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11वीं पुण्यतिथि पर गिर्दा को किया याद, प्रेस क्लब में दी भावभीनी श्रद्घांजलि
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बागेश्वर में गिर्दा को श्रद्धांजलि देते लोग। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर/अल्मोड़ा उत्तराखंड के प्रसिद्ध जनकवि और साहित्यकर्मी स्वर्गीय गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की 11वीं पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। प्रेस क्लब में हुए कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शिरकत की। गोष्ठी में वक्ताओं ने गिर्दा की जीवनी और प्रदेश के लिए उनके योगदान पर चर्चा की। इस मौके पर उनकी याद में पौधरोपण भी किया गया।
प्रेस क्लब में हुए कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने गिर्दा के चित्र के सम्मुख दीप जलाया, उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गोष्ठी में वक्ताओं ने गिर्दा के गीतों और विभिन्न आंदोलनों में उनके योगदान को याद किया। अध्यक्षता करते हुए चंदन सिंह परिहार ने गिर्दा की जीवनी, संस्मरणों और प्रदेश के लिए योगदान पर प्रकाश डाला। रमेश पांडेय कृषक ने कहा कि गिर्दा आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत, बातें, कविताएं और लोक नाटकों के माध्यम से समाज हित में उठाए मुद्दे हमेशा जनसंघर्षों को नई ऊर्जा प्रदान करते रहेंगे। उत्तराखंड बनाओ, नशा नहीं रोजगार दो और चिपको आंदोलन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने गिर्दा के आदर्शों को सदैव जिंदा रखने के लिए प्रयास करने का संकल्प लिया। इस मौके पर वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मनोज ओली, रमेश प्रकाश पर्वतीय, नवीन रावल, घनश्याम जोशी, जगदीश उपाध्याय, हरीश नगरकोटी, मनीष गढ़िया आदि मौजूद रहे।
अल्मोड़ा में भी उत्तराखंड लोक वाहिनी ने रविवार को प्रसिद्ध आंदोलनकारी कवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की पुण्य तिथि मनाई। उलोवा ने गिर्दा के चित्र का माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अधिवक्ता जगत रौतेला की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा के गीतों ने उत्तराखंड की परिकल्पना को साकार किया। कुणाल तिवारी ने गिर्दा का प्रसिद्ध गीत ‘हम लड़ते रया भुला हम लड़ते रौलो’ गाकर उन्हें याद किया। कार्यक्रम का संचालन उलोवा के महासचिव पूरन चंद्र तिवारी ने किया। इस मौके पर प्रवक्ता दयाकृष्ण कांडपाल, कुनाल तिवारी, अजय मित्र सिह बिष्ट, अजय मेहता, रेवती बिष्ट, शमशेर जंग, विशन दत्त जोशी, जंगबहादुर थापा, हारिस मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
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प्रेस क्लब में हुए कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने गिर्दा के चित्र के सम्मुख दीप जलाया, उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गोष्ठी में वक्ताओं ने गिर्दा के गीतों और विभिन्न आंदोलनों में उनके योगदान को याद किया। अध्यक्षता करते हुए चंदन सिंह परिहार ने गिर्दा की जीवनी, संस्मरणों और प्रदेश के लिए योगदान पर प्रकाश डाला। रमेश पांडेय कृषक ने कहा कि गिर्दा आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत, बातें, कविताएं और लोक नाटकों के माध्यम से समाज हित में उठाए मुद्दे हमेशा जनसंघर्षों को नई ऊर्जा प्रदान करते रहेंगे। उत्तराखंड बनाओ, नशा नहीं रोजगार दो और चिपको आंदोलन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने गिर्दा के आदर्शों को सदैव जिंदा रखने के लिए प्रयास करने का संकल्प लिया। इस मौके पर वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मनोज ओली, रमेश प्रकाश पर्वतीय, नवीन रावल, घनश्याम जोशी, जगदीश उपाध्याय, हरीश नगरकोटी, मनीष गढ़िया आदि मौजूद रहे।
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अल्मोड़ा में भी उत्तराखंड लोक वाहिनी ने रविवार को प्रसिद्ध आंदोलनकारी कवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की पुण्य तिथि मनाई। उलोवा ने गिर्दा के चित्र का माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अधिवक्ता जगत रौतेला की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा के गीतों ने उत्तराखंड की परिकल्पना को साकार किया। कुणाल तिवारी ने गिर्दा का प्रसिद्ध गीत ‘हम लड़ते रया भुला हम लड़ते रौलो’ गाकर उन्हें याद किया। कार्यक्रम का संचालन उलोवा के महासचिव पूरन चंद्र तिवारी ने किया। इस मौके पर प्रवक्ता दयाकृष्ण कांडपाल, कुनाल तिवारी, अजय मित्र सिह बिष्ट, अजय मेहता, रेवती बिष्ट, शमशेर जंग, विशन दत्त जोशी, जंगबहादुर थापा, हारिस मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
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