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जमीन के उपर ही बिछा दी पेयजल लाइन
Updated Thu, 22 Mar 2018 11:36 PM IST
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चंपावत। बारहमासी सड़क निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त पेयजल लाइन तो ठीक कर ली गई है। लेकिन इस पेयजल लाइन को जमीन के ऊपर ही बिछा दिया गया है। इससे इस पेयजल योजना का दोबारा से क्षतिग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है। ग्रामीणों ने पेयजल लाइन को जमीन के अंदर दबाने की मांग की है।
दरअसल मौराड़ी ग्राम पंचायत के चार तोकों के लिए साल 2000 में तालम एकल पेयजल योजना का निर्माण हुआ था। नून दूधाधारी खोला स्रोत से बनी छह किमी लंबी पेयजल योजना बारहमासी सड़क निर्माण के डंपिंग जोन के मलबे से क्षतिग्रस्त हो गई थी। लंबे समय तक पेयजल किल्लत झेलने के बाद निर्माण कार्य कर रही संबंधित कंपनी ने पेयजल लाइन तो ठीक कर दी। लेकिन उसे जमीन के अंदर नहीं दबाया। ग्रामीण मुरलीधर, दुर्गादत्त, रमेश चंद्र, नवीन चंद्र, शिवदत्त, भवानी दत्त, खिलानंद और खीमा देवी ने बताया कि पेयजल लाइन जमीन के ऊपर बिछाए जाने से दोबारा क्षतिग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है।
इन ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल योजना से मौराड़ी के चार तोक तालम, कौला, द्वारलेख और लचोटा के छह किलोमीटर लंबी पेयजल योजना बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि इस पेयजल योजना से 60 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। दोबारा से इस लाइन के क्षतिग्रस्त होने से बड़ी आबादी को फिर से पेयजल संकट झेलना होगा। उन्होंने पेयजल योजना को जमीन के अंदर दबाने की मांग की है। उधर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला का कहना है कि संबंधित कंपनी को पेयजल लाइन जमीन के अंदर दबाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
दरअसल मौराड़ी ग्राम पंचायत के चार तोकों के लिए साल 2000 में तालम एकल पेयजल योजना का निर्माण हुआ था। नून दूधाधारी खोला स्रोत से बनी छह किमी लंबी पेयजल योजना बारहमासी सड़क निर्माण के डंपिंग जोन के मलबे से क्षतिग्रस्त हो गई थी। लंबे समय तक पेयजल किल्लत झेलने के बाद निर्माण कार्य कर रही संबंधित कंपनी ने पेयजल लाइन तो ठीक कर दी। लेकिन उसे जमीन के अंदर नहीं दबाया। ग्रामीण मुरलीधर, दुर्गादत्त, रमेश चंद्र, नवीन चंद्र, शिवदत्त, भवानी दत्त, खिलानंद और खीमा देवी ने बताया कि पेयजल लाइन जमीन के ऊपर बिछाए जाने से दोबारा क्षतिग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है।
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इन ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल योजना से मौराड़ी के चार तोक तालम, कौला, द्वारलेख और लचोटा के छह किलोमीटर लंबी पेयजल योजना बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि इस पेयजल योजना से 60 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। दोबारा से इस लाइन के क्षतिग्रस्त होने से बड़ी आबादी को फिर से पेयजल संकट झेलना होगा। उन्होंने पेयजल योजना को जमीन के अंदर दबाने की मांग की है। उधर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथेला का कहना है कि संबंधित कंपनी को पेयजल लाइन जमीन के अंदर दबाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
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