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19 साल हो गए जिला बने, रोडवेज डिपो अभी तक नहीं बना
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Mon, 09 Jan 2017 10:36 PM IST
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गठन के 19 साल बाद भी बागेश्वर जिले में रोडवेज डिपो अभी तक अस्तित्व में नहीं आ पाया है। जिले की यातायात व्यवस्था टैक्सियों या फिर कुमाऊं मोटर्स ओनर्स यूनियन पर निर्भर है। बागेश्वर में लंबे समय से रोडवेज का डिपो खोलने की मांग उठ रही है। डिपो की स्वीकृति मिलने के बाद इसका काम भी शुरू हुआ, लेकिन अभी तक डिपो अस्तित्व में नहीं आया है। जिले की कुछ सड़कों में मैदानी क्षेत्रों के लिए अल्मोड़ा, भवाली या काठगोदाम डिपो की गिनी चुनी बसें ही चलती हैं।
बागेश्वर जिले के आंतरिक रूटों में कोई बस नहीं है। ऐसे में जनपद की 95 प्रतिशत आबादी यातायात के लिए निजी क्षेत्र की सेवाओं पर निर्भर है। बागेश्वर जिले के दो विधान सभा क्षेत्रों में निवास करने वाली ढाई लाख की आबादी में करीब 14 प्रतिशत आबादी 55 साल या इससे ऊपर के लोगों की है। इनमें लगभग 12 हजार से अधिक पूर्व सैनिक हैं।
कपकोट, कांडा, गरुड़ क्षेत्रों में निवास करने वाले इन पूर्व सैनिकों को कैंटीन, पेंशन सहित तमाम कार्यों के लिए बागेश्वर जिला मुख्यालय आना जाना पड़ता है। इनमें से अधिकांश पूर्व सैनिक 60 या इससे अधिक उम्र के हैं। अन्य बुजुर्ग और महिलाएं भी तमाम कार्यों से जिला या जिले के अन्य स्थानों के लिए आते-जाते रहते हैं। रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से बुजुर्ग मुफ्त बस सेवा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पूर्व सैनिक पिछले लंबे समय से डिपो स्थापित कर जिले के सभी रूटों में रोडवेज की बसों का संचालन करने की मांग उठा रहे हैं परंतु आज तक उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई है। प्रदेश के अन्य जनपदों में मुफ्त में रोडवेज की बसों में यात्रा करने का जिक्र जिले के बुजुर्ग भी करते रहते हैं। इस बार विधान सभा चुनावों में रोडवेज डिपो और आंतरिक मार्गों में बसों का संचालन न होना एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की ओर है।
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बागेश्वर जिले के आंतरिक रूटों में कोई बस नहीं है। ऐसे में जनपद की 95 प्रतिशत आबादी यातायात के लिए निजी क्षेत्र की सेवाओं पर निर्भर है। बागेश्वर जिले के दो विधान सभा क्षेत्रों में निवास करने वाली ढाई लाख की आबादी में करीब 14 प्रतिशत आबादी 55 साल या इससे ऊपर के लोगों की है। इनमें लगभग 12 हजार से अधिक पूर्व सैनिक हैं।
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कपकोट, कांडा, गरुड़ क्षेत्रों में निवास करने वाले इन पूर्व सैनिकों को कैंटीन, पेंशन सहित तमाम कार्यों के लिए बागेश्वर जिला मुख्यालय आना जाना पड़ता है। इनमें से अधिकांश पूर्व सैनिक 60 या इससे अधिक उम्र के हैं। अन्य बुजुर्ग और महिलाएं भी तमाम कार्यों से जिला या जिले के अन्य स्थानों के लिए आते-जाते रहते हैं। रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होने से बुजुर्ग मुफ्त बस सेवा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पूर्व सैनिक पिछले लंबे समय से डिपो स्थापित कर जिले के सभी रूटों में रोडवेज की बसों का संचालन करने की मांग उठा रहे हैं परंतु आज तक उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई है। प्रदेश के अन्य जनपदों में मुफ्त में रोडवेज की बसों में यात्रा करने का जिक्र जिले के बुजुर्ग भी करते रहते हैं। इस बार विधान सभा चुनावों में रोडवेज डिपो और आंतरिक मार्गों में बसों का संचालन न होना एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की ओर है।
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