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अब बाजार से खरीदनी होंगी आठवीं तक की पाठ्य पुस्तकें
Updated Fri, 30 Mar 2018 11:07 PM IST
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चंपावत।
उत्तराखंड राज्य के सरकारी स्कूलों के आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पुस्तक योजना के अंतर्गत स्कूलों से पुस्तकें दी जाती थी। मगर इस बार इन पुस्तकों के लिए उन्हें शुरू में जेब ढीली करनी होगी। इन पुस्तकों को उन्हें बाजार से खरीदना होगा। बाद में शासन पुस्तकों की रकम को छात्रों के बैंक खाते में स्थानांतरित करेगा।
नया शिक्षा सत्र दो अप्रैल से शुरू होगा। पिछले वर्ष तक नि:शुल्क पुस्तक योजना के तहत पहली कक्षा से आठवीं तक के छात्रों की किताबें सीधे उनके स्कूलों में पहुंचती थी। जिले के 598 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में करीब 23.50 हजार छात्र-छात्राएं हैं। आठ कक्षाओं के छात्रों के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कुल 55 विषयों की पुस्तकों की जरूरत है। लेकिन इनमें से बमुश्किल 21 विषयों की किताबें दुकानों में हैं। वह भी बेहद कम संख्या में। ऐसे में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश निर्धन छात्रों के अभिभावकों के सामने दोहरा संकट है। अभिभावकों का कहना है कि अभी ज्यादातर किताबें दुकानों में उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में उन्हें पुस्तकों के लिए भटकना पड़ रहा है। चंपावत के प्रमुख पुस्तक विक्रेता श्याम नारायण पांडेय का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध हैं। हिंदी माध्यम की कुछ ही विषयों की किताबें उपलब्ध हैं। अलबत्ता शेष पुस्तकों की व्यवस्था की जा रही है।
कोट
राज्य सरकार के स्कूलों के आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तक की रकम सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। वक्त पर छात्रों को पुस्तकें मिल सके, इसके लिए पुस्तकों की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है।
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आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
वर्ष छात्र
2014 30812
2015 28005
2016 26889
2017 24997
2018 23503
उत्तराखंड राज्य के सरकारी स्कूलों के आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क पुस्तक योजना के अंतर्गत स्कूलों से पुस्तकें दी जाती थी। मगर इस बार इन पुस्तकों के लिए उन्हें शुरू में जेब ढीली करनी होगी। इन पुस्तकों को उन्हें बाजार से खरीदना होगा। बाद में शासन पुस्तकों की रकम को छात्रों के बैंक खाते में स्थानांतरित करेगा।
नया शिक्षा सत्र दो अप्रैल से शुरू होगा। पिछले वर्ष तक नि:शुल्क पुस्तक योजना के तहत पहली कक्षा से आठवीं तक के छात्रों की किताबें सीधे उनके स्कूलों में पहुंचती थी। जिले के 598 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में करीब 23.50 हजार छात्र-छात्राएं हैं। आठ कक्षाओं के छात्रों के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कुल 55 विषयों की पुस्तकों की जरूरत है। लेकिन इनमें से बमुश्किल 21 विषयों की किताबें दुकानों में हैं। वह भी बेहद कम संख्या में। ऐसे में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश निर्धन छात्रों के अभिभावकों के सामने दोहरा संकट है। अभिभावकों का कहना है कि अभी ज्यादातर किताबें दुकानों में उपलब्ध ही नहीं है। ऐसे में उन्हें पुस्तकों के लिए भटकना पड़ रहा है। चंपावत के प्रमुख पुस्तक विक्रेता श्याम नारायण पांडेय का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें उपलब्ध हैं। हिंदी माध्यम की कुछ ही विषयों की किताबें उपलब्ध हैं। अलबत्ता शेष पुस्तकों की व्यवस्था की जा रही है।
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कोट
राज्य सरकार के स्कूलों के आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तक की रकम सीधे उनके बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। वक्त पर छात्रों को पुस्तकें मिल सके, इसके लिए पुस्तकों की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है।
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आरसी पुरोहित, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
वर्ष छात्र
2014 30812
2015 28005
2016 26889
2017 24997
2018 23503