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महज चुनावी मुद्दा बनकर रह गई सीवरेज योजना
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सरयू और गोमती के तट पर बसा बागेश्वर नगर। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। बागेश्वर नगरी को जिला बनने के 23 वर्ष बीतने के बाद भी सीवरेज योजना की सुविधा नहीं मिल सकी है। सीवरेज सिस्टम न होने से लोगों को घरों में शौचालय के पिट बनाने पड़ते हैं। इससे कहीं न कहीं भूमिगत जल प्रदूषित होता है। सीवरेज योजना बनाने की मुख्यमंत्री की घोषणा भी भी कोरी साबित हुई है।
करीब 50 हजार आबादी वाले बागेश्वर नगर में सीवरेज योजना का निर्माण प्रत्येक चुनाव में प्रमुख मुद्दा रहता है। राजनीतिक दलों के नेता सीवरेज सिस्टम की सौगात देने के वायदे के साथ चुनाव लड़ते हैं लेकिन सीवरेज योजना बनाने की जहमत किसी भी सरकार ने नहीं उठाई। वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बागेश्वर में सीवरेज योजना का निर्माण करने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर आज तक अमल नहीं हो पाया है।
सीवरेज सिस्टम न होने से लोगों को आवासीय परिसर में शौचालय के पिट बनाने पड़ते हैं। पिट जल्दी न भर जाए, इसके लिए लोग तल में कंकरीट नहीं करते। इस वजह से भूमिगत जल प्रदूषित होता है। हाल में पेयजल निर्माण निगम ने एक अरब रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। करीब साढ़े छह करोड़ रुपये तो योजना की डीपीआर बनाने और जमीन खरीदने में ही खर्च होने का अनुमान है। योजना को मंजूरी न मिलने से जिला मुख्यालय के नागरिकों में मायूसी है। आने वाले चुनाव में सीवरेज सिस्टम भी प्रमुख मुद्दा होगा, जनता इस मुद्दे पर नेताओं को कसेगी, इसमें कोई दो राय नहीं है।
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बरसात में पिट खोल देते हैं लोग
बागेश्वर। सीवरेज सिस्टम न होने से लोगों ने आवासीय परिसरों में शौचालय के पिट बनाए गए हैं। बरसात में तमाम लोग पिट खोल देते हैं। यह गंदगी सरयू और गोमती नदी में जाती है। इससे नदियों का जल भी प्रदूषित होता है। सीवरेज योजना बनने पर जल प्रदूषित होने से बच जाता।
बागेश्वर नगर में सीवर योजना बनाने के लिए एक अरब रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। योजना की डीपीआर बनाने और जमीन खरीदने में करीब 6.5 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। योजना के लिए बजट आवंटित करने का प्रयास किया जा रहा है। - चंदन राम दास विधायक बागेश्वर
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करीब 50 हजार आबादी वाले बागेश्वर नगर में सीवरेज योजना का निर्माण प्रत्येक चुनाव में प्रमुख मुद्दा रहता है। राजनीतिक दलों के नेता सीवरेज सिस्टम की सौगात देने के वायदे के साथ चुनाव लड़ते हैं लेकिन सीवरेज योजना बनाने की जहमत किसी भी सरकार ने नहीं उठाई। वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बागेश्वर में सीवरेज योजना का निर्माण करने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर आज तक अमल नहीं हो पाया है।
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सीवरेज सिस्टम न होने से लोगों को आवासीय परिसर में शौचालय के पिट बनाने पड़ते हैं। पिट जल्दी न भर जाए, इसके लिए लोग तल में कंकरीट नहीं करते। इस वजह से भूमिगत जल प्रदूषित होता है। हाल में पेयजल निर्माण निगम ने एक अरब रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। करीब साढ़े छह करोड़ रुपये तो योजना की डीपीआर बनाने और जमीन खरीदने में ही खर्च होने का अनुमान है। योजना को मंजूरी न मिलने से जिला मुख्यालय के नागरिकों में मायूसी है। आने वाले चुनाव में सीवरेज सिस्टम भी प्रमुख मुद्दा होगा, जनता इस मुद्दे पर नेताओं को कसेगी, इसमें कोई दो राय नहीं है।
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बरसात में पिट खोल देते हैं लोग
बागेश्वर। सीवरेज सिस्टम न होने से लोगों ने आवासीय परिसरों में शौचालय के पिट बनाए गए हैं। बरसात में तमाम लोग पिट खोल देते हैं। यह गंदगी सरयू और गोमती नदी में जाती है। इससे नदियों का जल भी प्रदूषित होता है। सीवरेज योजना बनने पर जल प्रदूषित होने से बच जाता।
बागेश्वर नगर में सीवर योजना बनाने के लिए एक अरब रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। योजना की डीपीआर बनाने और जमीन खरीदने में करीब 6.5 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। योजना के लिए बजट आवंटित करने का प्रयास किया जा रहा है। - चंदन राम दास विधायक बागेश्वर