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Bageshwar News: दान में खून, बदले में इंतजार... ब्लड बैंक खुद बीमार

Thu, 01 Oct 2026 12:59 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Thu, 01 Oct 2026 12:59 AM IST
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Blood donated, a wait in return... the blood bank itself is ailing.
बागेश्वर। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। जिस दूरस्थ जिले में सड़क हादसों और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट महत्वपूर्ण है वहां ओपीडी समय के बाद ब्लड बैंक पर ताला लटक जाता है। रात में रक्त की जरूरत पड़ने पर ऑन-कॉल लैब तकनीशियन के पहुंचने का इंतजार करना पड़ता है। प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे रक्त घटकों की जरूरत हो तो मरीज के तीमारदारों को हल्द्वानी और अल्मोड़ा की दौड़ लगानी पड़ती है।
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सबसे गंभीर स्थिति लाखों रुपये की लागत से तैयार ब्लड सेपरेशन यूनिट की है। यूनिट का भवन लंबे समय से तैयार होने के बावजूद इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जिन्हें संपूर्ण रक्त के बजाय प्लेटलेट्स, प्लाज्मा या अन्य रक्त घटकों की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों और उनके परिजनों को रक्त घटकों के लिए जिले से बाहर जाना पड़ रहा है।
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आपातकाल में व्यवस्था ऑन-कॉल के भरोसे
जिला अस्पताल में नियमित समय के बाद ब्लड बैंक की सेवाएं तत्काल उपलब्ध कराने के बजाय ऑन-कॉल व्यवस्था पर निर्भर हैं। आपात स्थिति में मरीज के परिजन पहले तकनीशियन को बुलाने के लिए इंतजार करते हैं। पहाड़ी जिले में रात के समय इस प्रक्रिया में लगने वाला अतिरिक्त समय गंभीर मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
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रक्तदाताओं को प्रोत्साहन तक की व्यवस्था बदहाल
स्वैच्छिक रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। रक्तदान करने वालों को उचित सम्मान पत्र और मोमेंटो तक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। रक्तदान के दौरान हाथों की कसरत के लिए इस्तेमाल होने वाली स्पंज गेंदें भी जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। विभागीय स्तर पर जागरूकता की स्थिति यह है कि जिले में रक्तदान के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी और अन्य सामाजिक संगठनों को ही आगे आना पड़ रहा है। रेडक्रॉस सोसाइटी वर्तमान में जिले के 5000 से अधिक स्वैच्छिक रक्तदाताओं की डायरेक्टरी तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य आपातकाल में जरूरतमंद मरीज के लिए तत्काल रक्तदाता उपलब्ध कराना है।

रक्तदान महादान है, जो किसी मरते हुए इंसान को नई जिंदगी देता है। मैंने अब तक 45 बार रक्तदान किया है। हर स्वस्थ व्यक्ति को आगे आकर इस पुनीत कार्य में हिस्सा लेना चाहिए, क्योंकि आपका दिया रक्त किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है।

......आलोक पांडेय, शिक्षक और रेडक्रॉस सचिव

30 बार रक्तदान करने का मेरा अनुभव रहा है कि इससे शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि मन को आत्मसंतुष्टि मिलती है। आपातकाल में किसी की जान बचाने के लिए युवाओं को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए।


.....नीरज उपाध्याय, रेडक्रॉस सदस्य


जिला अस्पताल के रक्तकोष की सभी व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। ऑन-कॉल व्यवस्था के स्थान पर आपातकालीन सेवाओं को सुचारु रखने के निर्देश दिए जाएंगे। रक्तदाताओं को प्रोत्साहित करने और सुविधाओं में सुधार के लिए शासन से दो लाख रुपये का बजट प्राप्त हुआ है, जिसकी जांच कर त्वरित कार्य कराए जाएंगे। ब्लड सेपरेशन यूनिट के लाइसेंस की प्रक्रिया गतिमान है जल्द इसे शुरू कर दिया जाएगा। रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

....... डॉ. आदित्य तिवारी, सीएमओ
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