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मुस्योली में पर्यावरण से छेड़खानी, खनन ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jul 2021 11:40 PM IST
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tampering with the environment in musoli, mining increased people's troubles
बागेश्वर। घिंघारूतोला का मुस्योली गांव बेतरतीब खड़िया खनन से खतरे की जद में है। गांव के कई आवासीय घरों को खनन से पैदा हो गया है तो पर्यावरण के लिए भी खनन अभिशाप साबित हो रहा है। खनन क्षेत्र के आसपास कई पेड़-पौधे खनन के चलते धराशायी हो गए हैं तो कुछ पेड़ टूटने की कगार पर खड़े हैं। खनन से गांव के दो पैदल रास्तों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। दहशत के साये में जी रहे ग्रामीणों को अब प्रशासन की जांच के बाद होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।
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बागेश्वर जिले में खड़िया का कारोबार बड़े स्तर पर होता है। कांडा, बागेश्वर, दुग नाकुरी तहसीलों में कई खदानें हैं। खनन के लिए भारी मशीनों का उपयोग किया जाता है। वर्षों से चल रहे इस कारोबार की मार अब पर्यावरण पर पड़ने लगी है। भारी मशीनें चलने से जमीन कमजोर होने लगी है। मुस्योली गांव की खदान में भी भारी मशीनों का जमकर प्रयोग होता है, जिसका दुष्प्रभाव अब दिखने लगा है। खनन के कारण कई नाली जमीन पर पड़ीं दरारें अब लोगों के घर आंगन तक पहुंच गई हैं। खेत-खलिहान, जलस्रोत, घर सब पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन कारोबारी ने अपना मुनाफा देखकर बेतरतीब ढंग से खनन किया, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
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पट्टाधारक की मनमर्जी, ग्रामीणों की सिरदर्दी
बागेश्वर। मुस्योली के सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण सिंह धपोला कहते हैं कि गांव को हर्ष सिंह मेहरा नामक पट्टाधारक की खान से खतरा उत्पन्न हुआ है। पट्टाधारक को समस्या बताई तो वह खान किसी और को देने की बात कर रहा है। खदान से बेतरतीब खनन किया गया, जिसके कारण 50 से अधिक पेड़-पौधे नष्ट हो गए और कुछ टूटने की कगार पर खड़े हैं। खनन में बरती गई अनियमितता के कारण नक्शे के दो पैदल रास्ते भी गायब हैं। पेयजल स्रोत पुराना नौला भी खनन की भेंट चढ़ गया है। अगर जल्द खनन बंद नहीं हुआ तो गांव को पूरी तरह से बर्बाद होते देर नहीं लगेगी।
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जांच रिपोर्ट मिली है। जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाया जाएगा। - विनीत कुमार, डीएम बागेश्वर।
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