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लॉकडाउन में छूटी नौकरी तो पंकज और ललित ने गमलों को बनाया रोजगार का साधन

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2020 03:19 PM IST
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Towards self-employment : Pankaj and Lalit made potters a means of employment
ललित और पंकज कपकोटी। - फोटो : AMAR UJALA
बागेश्वर। लॉकडाउन के कारण घर लौटे प्रवासी गांव में ही स्वरोजगार करने की दिशा में कदम बढ़ाने लगे हैं। कपकोट के दो भाइयों ने गमलों में आजीविका का साधन ढूंढ लिया है। दोनों भाइयों के काम से और लोग भी प्रभावित हैं।
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कोरोना महामारी के चलते कामकाज बंद होने से जिले में कई युवा बाहरी प्रदेशों से घर लौट चुके हैं। ऐसे में युवाओं के सामने घरों में रोजगार बड़ी चुनौती है। कपकोट गांव के दो भाई पंकज कपकोटी और ललित कपकोटी ने वेस्ट मैटेरियल से सुंदर गमले बनाकर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाए हैं। पंकज कपकोटी ने बताया कि वह दिल्ली में काम करते थे और दो महीने पहले घर आए लेकिन लॉकडाउन के चलते उन्हें घर में ही रुकना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने पिछले 20 दिनों से आजीविका के लिए वेस्ट मैटेरियल से गमला बनाना शुरू कर दिया। जिसमें उनके छोटे भाई ललित कपकोटी भी सहयोग देने लगे।
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ललित देहरादून में बीबीए करने के बाद निजी कंपनी में नौकरी करते थे लेकिन लॉकडाउन के बाद उन्हें भी घर लौटना पड़ा। क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद ललित भी पिछले दस दिनों से गमले बनाने में बड़े भाई का सहयोग कर रहे हैं। ललित ने बताया कि कृषि विभाग में कार्यरत उनके मामा नंदन सिंह गढ़िया के सहयोग से खरीदारों को गमले के साथ बेचे जा रहे पौधे की पूरी जानकारी दे रहे हैं। बताया कि गमलों को लोकल मार्केट में बेचने के साथ बाहर भी मार्केट तलाश रहे हैं। भविष्य में ऑनलाइन माध्यम के साथ ही घरों में जाकर गमले बेचने की योजना है। पंकज कपकोटी ने बताया कि रोजगार के लिए बाहर लौटने के बजाय अब वह गमलों के व्यवसाय को ही आजीविका का साधन बनाएंगे, जबकि ललित का कहना है कि वह इसे वैकल्पिक करियर के रूप में देखते हैं।
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--::: वेस्ट मैटेरियल से बना रहे हैं गमले ::: बागेश्वर। ललित कपकोटी ने बताया कि वेस्ट मेटेरियल जैसे कि प्लास्टिक के बोतल, अंडे के कैरेट, पुरानी गाड़ी के पार्ट आदि की मदद से गमले बना रहे हैं। इसके बाद उस पर पेंटिंग कर रहे हैं। साथ ही प्लास्टिक के गमले की मदद से सीमेंट के गमले भी बना रहे हैं।
--::: 50 से 500 रुपये तक है गमलों की कीमत ::: बागेश्वर। ललित कपकोटी ने बताया कि गमलों की कीमत 50 रुपये से 500 रुपये तक है। लोगों की डिमांड पर 30 रुपये की कीमत से शुरू पौधे भी गमले के साथ दिए जा रहे हैं। इस कार्य में अब क्षेत्र के युवा हरीश एेठानी, ललित साही, रवींद्र गढ़िया भी जुड़ गए हैं।

Towards self-employment : Pankaj and Lalit made potters a means of employment
वेस्ट मैटेरियल से बनाए गए गमले। - फोटो : AMAR UJALA
वेस्ट मैटेरियल से बनाए गए गमले।
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