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‘तालाब’ के पानी से बुझा रहे प्यास
ब्यूरो/अमर उजाला,चमोली
Updated Wed, 13 May 2015 05:18 PM IST
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मोपाटा ग्राम पंचायत बजई गांव के लिए आज तक कोई पेयजल योजना नहीं बनी है। ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयासों से एक तालाब बनाया है जिसमें पेयजल स्रोत का पानी इकट्ठा होता है।
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इसी पानी से वह अपनी प्यास बुझाते हैं। यही नहीं सार्वजनिक कार्यों में ग्रामीणों को खच्चरों से पानी ढोना पड़ता है। पेयजल लाइन न होने से गांव में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हो पाया है।
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चमोली और बागेश्वर जिले की सीमा पर बसे बजई गांव में कोई भी पेयजल योजना नहीं बनी है। 20 परिवारों का गांव 1750 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। यहां कोई भी पेयजल स्रोत नहीं है।
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पीने के लिए ग्रामीण दो किमी नीचे उतरकर पानी लेकर जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गरमियों में स्रोत पर पानी कम हो जाता है ऐसे में स्रोत का पानी तालाब में एकत्र कर उपयोग करते हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य पुष्पा जोशी ने बताया कि गांव पहाड़ी पर होने से यहां पंपिंग योजना ही एकमात्र विकल्प है। गांव के 72 वर्षीय दरवान सिंह ने बताया कि गांव में शादी समारोह या अन्य सार्वजनिक कार्य के लिए तीन किमी दूर भगदानू प्राकृतिक स्रोत से खच्चरों से पानी ढोया जाता है
इसके लिए 100 रुपये प्रति खच्चर चुकाने होते हैं, जबकि पानी महज 40 लीटर ही पहुंच पाता है। वहीं स्वजल के परियोजना अधिकारी शैलेश बड़ौनी ने बताया कि चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लाक में एक गांव सोलर पंपिंग योजना के लिए चयनित किया गया है। अगले वर्ष की कार्ययोजना में बजई गांव को भी शामिल किया जाएगा।