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Haridwar: कुंभ की यादें, अनुष्ठान में बढ़ रही युवाओं की अहम भूमिका, योग से निरोग रहने का देंगे संदेश

Sat, 04 Apr 2026 04:39 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: Renu Saklani Updated Sat, 04 Apr 2026 04:39 PM IST
सार

कुंभ जैसे अनुष्ठानों में युवाओं की भूमिका बढ़ रही है। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के महंत महंत गोविंददास ने बताया कि कुंभ की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।

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Kumbh Memories Youth Role Grows in Rituals Like Kumbh Will Spread Message of Staying Disease Free Through Yoga
योगगुरु गोविंद दास - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अमर उजाला की अपने पौराणिक आयोजनों की स्मृतियों को संजोने और सहेजने में जुटी है यह पहल बधाई के योग्य है। अर्धकुंभ इस बार कुंभ की तर्ज पर आयोजित किया जा रहा है। कोविड काल की दुश्वारियों और उसकी जो कसक रह गई इस बार सभी मनोयोग से तैयार हैं।

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सबसे खास बात कि पिछले कई आयोजन में देखा गया कि कुंभ हो या कांवड़ सनातन के कोई भी धार्मिक अनुष्ठान सभी में युवाओं की अहम भूमिका है। ऐसे में श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन ऐसे आयोजनों में अपनी पूर्ण सहभागिता दर्ज करेगा। सबसे बड़ी बात जब यहां अर्धकुंभ होता है तो सभी साधु संत उज्जैन चले जाते हैं, चूंकि एक वर्ष पूर्व आयोजन हो रहा है तो निश्चित तौर पर इसमें सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।

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अर्धकुंभ दो जगह होते हैं, प्रयाग और हरिद्वार, शाही स्नान, धर्म ध्वजा स्थापना और अन्य गतिविधियों को तो वास्तव में पूरा नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह प्रयास सरकार है तो संत भी इसमें पूर्ण सहभागी होंगे। फिलहाल, आज विकास और आधुनिकता के साथ यात्रियों की संख्या इस तरह बढी है कि उसे देखकर सभी को उनकी आस्था का सम्मान करना होगा।
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योग साधना प्राचीन परंपरा
युवा वर्ग जिस तरह अपने आयोजन से जुड़ रही है इसे देखते हुए अगर सरकार ने फैसला लिया है तो संत परंपरा के लोग भी पूर्ण मनोयोग से अपने कार्य को पूर्ण करेंगे। जहां तक बात है कि योग और आध्यात्म का प्रसार ऐसे अनुष्ठान भी इसमें महत्वपूर्ण होते हैं। योग साधना प्राचीन परंपरा है इसका इतिहास यहां से जोड़ सकते हैं कि महादेव ने माता पार्वती को योग साधना का मर्म बताया।

महर्षि पतंजली बनारस में जन्में उन्होंने कई पातंजलि योग सूत्र रचा, जो कई ऋषियों तक गया। हर कुंभ में प्रयास रहता है कि योग, आध्यात्म और साधना के प्रमुख तत्व युवाओं तक पहुंचे। इस बार भी प्रयाग की तर्ज पर सैकड़ों युवाओं को इन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

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रही बात साधकों को एकत्र करने की तो कुंभ घड़ा है, इस घड़े में बूंद-बूंद अमृत हर किसी को मिले यह प्रयास करना होगा। आयोजन की रूपरेखा बेहतर है, लेकिन इसमें स्वरूप बदले न कि परंपरा बदली जाए। आयोजन इस तरह का हो कि इसे कई दशकों तक याद किया जाए, परंपराओं से कोई समझौता न किया जाए।

-योगगुरु गोविंद दास, महंत श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ाए हरिद्वार


 

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