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...तो बगैर गंगा मनेगी शरद पूर्णिमा
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Tue, 15 Oct 2013 10:11 PM IST
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शरद पूर्णिमा 18 अक्तूबर को पड़ रही है। इस दिन अश्विन मास का समापन होगा और पवित्रतम माना जाने वाला कार्तिक मास शुरू हो जाएगा।
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शरद पूर्णिमा नहाने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इधर-उधर जाकर जहां जल मिलेगा, वहीं डुबकी लगानी पड़ेगी। क्लोजर के चलते गंगा में जल टखनों तक रह गया है।
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धारा को बंद कर दिया गया
जैसे-जैसे नहर विस्तारीकरण का कार्य तेज होता जाएगा, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग हरकी पैड़ी पर भी जल की मात्रा कम करता जाएगा। चूंकि कनखल की ओर जाने वाली धारा को बंद कर दिया गया है, अत: कनखल में भी गंगा नजर नहीं आ रहीं।
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प्रतिवर्ष कनखल की गंगा में काफी जल बहता रहता था। इस बार चौड़ीकरण कार्य कनखल धारा से जल लाकर शुरू किया जा रहा है, फलत: कनखल में भी जल नहीं है।
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गंगा नजर नहीं आयेंगी
शरद पूर्णिमा के साथ-साथ वाल्मीकि जयंती, चंडी चौदस, तुला संक्रांति, करवा चौथ, अहोई, अष्टमी, रमा एकादशी, धनतेरस, हनुमान जयंती, छोटी दीपावली नरका चतुर्दशी आदि के पर्व पूरी तरह गड़बड़ा जाएंगे।
सिंचाई विभाग दीपावली की रात तक ही जल छोड़ने की बात कर रहा है। परिणाम स्वरूप दीवाली को भी दीपक जलाने वालों को गंगा नजर नहीं आयेंगी। उत्तर प्रदेश ने उत्तराखंड एवं हरिद्वार के भारी विरोध के बावजूद गंगा क्लोजर कर अनेक स्नान पर्वों को नीरस बना दिया है।