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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Seven years later, it would not Roadways depot

सात साल बाद भी न बन सका रोडवेज डिपो

Tue, 15 Dec 2015 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Tue, 15 Dec 2015 01:14 AM IST
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 विकास के तमाम दावों के बावजूद यहां सात साल पहले मंजूर रोडवेज डिपो का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो सका है।

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बजट की कमी और निर्माण की धीमी गति को देखते हुए डिपो का निर्माण अगले साल भी पूरा होना मुश्किल लग रहा है। लोगों को मजबूरी में टैक्सियों की महंगी यात्रा करनी पड़ रही है।

जिले में 2008-09 में राज्य सड़क परिवहन निगम का डिपो मंजूर हुआ था। शासन ने निर्माण के लिए 2.88 करोड़ भी मंजूर कर दिए थे। नगर से दो किमी दूर बिलौना गांव में 2013 से डिपो का निर्माण चल रहा है।
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लोगों को विश्वास था कि डिपो का निर्माण शीघ्र होने पर उन्हें यातायात की सुविधा मिलेगी, लेकिन उनका यह सपना अभी भी अधूरा ही है।

शासन ने निर्माण एजेंसी पेयजल निगम की निर्माण विंग सीएनडीएस को अभी तक तीन अलग-अलग किश्तों में सिर्फ 75 लाख रुपये ही मिले हैं। निर्माण के नाम पर यहां सिर्फ भूमि समतलीकरण का काम ही हो सका है।
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विधायक चंदन राम दास ने सरकार पर उनके क्षेत्र की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। रोडवेज डिपो के निर्माण को लेकर उन्होंने अब तक शासन और परिवहन मंत्रालय से कई बार संपर्क किया जबकि इस मामले को वह विधानसभा की बैठक में भी उठा चुके हैं। स्वीकृत बजट के लिए वह अब प्रमुख सचिव परिवहन से मुलाकात करेंगे। इसके बाद भी बजट न मिला तो संघर्ष के अलावा उनके सामने दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।

सीएनडीएस के ईई पीसी जोशी ने बताया शासन से मिले 50 लाख रुपये की किश्त का उपयोग हो चुका है जबकि इस बीच फिर से शासन से 25 लाख रुपये की एक और किश्त मिली है। आगे के कामों की निविदा लगाने की तैयारी हो रही थी कि हड़ताल शुरू हो गई। बजट मिलते ही प्रस्तावित सभी काम समय पर पूरे हो जाएंगे।

मंजूर रोडवेज डिपो का निर्माण तेजी से न होने के कारण यहां के व्यापार और पर्यटन पर कुप्रभाव पड़ा है। दूरदराज को जाने के लिए सीधी बस न होने से जहां व्यापारी सामान नहीं मंगा पाते वहीं इससे सैलानियों को भी खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही है।


धारचूूला, रानीखेत, हरियाणा, आगरा, लखनऊ आदि शहरों को जाने के लिए एक भी बस नहीं हैं। यहां दिल्ली, देेहरादून, बरेली, टनकपुर, भवाली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ डिपो की बसें आती हैं दूसरे रोज वही बसेें लौटती हैं। डिपो के बगैर यहां से तहसील मुख्यालयों के लिए शाम पांच बजे बाद एक भी बस नहीं है।

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