बागेश्वर: चार और शिक्षकों के दस्तावेज अयोग्य, जनपद में थम नहीं रहा जाली दस्तावेज पर गुरुजी बनने का खेल
बागेश्वर जिले के प्राथमिक विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में चार और शिक्षकों के यूटीटीईटी प्रमाण-पत्र कूटरचित पाए गए।
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बागेश्वर जिले के प्राथमिक विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर की मूल सारणियन पंजिका से जांच और मिलान के बाद चार और शिक्षकों के यूटीईटी प्रमाण-पत्र कूट रचित पाए गए हैं। इनमें से दो शिक्षक कपकोट और दो शिक्षक बागेश्वर ब्लॉक से संबंधित हैं। कपकोट ब्लॉक में पूर्व में पांच शिक्षकों के फर्जी पाए जाने के बाद अब जिले में अयोग्य पाए गए कुल शिक्षकों की संख्या नौ हो गई है।
उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की ओर से उप शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा कपकोट और बागेश्वर को भेजे गए जांच पत्रों से इस कूट रचित मामले की पुष्टि हुई है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों की ओर से प्रस्तुत प्रमाण-पत्रों में दर्ज अंक या विवरण मूल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते, जिसके चलते सत्यापन संभव नहीं है। बागेश्वर ब्लॉक के पंकज कुमार पुत्र रमेश लाल के यूटीईटी I (2024) का अनुक्रमांक और विवरण परिषद की मूल सारणियन पंजिका में अंकित ही नहीं पाया गया। परिषद ने इस प्रमाण-पत्र को पूर्णतः कूट रचित और फर्जी करार दिया है।
नेहा पुत्री गोविंद सिंह यूटीईटी I (2024) के अनुक्रमांक में अर्हता कोड-2 और प्राप्तांकों में भारी भिन्नता पाई गई। पंजिका के अनुसार अभ्यर्थी के कुल अंक मात्र 53/150 थे, जबकि जमा किए गए अंकपत्र में हेरफेर किया गया था। कपकोट ब्लॉक में पूर्व में अरविंद कुमार, संजय कुमार, रजनी, लक्ष्मी आर्या और रोहित कुमार के प्रमाण-पत्र फर्जी पाए गए थे। अब दूसरे चरण के सत्यापन में चंद्र प्रकाश आर्य पुत्र सादी राम आर्य यूटीईटी I (2024) के अनुक्रमांक में प्राप्तांकों में फेरबदल पाया गया। मूल पंजिका के अनुसार कुल अंक मात्र 61/150 थे। प्रियंका पुत्री खग राम यूटीईटी I (2024) के अनुक्रमांक के अंकपत्र में भी फर्जीवाड़ा मिला। मूल पंजिका में अभ्यर्थी के अंक मात्र 61/150 दर्ज हैं। दोनों ही मामलों में परिषद ने स्पष्ट लिखा है कि संबंधित शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत अंकपत्र-सह-प्रमाणपत्र कूट रचित हैं और इन्हें बोर्ड द्वारा जारी नहीं किया गया है।
यूटीईटी प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान जिन भी शिक्षकों के अंकपत्र कूट रचित या फर्जी पाए गए हैं, उन्हें विभाग की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं। नियमानुसार उनसे स्पष्टीकरण मांगते हुए सेवा समाप्ति और एफआईआर दर्ज कराने की विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर विभाग को गुमराह करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। विनय कुमार, सीईओ, बागेश्वर