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40 हजार पशुओं को मिली यूनिक पहचान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2020 11:24 PM IST
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Taging in Animals
बागेश्वर में पशुओं की टैगिंग करते वैक्सीनेटर। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिले के 40 हजार पशुओं को यूनिक पहचान मिल गई है। इन पशुओं के कान में 12 अंकों के यूनिक नंबर का टैग लगाया गया है। एक प्रकार से यह पशुओं के आधार नंबर की तरह है। इससे पशुओं की पहचान में आसानी होगी। पशुपालन विभाग को जिले में 1.7 लाख पशुओं की टैगिंग का लक्ष्य मिला है। करीब 40 हजार पशुओं की टैगिंग हो चुकी है।
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राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले के सभी गोवंशी और महिषवंशीय (भैंस) पशुओं की टैगिंग का कार्य किया जा रहा है। पशुपालन विभाग के 90 वैक्सीनेटर गांवों में जाकर टैगिंग का कार्य कर रहे हैं। पिछले दो माह से चल रहे इस कार्यक्रम में टैगिंग के साथ खुरपका, मुंहपका, वैक्सीनेशन का कार्य भी किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने इनाफ (आईएनएपीएच) पोर्टल लांच किया है। टैग में दर्ज यूनिक नंबर को ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज करने पर पशुस्वामी का नाम और पता, पशु की ब्रीड, दुग्ध उत्पादन, टीकाकरण की स्थिति, कृत्रिम गर्भाधान की जानकारी मिलेगी। अगर पशु खो जाते हैं, तो कहीं भी पशुस्वामी की पहचान हो पाएगी। विभाग के मुताबिक पशुओं की टैगिंग में पशुपालकों का पूरा सहयोग नहीं मिल रहा है। टैगिंग करने से पशुपालक पशु में दूध की कमी आने और गर्भपात की आशंका जता रहे हैं। कुछ पशुपालकों का कहना है कि टैगिंग से लोग पशु को लोन लेकर खरीदा गया समझेंगे।
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2819 पशुओं को हो चुका है निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान
बागेश्वर। राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान योजना के तहत पिछले डेढ़ महीने से पशुओं का निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। कुल 2819 पशुओं का निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। पशुपालक को अस्पताल में पशु के कृत्रिम गर्भाधान के लिए 60 रुपये और घर में 100 रुपये का शुल्क देना पड़ता था। अब बिना शुल्क के कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। केवल बछिया या बछड़ा होने का वीर्य गर्भाधान के लिए 100 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। पहले यह शुल्क 1150 रुपये था। इसके तहत 90 फीसदी बछिया का जन्म होता है। इसके तहत 1384 पशुओं का गर्भाधान हो चुका है। यह अभियान 31 मार्च 2021 तक चलेगा।
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केंद्र सरकार की ओर चल रही दोनों योजनाएं पशुपालकों के फायदे के लिए चलाई जा रही हैं। टैगिंग वाले पशुओं को ही भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। टैग होने पर पशुपालकों को दवा, पशु बीमा और कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाएं मिलेंगी। पशुओं का अगले छह महीने तक निशुल्क कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा।
- डॉ. उदय शंकर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, बागेश्वर।
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