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बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण को लेकर प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 13 May 2017 11:37 PM IST
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रेल की मांग
- फोटो : अमर उजाला
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बागेश्वर। बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति के सदस्यों ने शनिवार को जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर कुमाऊं के साथ भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। कहा कि गढ़वाल क्षेत्र को रेल से जोड़ने की पहल शुरू हो गई है लेकिन आजादी से पहले से प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को छोड़ दिया गया है। संघर्ष समिति के सदस्यों ने कहा कि यदि बागेश्वर के लिए शीघ्र रेल लाइन निर्माण की स्वीकृति नहीं दी गई तो आंदोलन तेज कर दिया जाएगा।
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पूर्व चेतावनी के अनुसार शनिवार को रेल निर्माण संघर्ष समिति के कार्यकर्ता अध्यक्ष नीमा दफौटी, महामंत्री खड़क राम आर्या के नेतृत्व में तहसील परिसर में एकत्र हुए। इसके बाद जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए चौक बाजार पहुंचे जहां पर सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन के लिए पिछले 12 वर्षों से संघर्ष किया जा रहा है। इस रेल लाइन की सर्वे देश की आजादी से पहले अंग्रेजी शासन में हुई थी।
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आजादी के बाद सामरिक महत्व की इस रेल लाइन को हाशिए पर डाल दिया गया। यदि बागेश्वर के लिए रेल लाइन का निर्माण किया जाता तो बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा जिलों की लाखों की आबादी को इसका लाभ मिलता। रेल लाइन से विकास के दरवाजे खुलते और पलायन में कमी आती। वक्ताओं ने रेलमंत्री सुरेश प्रभु पर भी भेदभाव का आरोप लगाया। कहा कि बागेश्वर को रेल लाइन से नहीं जोड़कर यहां की जनभावनाओं की उपेक्षा की जा रही है।
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जुलूस में इंद्रा मिश्रा, राधा लोहनी, सरस्वती गैलाकोटी, हेमा जोशी, लक्ष्मी धर्मशक्तू, शोभा धपोला, सिमरन कौर, हीरा नेेगी, मीनाक्षी थापा, शोभा नगरकोटी, हयात मेहता, प्रताप गढ़िया आदि थे।