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पंजीकरण 31371, इलाज हुआ मात्र 163 लोगों का
Updated Fri, 10 Nov 2017 10:48 PM IST
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चंपावत। पिछले साल अगस्त से शुरू मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) चंपावत जिले के लोगों को खास नहीं भायी। न तो लक्ष्य के सापेक्ष पंजीकरण ही हुए और नहीं योजना के तहत अस्पताल पहुंचने वाले। योजना की नाकामी की मुख्य वजह योजना के तहत संबद्ध तीनों सरकारी अस्पतालों में मामूली इलाज की भी व्यवस्था का न होना रही। इसी के चलते अब इस योजना के बंद होने से लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। शुक्रवार को भी जिला अस्पताल के एमएसबीवाई में सन्नाटा था।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के जिला समन्वयक प्रेम भट्ट ने बताया कि 2016 में इस योजना के अंतर्गत 35691 लोगों को पंजीकृत करने का लक्ष्य था, मगर पंजीकरण 24002 ही हुए। जबकि इलाज कराने वाले महज 156 ही थे। वहीं 2017 तक योजना के तहत कुल 37705 लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य था, मगर कुल पंजीकरण 31371 ही हो सके। लेकिन योजना का लाभ उठाने वालों की तादात मात्र 7 रही। योजना के तहत 1206 सामान्य व 458 गंभीर रोगों के इलाज के लिए 1.75 लाख रुपये तक के कैश लेस इलाज का प्रावधान था। मगर जमीनी हकीकत अलग थी। परिजनों के इलाज के लिए पिछले साल अस्पताल पहुंचे ग्रामीण संजय चौड़ाकोटी, दीपक बोहरा सहित कई लोगों के अनुभव अच्छे नहीं रहे। इन ग्रामीणों का कहना है कि योजना के जमीनी क्रियान्वयन में गड़बड़ी से लोगों ने इससे दूरी बनाई। जिले के सरकारी अस्पताल इलाज लायक नहीं थे। खटीमा और अन्य निजी अस्पतालों में जाने पर नगद रहित सुविधा पाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी।
योजना के अंतर्गत जिले में चार अस्पताल संबद्ध थे। जिला अस्पताल, लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व टनकपुर के संयुक्त अस्पताल के अलावा एक निजी अस्पताल (टनकपुर का तुषार अस्पताल) था। तीनों सरकारी अस्पतालों में से एक भी ऑपरेशन करने लायक तो दूर, सामान्य सुविधा भी मुहैय्या नहीं करा पा रहा था। वहीं निजी अस्पताल में भी पर्याप्त आधारभूत नहीं था। इसके चलते लोग योजना का लाभ नहीं उठा सके।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के जिला समन्वयक प्रेम भट्ट ने बताया कि 2016 में इस योजना के अंतर्गत 35691 लोगों को पंजीकृत करने का लक्ष्य था, मगर पंजीकरण 24002 ही हुए। जबकि इलाज कराने वाले महज 156 ही थे। वहीं 2017 तक योजना के तहत कुल 37705 लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य था, मगर कुल पंजीकरण 31371 ही हो सके। लेकिन योजना का लाभ उठाने वालों की तादात मात्र 7 रही। योजना के तहत 1206 सामान्य व 458 गंभीर रोगों के इलाज के लिए 1.75 लाख रुपये तक के कैश लेस इलाज का प्रावधान था। मगर जमीनी हकीकत अलग थी। परिजनों के इलाज के लिए पिछले साल अस्पताल पहुंचे ग्रामीण संजय चौड़ाकोटी, दीपक बोहरा सहित कई लोगों के अनुभव अच्छे नहीं रहे। इन ग्रामीणों का कहना है कि योजना के जमीनी क्रियान्वयन में गड़बड़ी से लोगों ने इससे दूरी बनाई। जिले के सरकारी अस्पताल इलाज लायक नहीं थे। खटीमा और अन्य निजी अस्पतालों में जाने पर नगद रहित सुविधा पाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी।
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योजना के अंतर्गत जिले में चार अस्पताल संबद्ध थे। जिला अस्पताल, लोहाघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व टनकपुर के संयुक्त अस्पताल के अलावा एक निजी अस्पताल (टनकपुर का तुषार अस्पताल) था। तीनों सरकारी अस्पतालों में से एक भी ऑपरेशन करने लायक तो दूर, सामान्य सुविधा भी मुहैय्या नहीं करा पा रहा था। वहीं निजी अस्पताल में भी पर्याप्त आधारभूत नहीं था। इसके चलते लोग योजना का लाभ नहीं उठा सके।
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