रिठाड़ के जंगल में नहीं मिला तेंदुआ
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शिकारी लखपत सिंह रावत चार दिन से रिठाड़ के जंगल में नरभक्षी तेंदुए की रेकी कर रहे है लेकिन उन्हें तेंदुआ नजर नहीं आया। उधर जखेड़ा, गोमतीघाटी के ग्रामीण तेंदुए के आतंक से भयभीत है। घाटी के ग्रामीणों ने वन विभाग से पिंजरा लगाने को कहा है। वन रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि तेंदुए को पिंजरे में कैद करने को विभाग रात-दिन रिठाड़, भतेड़िया के जंगल में रेकी कर रहा है।
शिकारी लखपत ने बताया कि वह हर एंगल से तेंदुए की खोज कर रहे है। उन्होंने बताया कि वन पंचायत सरपंच की बेटी कंचन को जिस तेंदुए ने मारा उसकी हरकतों से लगता है कि वह दो-तीन साल का हो सकता है। उन्होंने बताया कि तेंदुए की वह रात-दिन खोजबीन कर रहे है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से उन गांवों में शीघ्र पिंजरा लगाने को कहा है, जहां तेंदुआ रात में दस्तक दे रहा है। मांग करने वालों में लाहुरघाटी विकास मंच के अध्यक्ष ईश्वर परिहार, सुराग की प्रधान मोतिमा, नैकाना खुमटिया की प्रधान प्रेमा परिहार, छत्यानी के पूर्व प्रधान इंद्र सिंह बिष्ट, मनाखेत के पूर्व बीडीसी सदस्य नंदन सिंह बोरा आदि शामिल हैं।
वहीं भाजपा के जिला महामंत्री शिव सिंह बिष्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार रिठाड़ के आदमखोर तेंदुए को खतरनाक घोषित नहीं कर सकी है। इसकी बजाय वह जंगली जानवरों के हमले से मरने को वालों को पांच लाख रुपए मुआवजा देने की योजना बना रही है। इससे लगता है कि सरकार को आदमी से ज्यादा जंगली जानवर पसंद है।