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पीपल को पूजनीय बनाने के लिए उसका जाली के पेड़ संग विवाह रचाया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jul 2021 11:42 PM IST
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To make Peepal worshipable, he got married with a jaali tree in syaldobha village of bageshwar
बागेश्वर। देवभूमि की पहचान यहां के रीति-रिवाज और परंपराओं से है। बदलते समय में जहां लोग अपनी परंपराओं को भूलते जा रहे हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी रीति-रिवाज और परंपराओं को निभाने का चलन है। ऐसी ही एक परंपरा है पीपल विवाह। जिले के स्यालडोबा में ग्रामीणों ने पीपल के पेड़ को पूजनीय बनाने के लिए उसका शुद्धिकरण किया। इस दौरान धूमधाम से पीपल और जाली के पेड़ का विवाह संपन्न कराया गया।
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सनातन धर्म में पीपल के वृक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। कई पर्वों और विशेष दिनों पर पीपल की पूजा का विधान है। माना जाता है कि विवाह के बाद ही पीपल को पूजनीय का दर्जा हासिल होता है। इसे देखते हुए स्यालडोबा के ग्रामीणों ने भी गांव के पीपल को पूजनीय बनाने के लिए उसका विवाह रचाया। यजमान जय किशन पांडेय और उनकी धर्मपत्नी बसंती पांडेय ने पीपल विवाह का आयोजन कराया। महिलाओं ने गांव से पीपल तक गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली। पंडित मनोज तिवारी ने विधिविधान से पीपल के पेड़ का विवाह जाली के पेड़ के साथ संपन्न कराया। उन्होंने बताया कि पीपल को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है, वहीं जाली का पेड़ माता लक्ष्मी का रूप माना गया है। विवाह के उपरांत पीपल का शुद्धिकरण हो जाता है, जिसके बाद पीपल पूजनीय या पूजा करने योग्य हो जाता है। विवाह समारोह में मीरा पांडेय, राहुल पांडेय सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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