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पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आएंगे 3.40 लाख पेड़
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चंपावत। प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में 3.40 लाख से अधिक पेड़ आएंगे। इनमें 50 प्रतिशत से अधिक साल के पेड़ हैं। शेष पेड़ बांज, चीड़, बुरांश और अन्य प्रजातियों के हैं। पेड़ों की गिनती पूरी करने के बाद बृहस्पतिवार को वन विभाग ने ये जानकारी दी।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में 26 दिसंबर 2017 से पेड़ों की गिनती शुरू हुई थी, लेकिन बजट न मिलने के कारण एक माह बाद ही पेड़ों की गिनती बंद हो गई थी। करीब ढाई साल तक बजट नहीं मिलने के कारण गिनती नहीं हो सकी। काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की वापकोस कंपनी से 23.09 लाख रुपये मिलने के बाद इस साल अगस्त से फिर से पेड़ों की गिनती शुरू हुई। डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की 36 दिन में गिनती पूरी कर ली गई है। डूब क्षेत्र में कुल 3,40,897 पेड़ आ रहे हैं। गिने गए पेड़ों पर लाल निशान लगा दिया गया है। पेड़ गिनने का काम रेंजर हेम चंद्र गहतोड़ी, दीप जोशी, सुनील शर्मा और केआर टम्टा के नेतृत्व में पूरा हुआ।
डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की संख्या:
काली कुमाऊं - 3.01 लाख
लोहाघाट - 32,837 पेड़
चंपावत - 7859 पेड़
देवीधुरा - 200
नाप भूमि के पेड़ों की गिनती होना बाकी
पंचेश्वर बांध परियोजना से तीन जिलों की 134 ग्राम पंचायतों (पिथौरागढ़ के 87, चंपावत के 26 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव) के 54488 लोग विस्थापित होंगे। इन लोगों की जमीन के पेड़ों को अभी गिना जाना बाकी है। वन क्षेत्राधिकारी गहतोड़ी ने बताया कि डूब क्षेत्र में आने वाली नाप भूमि के पेड़ों को गिनने के लिए अभी कोई आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि नाम भूमि के पेड़ों की गिनती के बाद चार लाख से अधिक पेड़ डूब क्षेत्र में आएंगे।
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बांध बना तो पैदा होगी 5040 मेगावाट बिजली
60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना में बीते डेढ़ साल से ठहराव की स्थिति है। पंचेश्वर और इसके रेगुलेटिंग बांध रूपालीगाड़ से 5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। पंचेश्वर से 4800 और रुपालीगाड़ से 240 मेगावाट उत्पादन किया जाएगा। पंचेश्वर के अलावा रूपालीगाड़ में बनने वाले रेगुलेटिंग बांध निर्माण के लिए भूमिगत सुरंगों का काम पहले ही पूरा हो चुका है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि वन और सिविल क्षेत्र के पेड़ों की गिनती पूरी होने की जानकारी शासन को भेजी जाएगी।
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पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में 26 दिसंबर 2017 से पेड़ों की गिनती शुरू हुई थी, लेकिन बजट न मिलने के कारण एक माह बाद ही पेड़ों की गिनती बंद हो गई थी। करीब ढाई साल तक बजट नहीं मिलने के कारण गिनती नहीं हो सकी। काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की वापकोस कंपनी से 23.09 लाख रुपये मिलने के बाद इस साल अगस्त से फिर से पेड़ों की गिनती शुरू हुई। डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की 36 दिन में गिनती पूरी कर ली गई है। डूब क्षेत्र में कुल 3,40,897 पेड़ आ रहे हैं। गिने गए पेड़ों पर लाल निशान लगा दिया गया है। पेड़ गिनने का काम रेंजर हेम चंद्र गहतोड़ी, दीप जोशी, सुनील शर्मा और केआर टम्टा के नेतृत्व में पूरा हुआ।
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डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की संख्या:
काली कुमाऊं - 3.01 लाख
लोहाघाट - 32,837 पेड़
चंपावत - 7859 पेड़
देवीधुरा - 200
नाप भूमि के पेड़ों की गिनती होना बाकी
पंचेश्वर बांध परियोजना से तीन जिलों की 134 ग्राम पंचायतों (पिथौरागढ़ के 87, चंपावत के 26 और अल्मोड़ा जिले के 21 गांव) के 54488 लोग विस्थापित होंगे। इन लोगों की जमीन के पेड़ों को अभी गिना जाना बाकी है। वन क्षेत्राधिकारी गहतोड़ी ने बताया कि डूब क्षेत्र में आने वाली नाप भूमि के पेड़ों को गिनने के लिए अभी कोई आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि नाम भूमि के पेड़ों की गिनती के बाद चार लाख से अधिक पेड़ डूब क्षेत्र में आएंगे।
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बांध बना तो पैदा होगी 5040 मेगावाट बिजली
60 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना में बीते डेढ़ साल से ठहराव की स्थिति है। पंचेश्वर और इसके रेगुलेटिंग बांध रूपालीगाड़ से 5040 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। पंचेश्वर से 4800 और रुपालीगाड़ से 240 मेगावाट उत्पादन किया जाएगा। पंचेश्वर के अलावा रूपालीगाड़ में बनने वाले रेगुलेटिंग बांध निर्माण के लिए भूमिगत सुरंगों का काम पहले ही पूरा हो चुका है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि वन और सिविल क्षेत्र के पेड़ों की गिनती पूरी होने की जानकारी शासन को भेजी जाएगी।