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चौरसों बंगलाधार के ग्रामीणों ने गांव में पहली बार देखा डीएम

Wed, 29 Aug 2018 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Wed, 29 Aug 2018 11:36 PM IST
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Villagers of Bengalis seen for the first time in the village DM
चौरसों बंगलाधार में दितीय विश्व युद्व की लड़ाई लड़ चुके पदम राम की व्यथा सुनतीं डीएम - फोटो : अमर उजाला
 गरुड़ विकास खंड के चौरसों बंगलाधार गांव के ग्रामीणों ने आजादी के बाद पहली बार गांव में डीएम को देखा। ग्रामीणों ने डीएम रंजना राजगुरु का शंख ध्वनि के साथ स्वागत किया। उन्होंने डीएम के समक्ष गांव की समस्याओं को बारीकी से रखा। डीएम ने ग्रामीणों को इस गांव को कृषि के क्षेत्र मॉडल गांव बनाने का भरोसा दिया। 
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चौरसों बंगलाधार गांव कुदरती सौंदर्य से भरपूर है।  इस गांव की खासियत है कि यहां से विकास खंड के 106 गांवों में से 95 गांव साफ नजर आते हैं। इस गांव में पहुंचकर डीएम रंजना राजगुरु काफी अभिभूत नजर आई। उन्होंने कहा कि इस गांव के काश्तकार जैविक खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। चौरसों बंगलाधार ब्लाक का सबसे सुंदर गांव है। यहां की जमीन खेती के लिए काफी उपयुक्त है। 
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डीएम ने कहा चौरसों बंगलाधार गांव कौसानी से कम रमणीक नहीं है। डीएम ने गांव में एचएमएनईएच योजना के तहत केला टिश्यू का पौधा लगाया। कहा कि यहां केला टिश्यू की यहां अच्छी खेती हो सकती है। उन्होंने ने गांव के प्रगतिशील किसान चंद्रशेखर पांडे के बागान और फार्म का निरीक्षण कर उनके द्वारा खेतों में उगाई गई तुलसी की फसल भी देखी। काश्तकारों को तुलसी, झुंगरा, मडुवा, धान, गहत, भट, उड़द आदि फसलों का अधिक से अधिक उत्पादन करने कहा। डीएम ने  जिला पर्यटन अधिकारी से गांव को पर्यटन के क्षेत्र में भी विकसित करने  की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए।  ग्रामीणों ने डीएम से गांव को जोड़ने वाली सड़क में डामरीकरण करने की मांग की। बच्ची राम पांडे ने कहा कि गांव से विकास खंड के 95 गांव एकदम साफ नजर आते हैं। मौके पर एसडीम गरुड़ सुंदर सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी बीपी मौर्य, डीएचओ तेजपाल सिंह, बच्ची राम पांडे, महेश पांडे, हरीश पांडे आदि मौजूद थे।
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 नामन और तुरुफ अंग्रेज का परिवार भी रहा इस गांव में  
गरुड़ (बागेश्वर)। चौरसों बंगलाधार गांव में आजादी से पहले तुरुफ और नाम के दो भाई रहते थे।  इन दोनों अंग्रेजों का बंगला अब खंडहर में तब्दील हो गया है। गांव के 96 वर्षीय पूर्व सैनिक पदम राम ने बताया कि अंग्रेजों के कब्र आज भी गांव में है। पदम राम ने बताया कि फौज में रहते उन्होंने दो लड़ाइयां लड़ी। उम्र के इस पड़ाव में भी वह अपने लिए खाना खुद बनाते हैं।
 
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