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नगरूघाट मेले में देवताओं ने दिया भक्तों को आशीर्वाद
Updated Thu, 22 Nov 2018 11:51 PM IST
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लोहाघाट (चंपावत)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित महाकाली नदी के तट पर नगरूघाट में दो दिनी पारंपरिक मेला शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार अपरान्ह से जत्थों का आना शुरू हुआ। देर रात सबसे पहले सल्टा के देव डांगर श्रद्धालुओं के कंधों पर सवार होकर मंदिर परिक्रमा के लिए निकले। उनके पीछे बगौटी और जमरसों के देव डांगर श्रद्धालु देव डांगरों को कंधों पर बैठाकर मंदिर की ओर बढ़े। सल्टा के देवरथ में गंगा दत्त पांडेय, जगदीश पांडेय, बगौटी में जयदत्त पांडेय, जमरसौ में तेज सिंह में नागार्जुन देवता अवतरित हुए।
इससे पहले बुधवार रात गांवों में देव गद्दी में अवतरित देवताओं ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। लोगों ने झाड़े, झुम्टों, ढुस्कों (लोकगीत) का गायन किया। बगौटी, सल्टा, जमरसों से आए जत्थे बारी-बारी से नगरूघाट को रवाना हुए। जत्थों के आगे हाथों में लाठी लिए युवक और महिलाएं मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। ढोल-दमांऊ को हाथों में उठाकर पूरे उल्लास के साथ लोक देवताओं को अवतरित करा रहे थे। मजपीपल, सुनकुरी, देवकूंडा, सुल्ला आदि गांवों के जत्थों ने मंदिर की परिक्रमा की। आयोजन में डॉ.सतीश चंद्र पांडेय, कमल बोहरा, अनिल पांडेय, बहादुर चंद, रमेश चंद, देव सिंह, दीनानाथ पांडेये, दिवान चंद, विक्रम सामंत, भुवन भट्ट, यशोधर पांडेय, जगदीश चंद्र आदि सहयोग कर रहे हैं।
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इससे पहले बुधवार रात गांवों में देव गद्दी में अवतरित देवताओं ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। लोगों ने झाड़े, झुम्टों, ढुस्कों (लोकगीत) का गायन किया। बगौटी, सल्टा, जमरसों से आए जत्थे बारी-बारी से नगरूघाट को रवाना हुए। जत्थों के आगे हाथों में लाठी लिए युवक और महिलाएं मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। ढोल-दमांऊ को हाथों में उठाकर पूरे उल्लास के साथ लोक देवताओं को अवतरित करा रहे थे। मजपीपल, सुनकुरी, देवकूंडा, सुल्ला आदि गांवों के जत्थों ने मंदिर की परिक्रमा की। आयोजन में डॉ.सतीश चंद्र पांडेय, कमल बोहरा, अनिल पांडेय, बहादुर चंद, रमेश चंद, देव सिंह, दीनानाथ पांडेये, दिवान चंद, विक्रम सामंत, भुवन भट्ट, यशोधर पांडेय, जगदीश चंद्र आदि सहयोग कर रहे हैं।
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