राचीनकाल की पत्थर की सुंदर मूर्तियां भी है। इसके अलावा विरगोठ कंपार्ट संख्या 1 पूर्वी जौलासाल बीट में 30 फुट गोलाई के दो हल्दू के पुराने पेड़ भी खड़े हैं।