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बीमार को आठ किमी तक कंधे पर कुर्सी के सहारे पहुंचाया अस्पताल
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निजमूला घाटी के ग्रामीण आज भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के अभाव का दंश झेल रहे हैं। शनिवार को घाटी के दूरस्थ ईराणी गांव में एक महिला के बीमार होने पर ग्रामीणों ने उसे 8 किमी कंधे पर कुर्सी के सहारे सड़क तक पहुंचाया। फिर यहां से वाहन से 30 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
शुक्रवार रात को ईराणी गांव की भवानी देवी के पेट में दर्द उठा। क्षेत्र में अस्पताल न होने के चलते भवानी रातभर पेट दर्द से कराहती रही। शनिवार को भी पेट दर्द कम न होने पर ग्रामीणों ने सुबह आठ बजे कुर्सी के दोनों ओर डंडी लगाकर करीब आठ किलोमीटर तक गांव की पगडंडी पर पैदल ही उसे सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद निजमूला से वाहन से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. जीएस चुफाल ने बताया कि महिला को पेट दर्द की दवाइयां दी गईं हैं। अभी उसका स्वास्थ्य सामान्य है। ग्रामीण जसपाल सिंह ने बताया कि क्षेत्र में अस्पताल की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही सड़क सुविधा का भी अभाव है, जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य, सड़क सुविधा के लिए तरस रहे ग्रामीण
निजमूला घाटी के साथ ही डुमक व कलगोठ गांव के ग्रामीण भी स्वास्थ्य और सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। डुमक क्षेत्र में आयुर्वेदिक अस्पताल तो है, लेकिन यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं है। गांव तक सड़क भी नहीं है, जिससे ग्रामीण करीब 20 किमी तक पैदल आवाजाही करते हैं। क्षेत्र में किसी के बीमार होने पर मरीज को कंधे पर कुर्सी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
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शुक्रवार रात को ईराणी गांव की भवानी देवी के पेट में दर्द उठा। क्षेत्र में अस्पताल न होने के चलते भवानी रातभर पेट दर्द से कराहती रही। शनिवार को भी पेट दर्द कम न होने पर ग्रामीणों ने सुबह आठ बजे कुर्सी के दोनों ओर डंडी लगाकर करीब आठ किलोमीटर तक गांव की पगडंडी पर पैदल ही उसे सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद निजमूला से वाहन से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. जीएस चुफाल ने बताया कि महिला को पेट दर्द की दवाइयां दी गईं हैं। अभी उसका स्वास्थ्य सामान्य है। ग्रामीण जसपाल सिंह ने बताया कि क्षेत्र में अस्पताल की कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही सड़क सुविधा का भी अभाव है, जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य, सड़क सुविधा के लिए तरस रहे ग्रामीण
निजमूला घाटी के साथ ही डुमक व कलगोठ गांव के ग्रामीण भी स्वास्थ्य और सड़क सुविधा के लिए तरस रहे हैं। डुमक क्षेत्र में आयुर्वेदिक अस्पताल तो है, लेकिन यहां डॉक्टर की तैनाती नहीं है। गांव तक सड़क भी नहीं है, जिससे ग्रामीण करीब 20 किमी तक पैदल आवाजाही करते हैं। क्षेत्र में किसी के बीमार होने पर मरीज को कंधे पर कुर्सी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
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