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संयुक्त चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती
Updated Sat, 26 May 2018 12:33 AM IST
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टनकपुर (चंपावत)।
मैदान एवं पर्वतीय मार्ग के प्रवेश द्वार टनकपुर के संयुक्त चिकित्सालय में स्टाफ और संसाधनों की कमी से चिकित्सा सुविधाओं का बुरा हाल है। विशेषकर डॉक्टरों की कमी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। आपात स्थिति में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा न होने से तीस बेड का यह अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। अलबत्ता 18 मई को विचई गांव के पास हाइवे पर हुए भीषण सड़क हादसे के बाद अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर जरूर मिल गया है। पूर्व में यहां तैनात रहे डॉ. वीके जोशी को दो दिन पहले लोहाघाट से स्थानांतरित कर यहां भेजा गया है।
वर्ष 2006 में बना संयुक्त चिकित्सालय लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। अस्पताल में सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, फिजीशियन, नेत्र सर्जन, ईएमओ, स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। अस्पताल में निश्चेतक तैनात है, लेकिन सर्जन के न होने से ओटी शोपीस बना है। ऐसे ही रेडियोलॉजिस्ट के न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन भी धूल फांक रही है। एक्स-रे की सुविधा भी डार्करूम सहायक के भरोसे चल रही है। ऐसे में गंभीर रोगियों एवं सड़क हादसों में घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बनी है। कभी-कभी तो रेफर किया मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता है। 18 मई को विचई के पास हुए हादसे में भी यहां से रेफर से किए दो घायलों ने भी हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया था। यहां तैनात बाल रोग विशेषज्ञ के लंबी छुट्टी पर जाने से इन दिनों बच्चों के उपचार के लिए आ रहे लोगों को भी अस्पताल से निराश लौटना पड़ रहा है। वहीं बगैर प्रतिस्थानी के पैथोलॉजिस्ट का भी यहां से स्थानांतरण कर दिया गया है।
मैदान एवं पर्वतीय मार्ग के प्रवेश द्वार टनकपुर के संयुक्त चिकित्सालय में स्टाफ और संसाधनों की कमी से चिकित्सा सुविधाओं का बुरा हाल है। विशेषकर डॉक्टरों की कमी लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। आपात स्थिति में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा न होने से तीस बेड का यह अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है। अलबत्ता 18 मई को विचई गांव के पास हाइवे पर हुए भीषण सड़क हादसे के बाद अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर जरूर मिल गया है। पूर्व में यहां तैनात रहे डॉ. वीके जोशी को दो दिन पहले लोहाघाट से स्थानांतरित कर यहां भेजा गया है।
वर्ष 2006 में बना संयुक्त चिकित्सालय लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। अस्पताल में सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, फिजीशियन, नेत्र सर्जन, ईएमओ, स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। अस्पताल में निश्चेतक तैनात है, लेकिन सर्जन के न होने से ओटी शोपीस बना है। ऐसे ही रेडियोलॉजिस्ट के न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन भी धूल फांक रही है। एक्स-रे की सुविधा भी डार्करूम सहायक के भरोसे चल रही है। ऐसे में गंभीर रोगियों एवं सड़क हादसों में घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बनी है। कभी-कभी तो रेफर किया मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता है। 18 मई को विचई के पास हुए हादसे में भी यहां से रेफर से किए दो घायलों ने भी हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया था। यहां तैनात बाल रोग विशेषज्ञ के लंबी छुट्टी पर जाने से इन दिनों बच्चों के उपचार के लिए आ रहे लोगों को भी अस्पताल से निराश लौटना पड़ रहा है। वहीं बगैर प्रतिस्थानी के पैथोलॉजिस्ट का भी यहां से स्थानांतरण कर दिया गया है।
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